Humko To Sirf Ghar Pe Rehna Hai by Aushmann Khurrana

Humko To Sirf Ghar Pe Rehna Hai by Aushmann Khurrana

वो सामने वाली बिल्डिंग कुछ दिन पहले सील हो गयी।
और तब से आस पड़ोस के लोगो की जिंदगी थोड़ी तब्दील हो गयी।
उसी बिल्डिंग के नीचे वाली दुकान से तो घर का सामान आता था।
वो बिमारी के बारे में पहले बता देते तो क्या जाता था।

आज हम डरे हुए है।
जीवित है पर मरे हुए है।
आज लगता है काश कर दें सब कुछ ठीक इस दुनिया को करके Rewind
But Believe Me This is Nothing but the Collective Karma of Mankind
सलाम है उनको जो सड़कें साफ़ करता है।
कचरा लेकर जाता है।
घर का सामान लेकर आता है।
और फिर अपने घर जाता है।
पर हमने उनको कभी इज्जत दी ही नहीं,
हम पैसे वाले है, हमारे बाप का क्या जाता है।
और वो बेचारा डरता है,
कि कोरोना वायरस उसके परिवार को ना हो जाये। 
वो अपने छोटे बच्चों को छू नहीं पाता है।
ये आमिर गरीब का इंसानियत से परे का नाता है।
इस देश को गरीब ही चलाता था, गरीब ही चलाएगा।
हमे इस समय भी सब सुविधाएं गरीब ही दिलाएगा।

आज जब सब ठीक हो जायेगा तो इन लोगो को इज्जत देना।
कोई काम छोटा नहीं होता ये बात अपने पल्ले बाँध लेना।
आज डॉक्टर्स, नर्स, पुलिस, हमारे सिक्योरिटी गार्ड है, सबसे जयादा काम के।
हम सब बॉलीवुड हीरो है बस नाम के।
हम बस पैसे दे सकते है, हथियार दे सकते है।
लड़ना उनको है, उन्ही को सब कुछ सहना है।
हमको तो सिर्फ घर पे रहना है।
हमको तो सिर्फ घर पे रहना है।

ना ना बेटा, तुमसे ना हो पायेगा ये कॉपी