Ye Kaisa Pyar Hai Tumhara by Goonj Chand

Ye Kaisa Pyar Hai Tumhara by Goonj Chand

Kyu Mujhe Chodkar Tumhare Paas PUBG Ke Liye Wqat Hai

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जो ना दिखाई देता है ना सुनाई देता है,
जिसमे प्यार के नाम पर सिर्फ साथ रहना,और साथ खाना ही दिखाई देता है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा..
जिसमे शर्ते है, लड़ाई है,रुस्वाई है..
क्या अपनी मर्ज़ी से तुमने मेरे साथ कोई Pic खिचवाई है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जिसका मुझे कभी एहसास नहीं होता…
और पास होते हुए भी तू मेरे पास नहीं होता…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जिसमे जिस्म तो साथ है पर रूह साथ नहीं…
और क्यों इस प्यार में प्यार वाली कोई बात नहीं…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जो सिर्फ मेरे लिए ही इतना सख्त है…
क्यों मुझे छोड़ कर तुम्हारे पास PUBG तक के लिए वक़्त है….

ये कैसा प्यार है तुम्हारा…
जो दुनिया के डर से सिमट सा जाता है…
और बताओ तो ज़रा वो लम्हा जब,
बेवजह तुम्हे मुझ पर प्यार आता है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे में I love you too सुनना चाहती हूँ…
और कभी तो तुम्हारे मूह से खुद I love you सुनना चाहती हूँ…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे तुमसे मेरे बालो को कभी सवारा नहीं जाता…
और मेरे बिना कहे मुझे गले से लगाया नहीं जाता…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे चुभन ही चुभन है…
और क्यों हो रही इस रिश्ते में मुझे अब घुटन है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जो अपने प्यार को इतना तड़पाता है..
और तुम्हारा ये नज़र अंदाज़ करना,
मुझसे अब सहा नहीं जाता है…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे तुम कह देते हो तुम्हे प्यार जताना नहीं आता…
पर सच तो यह है की शायद तुम्हे प्यार निभाना नहीं आता…

ये कैसा प्यार है तुम्हारा
जिसमे प्यार जताना इतना मुश्किल है…
आखिर क्यों तुम्हारा दिल इतना बुज़दिल है….

Meri Mohabbat Ko Majboori Samajh Rakha Hai by Rekha Sharma

Mere Andar Ke Jawalamukhi Ko Mere Andar Ka Taap Samjh Kar Rakha Hai..
Meri Mohabbat ki Sharafat Ko Meri Majboori Samajh Kar Rakha Hai..

मेरे अंदर के ज्वालामुखी को मेरे अंदर का ताप समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

मैं मोहब्बत बहुत करती हूँ तुमसे इस बात से तुम अनजान नहीं..
मेरे दिल की धड़कन का साज हो तुम, इस बात पर तुम्हें गुमान नहीं..
मेरे शिद्दत वाले इश्क़ को एहसासों की रवानी समझ रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

तुम्हारे एक इशारे पर मेरा इधर से उधर दौड़ लगाना मेरा..
तुम्हारी ना सुनु तो मन का थोड़ा मचल जाना मेरा..
तुम्हारे सारे ताने सुनकर भी तुम्हें पलकों पर बैठा रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

तब भी चोट तुम्हें लगे और दर्द हमें हो ऐसी हालत थी हमारी..
तुम ना कहो तो ना छू सके तुम्हें ये हिदायत थी हमारी..
हमारी हिदायत की तामील को तामील हुकुम समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

वो कहता था चेहरे की नुमाइश कर किया इश्क़, इश्क़ नहीं महज झूठा खवाब है..
पर भाती नहीं उसे फूटे आँख भी मैं, मेरे चेहरे पर उसे दिखते दाग है..
वो अपनी ही बातों की सरहाना कर उनसे मुकरा हुआ बैठा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

ना जाने कब उसके इश्क़ में इतना अँधा हो गयी..
उसे मासूम समझ उसका हर सितम सह गयी..
और मेरी मासूम नादान सी अठखेलियों को दिखावटी मुखौटा समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

दिल आवाज उसे सौ लगाए, वो एक नहीं सुनता..
मेरे गीले पड़े तकिये पर वो रहे सौ ख्वाब बुनता..
मैं पूछ लो जो हाल जरा इस बात को मेरी बेकरारी समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

बेनाम था ये रिश्ता, इस रिश्ते का कोई  नाम नहीं..
हूँ उसके दोस्तों में मशहूर, पर मेरी कोई पहचान नहीं..
और स्वाभिमान की इस लड़ाई को मेरा Arrogance समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

क्या शिकायतें, क्या नाराजगी खुद को धोखा देने की बात है..
उस इंसान से हुई मोहब्बत या अपनी आशाओं से ध्यान देने की बात है..
क्या उम्मीदों को अपनी व्यहवार उसका समझ कर रखा है..
तभी तुम्हारी मोहब्बत की शराफत को तुम्हारी मजबूरी समझ कर रखा है..

 
ना ना बेटा, तुमसे ना हो पायेगा ये कॉपी