Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai by Goonj Chand

Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai by Goonj Chand

लोग कहते है इस औरत में हमे खुद्दारी नज़र आती है..
और अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..
और क्या उम्मीद रखी जाये उन मर्दो इस दुनिया में भला…
जिन्हे अपने आगे हर औरत हारी नजर आती है..
इसीलिए अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

वो क्या समझेंगे किसी की ख्वाइशो को भला,
जिन्हे केवल पूरे कपड़े पहनने लड़किया ही खानदानी नज़र आती है…
और किसी भी औरत को कमजोर समझने की गलती मत करना…
क्योंकि वक़्त आने पर वही औरत काली नज़र आती है..
अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

इज़्ज़त दो औरत को व्याह कर लाये हो खरीद कर नहीं,
क्योंकि खरीदारी के नाम पर तो यह दहेज़ की दूकान दारी नज़र आती है..
और समाज का डर है यहां अपनी खुशियों से ज्यादा…
हर औरत यहां समाज की दबाई नज़र आती है…
अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

अब बंद करो हर बात पे रोना और स्टैंड लो खुद के लिए,
क्योंकि इसी में खुद की खुद्दारी नज़र आती है..
अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

Main Ravan Hi Thik Hun by Shekhar Deep – Ravan Vani Part 2

Libaas Kaala, Awaaj Kali, Main Andhere Ka Prateek Hun..
Tum Sab Ram Ban Jao, Main Ravan Hi Thik Hun..

बेहाल इतने रहे है हम कि आज खुद के हाल भूल गए,
ये ऊँची उड़ान भरने वाले परिंदे लगता है गुलेल कि मार भूल गए..
और एक वक़्त तक खामोश क्या बैठा रावण,
लगता है तुम दुनिया वाले मेरी तलवार की धार भूल गए..

फिर चाहे भगवान हो या इंसान, मैं सबके लिए एक बहुत बड़ी हानि था..
मैं रावण बचपन से ही सर्वश्रेष्ठ और ज्ञानी था..
हां थोड़ा बेढंगा, शिव तांडव सा हूँ,
मैं मेरी माँ के आशीर्वाद से थोड़ा दानव सा हूँ..
और जब दर्द में भी चीख चीख़कर मैंने तांडव किया,
तब महाकाल ने खुद मेरा नाम रावण लिया..
महाकाल के दिए इस नाम को कोई कैसे मिटा सकता है..
ना रावण कभी हारा था और ना कोई हरा सकता है..
हाँ मेघनाथ के लिए मैंने सारे ग्रहो को ग्यारहवें स्थान पर बैठाया था..
मुझ रावण ने यमराज और शनि को अपना बंदी बनाया था..
और सूर्य खुद शनि महाराज को बचाने गए..
सामने देखो कंकर पत्थर, कैलाश को हिलाने गए..
मुझे बस विश्वासघात के तीरों ने भेदा था..
अरे मुझ ज्ञानी से खुद ज्ञान लेने खुद राम ने लक्ष्मण को भेजा था..
हाँ मैंने बुराई को जन्म दिया, मैंने अपनी ताकत पर घमंड किया..
मुझे एक नहीं, साल में हजार बार जला दो,
अरे छोड़ो मुझ रावण की बात, तुम मुझे थोड़ा ही सही राम बनकर दिखा दो..
घमंड मुझमें, मैं का होना जरुरी है..
और रावण होना बच्चों का खेल थोड़ी है..
जमी धूल मेरे नाम से हट जाएगी..
जब मेरे वक़्त की आँधी चल जाएगी..
और ये आज जो नफरत नफरत करते है ना, ये भी रावण रंग में रंग जायेंगे..
एक वक़्त के बाद ये भी भीड़ का हिस्सा बन जायेंगे..
लिबास काला, आवाज काली, मैं अँधेरे का प्रतीक हूँ..
तुम सब राम बन जाओ, मैं रावण ही ठीक हूँ..

हंसने वालो के नाम के साथ साथ चेहरे भी याद है..
गलती मेरी रही कहीं वरना इनकी इतनी कहाँ औकात है..
कि बता दूँ, निहत्थे हाथ से घायल शेर पर वार नहीं करते..
और ये नदी नाले ना समंदर पर हुंकार नहीं भरते..
कि हाँ हूँ घमंडी, जिस रास्ते से गुजर जाऊँ, फिर उस रास्ते झांकता नहीं हूँ..
मैं रावण हूँ मेरी जान, थूक के चाटता नहीं हूँ..

