Main Ravan Hi Thik Hun by Shekhar Deep – Ravan Vani Part 2

Libaas Kaala, Awaaj Kali, Main Andhere Ka Prateek Hun..

Tum Sab Ram Ban Jao, Main Ravan Hi Thik Hun..

बेहाल इतने रहे है हम कि आज खुद के हाल भूल गए,

ये ऊँची उड़ान भरने वाले परिंदे लगता है गुलेल कि मार भूल गए..

और एक वक़्त तक खामोश क्या बैठा रावण,

लगता है तुम दुनिया वाले मेरी तलवार की धार भूल गए..

फिर चाहे भगवान हो या इंसान, मैं सबके लिए एक बहुत बड़ी हानि था..

मैं रावण बचपन से ही सर्वश्रेष्ठ और ज्ञानी था..

हां थोड़ा बेढंगा, शिव तांडव सा हूँ,

मैं मेरी माँ के आशीर्वाद से थोड़ा दानव सा हूँ..

और जब दर्द में भी चीख चीख़कर मैंने तांडव किया,

तब महाकाल ने खुद मेरा नाम रावण लिया..

महाकाल के दिए इस नाम को कोई कैसे मिटा सकता है..

ना रावण कभी हारा था और ना कोई हरा सकता है..

हाँ मेघनाथ के लिए मैंने सारे ग्रहो को ग्यारहवें स्थान पर बैठाया था..

मुझ रावण ने यमराज और शनि को अपना बंदी बनाया था..

और सूर्य खुद शनि महाराज को बचाने आ गए..

सामने देखो कंकर पत्थर, कैलाश को हिलाने आ गए..

मुझे बस विश्वासघात के तीरों ने भेदा था..

अरे मुझ ज्ञानी से खुद ज्ञान लेने खुद राम ने लक्ष्मण को भेजा था..

हाँ मैंने बुराई को जन्म दिया, मैंने अपनी ताकत पर घमंड किया..

मुझे एक नहीं, साल में हजार बार जला दो,

अरे छोड़ो मुझ रावण की बात, तुम मुझे थोड़ा ही सही राम बनकर दिखा दो..

घमंड मुझमें, मैं का होना जरुरी है..

और रावण होना बच्चों का खेल थोड़ी है..

जमी धूल मेरे नाम से हट जाएगी..

जब मेरे वक़्त की आँधी चल जाएगी..

और ये आज जो नफरत नफरत करते है ना, ये भी रावण रंग में रंग जायेंगे..

एक वक़्त के बाद ये भी भीड़ का हिस्सा बन जायेंगे..

लिबास काला, आवाज काली, मैं अँधेरे का प्रतीक हूँ..

तुम सब राम बन जाओ, मैं रावण ही ठीक हूँ..

हंसने वालो के नाम के साथ साथ चेहरे भी याद है..

गलती मेरी रही कहीं वरना इनकी इतनी कहाँ औकात है..

कि बता दूँ, निहत्थे हाथ से घायल शेर पर वार नहीं करते..

और ये नदी नाले ना समंदर पर हुंकार नहीं भरते..

कि हाँ हूँ घमंडी, जिस रास्ते से गुजर जाऊँ, फिर उस रास्ते झांकता नहीं हूँ..

मैं रावण हूँ मेरी जान, थूक के चाटता नहीं हूँ..

 
 

Chai Cigarette Bewafai Shayari by Ankit Guryan

Meri Mohabbat ko Hamesha Hi Wo Kuch Is Kadar Satati Rahi..

Main Chai Ka Shaukeen Tha Or Wo Mujhe Coffee Pilati Rahi..

उसकी मोहब्बत की बस इतनी सी कहानी है,

लोग उसके दीवाने है और वो चाय की दीवानी है..

मेरी मोहब्बत को हमेशा ही वो कुछ इस कदर सताती रही..

मैं चाय का शौक़ीन था और वो मुझे कॉफ़ी पिलाती रही..

ज्यादा कुछ की तमन्ना नहीं मुझको,

बस एक छोटी सी फरमाइश करता हूँ..

इन सर्द रातों में बस एक तेरा साथ हो,

और एक कप चाय की ख्वाहिश रखता हूँ..

तेरे चले जाने से जिंदगी मुझे कुछ यूँ अलग लगी है..

