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    Mil Jayega Koi Mard Apko Apna Dard Chupaya Hua by RJ Raunac


    Tufano Me Bhi Pair Jamaya Hua, Mehnat Ke Paseene Se Nahaya Hua.
    Mil Jayega Koi Mard Apko Apna Dard Chupaya Hua..

    क्या तुमने किसी मर्द को देखा है?
    उसके पीछे छिपे उसके दर्द को देखा है..
    नहीं देखा है तो आज मेरी नजर से देखो,
    अच्छी, बुरी, हर तरह से देखो..
    क्योंकि वो देखना जरुरी है जो अनदेखा है..
    जिसने feelings की बाढ़ को अपने जिगर से रोका है..
    ये आसान बात नहीं होती,
    दुनिया मर्द के लिए कभी नहीं रोती..
    किसी को फर्क नहीं पड़ता, कितनी कठिन उसकी डगर है..
    आपको तो पता भी नहीं कि आज के अख़बार की वो एक खबर है..
    जेब की Savings चाय सुट्टे में उडाता हुआ..
    पुरे घर के लिए अकेले कमाता हुआ..
    खुद Sad रहकर बच्चों का New Year Happy मनाता हुआ..
    मिल जायेगा कोई ना कोई मर्द आपको, अपना दर्द छुपाता हुआ..

    अरे बॉर्डर पर तुम्हारे लिए लड़ता हुआ..
    समाज में चार लोगों से डरता हुआ..
    एक फौजी के सीने का नाप भी है..
    हाँ, वो एक बेटी का बाप भी है..
    तूफानों में भी अपना पैर जमाया हुआ..
    मेहनत के पसीने से नहाया हुआ..
    मिल जायेगा आपको कोई ना कोई मर्द, अपना दर्द छुपाया हुआ..

    वो एक भाई भी है,
    राखी से बंधी उसकी कलाई भी है..
    वो Introvert भी है..
    बैटमैन वाली उसके पास एक टी शर्ट भी है..
    एक लड़की पे वो मरता भी है..
    लेकिन हाँ, उसको कहने से वो डरता भी है..
    दिल उसका भी टुटा है, लेकिन वो नाराज नहीं है..
    वो ऐसी चीख है जिसमे आवाज नहीं है..
    क्योंकि किसी का दुपट्टा उसके लिए कोई Toy नहीं है..
    आशिक़ तो है लेकिन Playboy नहीं है..
    हजार परेशानियों में भी मुस्कुराता हुआ..
    लाख तकलीफ में भी कुछ ना बताता हुआ..
    मिल जायेगा आपको कोई ना कोई मर्द, अपना दर्द छुपाया हुआ..

    हाथ उठाये तो बे दर्द भी है..
    मार खा जाये तो ना मर्द भी है...
    माना कि वो Perfect नहीं है..
    क्या इसीलिए उसकी कोई Respect नहीं है..
    रोज अंदर थोड़ा थोड़ा मरता हुआ..
    अँधेरे से ज्यादा सवेरे से डरता हुआ..
    हर Conditions में खुद को Adjust करता हुआ..
    मुर्गा होकर कसाई पर Trust करता हुआ..
    खुद भूखा रहकर पुरे परिवार को खिलाता है..
    और दिन में चार बार,
    "All men are Dog” वाली गाली भी वही खाता है..

    वो एक पति भी है..
    मजाक में कहो तो एक दुर्गति भी है..
    Shopping Bags के बोझ को उठाया हुआ..
    क्रेडिट कार्ड से अपनी नजरें चुराया हुआ..
    सबकी फ़िज़ूलख़र्ची का उसके पास हिसाब है..
    चेहरा उसका एक खुली किताब है..
    ओवरटाइम में वो सोता नहीं है..
    बोनस ना मिले फिर भी वो रोता नहीं है..
    माँ और बीवी दोनों ही उसको प्यारी है..
    पुरे घर की उसके ऊपर ही जिम्मेदारी है..
    ज़िन्दगी ने उसकी बराबर मारी है..
    कहीं डॉक्टर, कहीं इंजीनियर तो कहीं Peon भी है..
    थोड़ा बहुत उसके सर पर लोन भी है..
    इतना सब देकर भी वो स्वार्थी है..
    लोग कहते है ये उसकी Patriarchy है..

    वो ज्यादा Rude नहीं है..
    शायद इसीलिए कइयों के लिए वो Dude नहीं है.
    ये भी तो एक तरह का गम ही है..
    गलती चाहे किसी की भी हो, दोषी तो हम ही है..
    "तुम तो लड़के हो, तुम्हें क्या डर है"
    ये उससे पूछो, जो ग्रेजुएशन के बाद भी घर पर बैठा है..
    क्योंकि बेरोजगार से कोई नहीं पूछता कि,
    "भाई तू कैसा है"
    दिक्कत ये है कि लोग उसको समझते नहीं है..
    जानते सब है फिर भी कहते कुछ नहीं है..
    क्योंकि, बॉस इस सोसाइटी का एक ही Rule है..
    जो Emotional है ना वही फूल है..

    तो भाई जिंदगी में कभी रोने का नहीं..
    आंसुओ के दाग अपनी शर्ट से धोने का नहीं..
    कल हो ना हो ये तो एक फ़िल्मी बात है..
    मगर बाहर की भीड़ में कभी अपने आप को खोने का नहीं..
    क्योंकि जीने का सबसे अच्छा एक यही Way है..
    मुबारक हो, आज “International Men’s Day” है..


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