 
 

Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun by Goonj Chand

Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun by Goonj Chand

किसी के लिए दे दूँ अपनी जान इतनी भी हारी नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

तू है अगर धोकेबाज़ तो मैं भी बाज़ारू नहीं हूँ…
और तू है अगर कूल डैशिंग बाँदा तो में भी अबला नारी नहीं हूँ…
है अगर मोहब्बत निभाने का दम रखता है तू,
तो में भी ऐसी मोहब्बत में पीछे हटने वाली नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

गेडिया मारता है अगर तू रातो में सड़को पर,
तो मैं भी तेरा इंतज़ार करने वाली नहीं हूँ…
और दारु पीकर लेट आने की आदत है तुझे,
तो मैं भी तेरे लिए घर का गेट खोलने वाली नहीं हूँ…
हाँ अगर जनता है तू औरत की इज्ज़त करना,
तो मैं भी तेरी प्राइवेसी छीनने वाली नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

तू है अगर बात बात पे गाली देने वाला,
तो मैं भी चुप होकर सुनने वाली नहीं हूँ..
तू होगा राजा बेशक अपने घर में मगर,
पापा की रानी हूँ मैं भी तेरी नौकरानी नहीं हूँ…
और तू है अगर बीवी का ख्याल रखने वाला,
तो मैं भी किसी के आगे तेरा सर झुकाने वाली नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

किसी के लिए दे दूँ अपनी जान इतनी भी हारी नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai by Rekha Sharma

Kagaj Par Pade Adhure Alfazon ko Pura Kar Jaata Hai..
Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai..

कागज पर पड़े अधूरे अल्फाजों को पूरा कर जाता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

थोड़ा सा बुद्धू, थोड़ा शायराना है..
मेरी सुरमयी आँखों पर उसका दिल दीवाना है..
मशरूफ है सब इस शहर की भागमभाग में..
पर वो थम जाता है किसी टपरी की छांव में..
उसकी कहानी की कश्ती को किनारो तक लाती हूँ..
उसके ख़्वाबों की दुनिया में एक आशियाँ मैं भी बनाती हूँ..
वो नहीं कहता पर उसका हर ख्वाब जानती हूँ..
उसके मुखौटे के पीछे की रूह को पहचानती हूँ..
मुझे रास्तों की परवाह नहीं, मैं उसे अपना घर मानती हूँ..
पर ये सारी बातें कहने से ना जाने मेरा मन क्यों कतराता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

मेरी सारी बातों को बड़े इत्मीनान से सुनता है..
मैं खफा हूँ तो हाँ मुझे मनाता है..
मैं परेशान हूँ तो परेशान हो जाता है..
अगर मैं चुप हूँ तो मेरा सर सहलाता है..
मेरे मन में चल रही हर उलझन को सुलझाता है..
मेरे हर अधूरे ख्वाब को मुकम्मल वो कराता है..
मेरे माथे की सिलवट को अपने होंठो से सहलाता है..
मेरे दिल का हाल जान उसके दिल को करार आता है..
खुद कितनी ही जदीद में हो, मेरा हर ख्वाब बांटता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

हाँ, हाँ मुझसे प्यार बेहद करता है, पर ये बात कहने से भी डरता है..
मेरे हंसने से लेकर मेरा खफा होना, हर चीज उसे पसंद है..
पर उसके जेहन में चल रही एक गंभीर सी रंज है..
अपने जज्बातों को शब्दों में पिरोता है..
सारी असमंजस को कविताओं का रूप देता है..
पर इन कविताओं को भी कहाँ मुकम्मल कर पता है..
दोस्ती के दायरे में अपने एहसासो को दफ़न कर जाता है..
उसकी खिलखिलाती हंसी यही आकर सिमट जाती है..
उसकी आँखों की चमक महज पानी बन बह जाती है..
मेरी तो कब से हाँ है, पर संकोच दो तरफ़ा रहता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

पर, पर तेरी बातों से नहीं हूँ अनजान..
मुझे भी है तेरे इश्क़ की पहचान..
बहुत कर लिया सोच विचार,
आज करने जा रही हूँ सारी बातों का प्रचार..
कि हाँ तू है मेरी धड़कन, मैं हूँ तेरी जान..
तेरे दिल में ही आके रुकेगा मेरे दिल का ये विमान..
क्योंकि तेरे बिना मेरा दिल हर रोज मचल जाता है..
तू ही वो लड़का है जो मुझे मुझसे जयादा चाहता है..

