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Ab Farq Nahi Padta Poetry by Jai Ojha Part - 1


Ek Waqt Tha Jab Tujhse Beinteha Pyar Karta Tha.
Ab To Tu Khud Mohabbat Ban Chali Aaye To Mujhe farq Nahin Padta.

एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.
अब तू खुद मोहब्बत बन चली आये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब मैं तेरी परवाह करता था,
अब तो तू मेरी खातिर फ़ना भी हो जाये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे हजारों Messages लिखा करता था.
और कोई काम ना था मेरा, और कोई काम ना था मेरा,
दिनभर बस तेरा Last Seen देखा करता था.
अब सुन ले तू, कि अब सुन ले तू,
अब तो अरसा बीत गया है Visit किये तेरे Profile को
जा, जा अब तू 24 घंटे भी Online रह तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझसे बिछड़ जाने का डर लगा रहता था.
तू कहीं छोड़ ना दे इस ख्याल से मैं सहमा सहमा सा रहता था.
लेकिन अब सुन ले, अब सुन ले, इतना जलील हुआ हूँ तेरे इश्क़ में,
इतना जलील हुआ हूँ तेरी इन रोज रोज छोड़ने छाड़ने की बातों से,
कि अब तू 1 क्या, 100 दफा छोड़ जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था, जब तुझ बिन एक पल ना रह सकता था.
बैचैन गुमशुदा था, अकेलेपन से डरता था.
लेकिन अब सुन ले कि अब तो इतना वक़्त बिता चूका हूँ इस अकेलेपन में,
अरे अब तो इतना वक़्त बिता चूका हूँ इस अकेलेपन में,
कि सुन ले, कि अब ताउम्र तन्हा रहना पड़ जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे कोई छू लेता तो मेरा खून खौल उठता था.
और इसलिए कई दफा मैं इन हवाओं से बैर पाला करता था.
अरे अपने हुस्न के सिवा कुछ नहीं है तेरे पास अगर,

अंग्रेजी में एक कहावत है
If Beauty is all you have, then ugly is all you are.
अगर आपके पास सिर्फ और सिर्फ ऊपर की खूबसूरती है,
और आपके अंदर कुछ भी नहीं है, तो आप भद्दे ही हो.

तो अपने हुस्न के सिवा कुछ नहीं है तेरे पास अगर,
तो जा, जा किसी के साथ हमबिस्तर भी हो जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
अरे इतना गुरुर किया तूने अपने इस मिट्टी के जिस्म पर,
जा तेरा ये जिस्म किसी और का हो जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब खुदा से तेरे लिए मन्नते माँगा करता था.
मुझे कुछ नहीं चाहिए था, सिर्फ तेरे लिए अपने उस खुदा को आजमाता था.
लेकिन अब सुन ले, अब तो मैं ना झुकता हूँ, ना पूजता हूँ, ना मानता हूँ किसी को,
अब तो भले ही तू खुद खुदा बन चली आये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब शेर लिखा करता था तेरे लिए और सुनाता था महफ़िलो में,
अरे अब तो अरसे बाद लिखी है ये अधूरी सी कविता तुझ पे,
तुझ पे लिखी है इसलिए अधूरी बोल रहा हूँ,
अरे अब तो अरसे बाद लिखी है ये अधूरी सी कविता तुझ पे,
अब सुन ले कि अब तो आगे कुछ भी ना लिखा जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
बताना तुझे मिल जाये कोई मुझ जैसा कहीं और अगर,
जा जा तू औरो को आजमा ले तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे हजारों की भीड़ में भी पहचान लिया करता था.
हिजाब में होती अगर तो आँखों से पहचान लिया करता था.
अब तो आँखों से ओझल किया है मैंने तुझे कुछ इस कदर,
की अगर तू इस भीड़ में मेरी आवाज भी सुन रही होगी तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

खैर फिर भी करता हूँ शुक्रिया तेरा, तुझे खोने से मैंने बहुत कुछ पा लिया है.
नज्मे, गजले और शायरिया सब मिल गयी है मुझे,
और इन्होने तो जैसे मुझे गले से लगा लिया है.
अब तो मुझे सुनने वाले भी है, चाहने वाले भी है, दाद देने वाले भी है,
लेकिन अब सुन ले कि अब तो इतना बेख़ौफ़ हो गया हूँ,
कि ये सब भी छोड़ जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
अरे खुद में है मस्त हो गया है तेरा ये जय इतना,
कि अब कोई सुनने आये या ना आये मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

खैर चाहता तो नहीं था तुझे बेनकाब करूँ यूँ सबके सामने.
लेकिन सुन ले कि एक बेवफा मेरी कलम से बेइज्जत भी हो जाये,
तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
याद कर वो वक़्त जब एक लफ्ज नहीं सुन पाता था तेरे खिलाफ,
अब देख कि अब देख तेरी तौहीन पर यहाँ तालियां बज रही है,
तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.


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