भूलकर कॉफ़ी मुझे आज फिर चाय की तलब लगी है..

भूल जायेगा तू हर गम अपने,

कभी एक लम्हा संग मेरे जीकर तो देख..

अरे क्या रखा है तेरे इन महखानो में,

कभी एक प्याली चाय संग मेरे पीकर तो देख..

कैसे छोड़ दूँ मैं चाय, सिगरेट और उसको अंकित..

क्योंकि ये तीनो मेरी बिगड़ी आदतों में जो शुमार है..

तेरी जुदाई के गम को सहना सीख गया हूँ,

और कुछ इस कदर जिंदगी जीने लगा हूँ मैं..

चाय पिया करता था तन्हाई में अक्सर,

अब साथ में सिगेरट भी पीने लगा हूँ मैं..

तेरे साथ बिताया हर एक लम्हा नफरत की आग में जला देता हूँ मैं..

इश्क़ की चिंगारी को अब जलने से पहले ही बुझा देता हूँ मैं..

तुम ख्वाब में भी आती हो और तुम याद भी बहुत आती हो,

मगर अफ़सोस तेरी यादों को अब सिगेरट के धुएं में उड़ा देता हूँ मैं..

तेरी मोहब्बत को भुलाने के लिए रोज सिगेरट फूंक रहा हूँ मैं..

जाने अनजाने में जिंदगी का एक एक दिन कम कर रहा हूँ मैं..

तुम बेवफा हो हमेशा यही सोचकर सोता हूँ,

हो सके तो इस नींद से मुझे जगाने आ जाना…

और लगे जो कभी मेरी सिगेरट तुम्हें अपनी सौतन,

तो मुझे समझने नहीं इसे बुझाने आ जाना..

हम प्यार करना जानते है, धोखा कभी किसी को दिया नहीं करते..

इश्क़ मोहब्बत की बाते करते है हमेशा, किसी की बेवफाई का जिक्र कभी किया नहीं करते..

और गलतफहमी है तुम्हें कि दाढ़ी बढाकर मजनू बन जायेंगे हम तेरे चले जाने के बाद,

हम चाय के शौक़ीन है मैडम, तुझ जैसे बेवफा के लिए शराब पिया नहीं करते..

रिश्ता हमारे प्यार का तुमने कुछ यूँ कलंकित कर दिया..

बेवफाई खुद की और ज़माने में बदनाम अंकित कर दिया..

 
 

Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai by Rekha Sharma

 
Kagaj Par Pade Adhure Alfazon ko Pura Kar Jaata Hai..
Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai..

कागज पर पड़े अधूरे अल्फाजों को पूरा कर जाता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
थोड़ा सा बुद्धू, थोड़ा शायराना है..
मेरी सुरमयी आँखों पर उसका दिल दीवाना है..
मशरूफ है सब इस शहर की भागमभाग में..
पर वो थम जाता है किसी टपरी की छांव में..
उसकी कहानी की कश्ती को किनारो तक लाती हूँ..
उसके ख़्वाबों की दुनिया में एक आशियाँ मैं भी बनाती हूँ..
वो नहीं कहता पर उसका हर ख्वाब जानती हूँ..
उसके मुखौटे के पीछे की रूह को पहचानती हूँ..
मुझे रास्तों की परवाह नहीं, मैं उसे अपना घर मानती हूँ..
पर ये सारी बातें कहने से ना जाने मेरा मन क्यों कतराता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
मेरी सारी बातों को बड़े इत्मीनान से सुनता है..
मैं खफा हूँ तो हाँ मुझे मनाता है..
मैं परेशान हूँ तो परेशान हो जाता है..
अगर मैं चुप हूँ तो मेरा सर सहलाता है..
मेरे मन में चल रही हर उलझन को सुलझाता है..
मेरे हर अधूरे ख्वाब को मुकम्मल वो कराता है..
मेरे माथे की सिलवट को अपने होंठो से सहलाता है..
मेरे दिल का हाल जान उसके दिल को करार आता है..
खुद कितनी ही जदीद में हो, मेरा हर ख्वाब बांटता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
हाँ, हाँ मुझसे प्यार बेहद करता है, पर ये बात कहने से भी डरता है..
मेरे हंसने से लेकर मेरा खफा होना, हर चीज उसे पसंद है..
पर उसके जेहन में चल रही एक गंभीर सी रंज है..
अपने जज्बातों को शब्दों में पिरोता है..
सारी असमंजस को कविताओं का रूप देता है..
पर इन कविताओं को भी कहाँ मुकम्मल कर पता है..
दोस्ती के दायरे में अपने एहसासो को दफ़न कर जाता है..
उसकी खिलखिलाती हंसी यही आकर सिमट जाती है..
उसकी आँखों की चमक महज पानी बन बह जाती है..
मेरी तो कब से हाँ है, पर संकोच दो तरफ़ा रहता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
पर, पर तेरी बातों से नहीं हूँ अनजान..
मुझे भी है तेरे इश्क़ की पहचान..
बहुत कर लिया सोच विचार,
आज करने जा रही हूँ सारी बातों का प्रचार..
कि हाँ तू है मेरी धड़कन, मैं हूँ तेरी जान..
तेरे दिल में ही आके रुकेगा मेरे दिल का ये विमान..
क्योंकि तेरे बिना मेरा दिल हर रोज मचल जाता है..
तू ही वो लड़का है जो मुझे मुझसे जयादा चाहता है..
 