 

Kinnar by Shivani Tyagi – A Transgender life Story

Kinnar by Shivani Tyagi – A Transgender life Story

कोई शायर समझता है मुझे, कोई आवारा पागल समझता है।
मगर वो बिछड़ने का दर्द, या तो वो जमीं या वो बदल समझता है।
लाख समझा ले ये जमाना, पर वो दुरी का दर्द,
या तो तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है।

छोटा सा बच्चा जन्मा माँ के आँचल में,
माँ की खवाहिशे थी बहुत बड़ी बड़ी और पाँव थे बदल में।
माँ खुश थी और परेशान भी,
क्योंकि माहौल कुछ उदास था।
शायद मेरे सच का अब सबको अहसास था।
किन्नर का नाम दे दिया तो माँ का दिल भी रोता है।
मैं सवाल पूछती हूँ तो माँ कहती है –
ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

खुदा ने आदमी जैसी वो नायब चीज बनाई थी।
और उससे ज्यादा खूबसूरत वो औरत नजर आई थी।
फिर एक और चीज बनाई जो खूबसूरत थी और नायाब भी।
किन्नर, पर ना आदमी को ना औरत को उसके अस्तित्व की कहानी नजर आई थी।
क्या हुआ अगर मेरा अस्तित्व अगर भिन्न है।
अर्धनारेश्वर हूँ मैं शिव का और यही मेरा चिन्ह है।
क्यों, कैसे हूँ मैं भिन्न, चीख चीखकर आंसू पूछता है।
मैं सवाल पूछती हूँ, मैं सवाल पूछती हूँ,
तो ये समाज कहता है – ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

मैं समाज भर से लड़ रही, खुद के सम्मान के लिए,
मैं लड़ रही थी अपने अस्तित्व के लिए।
और इंसान हूँ फिर भी लड़ रही हूँ,
अपनी पहचान के लिए।
और तुमने जरा भी वक़्त जाया ना किया ना,
मेरे अपमान के लिए।

बेनाम नहीं हूँ,
फिर भी किन्नरों जैसे ना जाने कैसे कैसे नामो से मुझे पुकारा जाता है।
बेघर नहीं हूँ, मेरा भी परिवार है,
जिसे समुदाय के नाम से जाना जाता है।
क्या खूब कहा है कि ऐ इंसान इतना जुल्म ना कर।
पूछ उस मिटटी से कि वो सिकंदर कहाँ है?
ख़ाक होगा एक दिन तू भी और मैं भी,
फिर बताना, कौनसा तेरा और कौनसा मेरा जहाँ है।
हर रोज, हर दिन ये ह्रदय मेरा तानो का बोझ ढोता है।
मैं पूछती हूँ तो फिर ये ह्रदय कहता है,
ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

हाँ माना मैंने, मैं ना किसी की जरुरत हूँ।
बलाए लेती हूँ, जिस्म से ना सही पर दिल से तो बहुत खूबसूरत हूँ।
तालियों से ही तो चलती थी, तुमने इसी का मजाक बना दिया।
फिर कामयाबी का मैंने ऐसा जादू चलाया,
कि मैंने उन्हें तालियां बजाना सीखा दिया।
अब पूछते है कि कोई इतनी परेशानी के बाद कैसे सफलता के बीज बो सकता है?
अब मैं कहती हूँ,
ऐसा ही होता था, ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

Ye Kaisa Pyar Hai Tumhara by Goonj Chand

Ye Kaisa Pyar Hai Tumhara by Goonj Chand

Kyu Mujhe Chodkar Tumhare Paas PUBG Ke Liye Wqat Hai

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जो ना दिखाई देता है ना सुनाई देता है,
जिसमे प्यार के नाम पर सिर्फ साथ रहना,और साथ खाना ही दिखाई देता है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा..
जिसमे शर्ते है, लड़ाई है,रुस्वाई है..
क्या अपनी मर्ज़ी से तुमने मेरे साथ कोई Pic खिचवाई है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जिसका मुझे कभी एहसास नहीं होता…
और पास होते हुए भी तू मेरे पास नहीं होता…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जिसमे जिस्म तो साथ है पर रूह साथ नहीं…
और क्यों इस प्यार में प्यार वाली कोई बात नहीं…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जो सिर्फ मेरे लिए ही इतना सख्त है…
क्यों मुझे छोड़ कर तुम्हारे पास PUBG तक के लिए वक़्त है….