 

Meri Mohabbat Ko Majboori Samajh Rakha Hai by Rekha Sharma

Mere Andar Ke Jawalamukhi Ko Mere Andar Ka Taap Samjh Kar Rakha Hai..
Meri Mohabbat ki Sharafat Ko Meri Majboori Samajh Kar Rakha Hai..

मेरे अंदर के ज्वालामुखी को मेरे अंदर का ताप समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
मैं मोहब्बत बहुत करती हूँ तुमसे इस बात से तुम अनजान नहीं..
मेरे दिल की धड़कन का साज हो तुम, इस बात पर तुम्हें गुमान नहीं..
मेरे शिद्दत वाले इश्क़ को एहसासों की रवानी समझ रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
तुम्हारे एक इशारे पर मेरा इधर से उधर दौड़ लगाना मेरा..
तुम्हारी ना सुनु तो मन का थोड़ा मचल जाना मेरा..
तुम्हारे सारे ताने सुनकर भी तुम्हें पलकों पर बैठा रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
तब भी चोट तुम्हें लगे और दर्द हमें हो ऐसी हालत थी हमारी..
तुम ना कहो तो ना छू सके तुम्हें ये हिदायत थी हमारी..
हमारी हिदायत की तामील को तामील हुकुम समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
वो कहता था चेहरे की नुमाइश कर किया इश्क़, इश्क़ नहीं महज झूठा खवाब है..
पर भाती नहीं उसे फूटे आँख भी मैं, मेरे चेहरे पर उसे दिखते दाग है..
वो अपनी ही बातों की सरहाना कर उनसे मुकरा हुआ बैठा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
ना जाने कब उसके इश्क़ में इतना अँधा हो गयी..
उसे मासूम समझ उसका हर सितम सह गयी..
और मेरी मासूम नादान सी अठखेलियों को दिखावटी मुखौटा समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
दिल आवाज उसे सौ लगाए, वो एक नहीं सुनता..
मेरे गीले पड़े तकिये पर वो रहे सौ ख्वाब बुनता..
मैं पूछ लो जो हाल जरा इस बात को मेरी बेकरारी समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
बेनाम था ये रिश्ता, इस रिश्ते का कोई  नाम नहीं..
हूँ उसके दोस्तों में मशहूर, पर मेरी कोई पहचान नहीं..
और स्वाभिमान की इस लड़ाई को मेरा Arrogance समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
क्या शिकायतें, क्या नाराजगी खुद को धोखा देने की बात है..
उस इंसान से हुई मोहब्बत या अपनी आशाओं से ध्यान देने की बात है..
क्या उम्मीदों को अपनी व्यहवार उसका समझ कर रखा है..
तभी तुम्हारी मोहब्बत की शराफत को तुम्हारी मजबूरी समझ कर रखा है..
 
 

Aajkal Har Koi Ladko Ko Bura Batata Hai by Neha Rai


Kyon Unki Ankho Se Nikla Ansu Har Koi Dekh Nahi Pata Hai..
Aaj Kal To Har Koi Ladko Ko Hi Bura Batata Hai..