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जो दुनिया के डर से सिमट सा जाता है…
और बताओ तो ज़रा वो लम्हा जब,
बेवजह तुम्हे मुझ पर प्यार आता है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे में I love you too सुनना चाहती हूँ…
और कभी तो तुम्हारे मूह से खुद I love you सुनना चाहती हूँ…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे तुमसे मेरे बालो को कभी सवारा नहीं जाता…
और मेरे बिना कहे मुझे गले से लगाया नहीं जाता…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे चुभन ही चुभन है…
और क्यों हो रही इस रिश्ते में मुझे अब घुटन है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जो अपने प्यार को इतना तड़पाता है..
और तुम्हारा ये नज़र अंदाज़ करना,
मुझसे अब सहा नहीं जाता है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे तुम कह देते हो तुम्हे प्यार जताना नहीं आता…
पर सच तो यह है की शायद तुम्हे प्यार निभाना नहीं आता…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे प्यार जताना इतना मुश्किल है…
आखिर क्यों तुम्हारा दिल इतना बुज़दिल है….

Meri Mohabbat Ko Majboori Samajh Rakha Hai by Rekha Sharma

Mere Andar Ke Jawalamukhi Ko Mere Andar Ka Taap Samjh Kar Rakha Hai..
Meri Mohabbat ki Sharafat Ko Meri Majboori Samajh Kar Rakha Hai..

मेरे अंदर के ज्वालामुखी को मेरे अंदर का ताप समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

मैं मोहब्बत बहुत करती हूँ तुमसे इस बात से तुम अनजान नहीं..
मेरे दिल की धड़कन का साज हो तुम, इस बात पर तुम्हें गुमान नहीं..
मेरे शिद्दत वाले इश्क़ को एहसासों की रवानी समझ रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

तुम्हारे एक इशारे पर मेरा इधर से उधर दौड़ लगाना मेरा..
तुम्हारी ना सुनु तो मन का थोड़ा मचल जाना मेरा..
तुम्हारे सारे ताने सुनकर भी तुम्हें पलकों पर बैठा रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

तब भी चोट तुम्हें लगे और दर्द हमें हो ऐसी हालत थी हमारी..
तुम ना कहो तो ना छू सके तुम्हें ये हिदायत थी हमारी..
हमारी हिदायत की तामील को तामील हुकुम समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

वो कहता था चेहरे की नुमाइश कर किया इश्क़, इश्क़ नहीं महज झूठा खवाब है..
पर भाती नहीं उसे फूटे आँख भी मैं, मेरे चेहरे पर उसे दिखते दाग है..
वो अपनी ही बातों की सरहाना कर उनसे मुकरा हुआ बैठा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

ना जाने कब उसके इश्क़ में इतना अँधा हो गयी..
उसे मासूम समझ उसका हर सितम सह गयी..
और मेरी मासूम नादान सी अठखेलियों को दिखावटी मुखौटा समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

दिल आवाज उसे सौ लगाए, वो एक नहीं सुनता..
मेरे गीले पड़े तकिये पर वो रहे सौ ख्वाब बुनता..
मैं पूछ लो जो हाल जरा इस बात को मेरी बेकरारी समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

बेनाम था ये रिश्ता, इस रिश्ते का कोई  नाम नहीं..
हूँ उसके दोस्तों में मशहूर, पर मेरी कोई पहचान नहीं..
और स्वाभिमान की इस लड़ाई को मेरा Arrogance समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

क्या शिकायतें, क्या नाराजगी खुद को धोखा देने की बात है..
उस इंसान से हुई मोहब्बत या अपनी आशाओं से ध्यान देने की बात है..
क्या उम्मीदों को अपनी व्यहवार उसका समझ कर रखा है..
तभी तुम्हारी मोहब्बत की शराफत को तुम्हारी मजबूरी समझ कर रखा है..

 
ना ना बेटा, तुमसे ना हो पायेगा ये कॉपी