क्यों उनकी आँखों से निकला आंसू हर कोई देख नहीं पाता है..
आज कल तो हर कोई लड़को को ही बुरा बताता है..
वो करते है प्यार हमसे खुद से भी ज्यादा..
फिर क्यों उनके प्यार का हिसाब हर बार लगाया जाता है..
आज कल तो हर कोई लड़को को ही बुरा बताता है..
अपने लिए कभी भी नहीं करते कोई फरमाइश ये..
हर बार परिवार की खुशियों में ही इन्हे भी खुश पाया जाता है..
फिर भी ना जाने क्यों हर कोई लड़को को ही बुरा बताता है..
माना नजरें ख़राब होती है कुछ लड़को की बेशक..
मगर उनकी गलतियों का इलज़ाम हर किसी पर क्यों लगाया जाता है..
आज कल तो हर कोई लड़को को ही बुरा बताता है..
दिल के टूट जाने पर भी ये नहीं कहते बेवफा उसे..
लेकिन धोकेबाजी का ताज इनके सर पे ही सजाया जाता है..
ना जाने क्यों आज कल हर कोई लड़को को ही बुरा बताता है..
पैसे ना होने पर या कम होने पर भी ये करते है सबकी जरूरतें पूरी..
फिर इनके सपने पुरे करने के वक़्त अपनी उधारियों का बोझ क्यों गिनवाया जाता है..
और ये सब अनदेखा करके भी आज कल तो हर कोई लड़को को ही बुरा बताता है..

Hum Ladke Thode Pagal Hote Hai by Vishal Maru


Thode Akdu Thode Ziddi Svabhav Ke Nariyal Se Hote Hai..
Hum Ladke Jo Hai Naa Sach Me Thode Pagal Hote Hai..

थोड़े अकड़ू, थोड़े जिद्दी स्वभाव के नारियल से होते है..
शुरुआत भले ही नफरत और झगडे से करें,
लेकिन बाद में आपके ही कायल होते है..
हम लड़के जो है ना सच में थोड़े पागल होते है..
बकवास करे दुनिया भर की और महफ़िलो में बने शायर फिरते है..
पर जब सामना हो जाये आपसे तो जेबो में हाथ डालके अलफ़ाज़ टटोलते है..
हम लड़के जो है ना सच में थोड़े पागल होते है..
कदर नहीं जब तक है हीरा हाथ में हमारे..
जब ले जाता है कोई जौहरी उसे तो महफ़िलो में बैठके जामो की माला पिरोते है..
हम लड़के जो है ना सच में थोड़े पागल होते है..
कभी कभी हम समझ नहीं पाते, हम देख नहीं पाते..
मगर जब एक दिन भी आपसे बात नहीं होती तो मत पूछो कितने बेचैन होते है..
हम लड़के जो है ना सच में थोड़े पागल होते है..
कह सकते है आप हमें दगाखोर या बेमुरव्वत..
लेकिन हम भी नहीं जानते कि कब ये दोस्ती प्यार में बदल बैठे है..
हम लड़के जो है ना सच में थोड़े पागल होते है..
जन्नत की बात तो छोड़ो, दो गज भी ना मिलेगी जगह कल रात फरिश्ते आकर कह गए..
गुनाह बस मेरा इतना कि एक इंसान को खुदा हम तस्लीम कर बैठे है
हम लड़के जो है ना सच में थोड़े पागल होते है..

Mil Jayega Koi Mard Apko Apna Dard Chupaya Hua by RJ Raunac


Tufano Me Bhi Pair Jamaya Hua, Mehnat Ke Paseene Se Nahaya Hua.
Mil Jayega Koi Mard Apko Apna Dard Chupaya Hua..

क्या तुमने किसी मर्द को देखा है?
उसके पीछे छिपे उसके दर्द को देखा है..
नहीं देखा है तो आज मेरी नजर से देखो,
अच्छी, बुरी, हर तरह से देखो..
क्योंकि वो देखना जरुरी है जो अनदेखा है..
जिसने feelings की बाढ़ को अपने जिगर से रोका है..
ये आसान बात नहीं होती,
दुनिया मर्द के लिए कभी नहीं रोती..
किसी को फर्क नहीं पड़ता, कितनी कठिन उसकी डगर है..
आपको तो पता भी नहीं कि आज के अख़बार की वो एक खबर है..
जेब की Savings चाय सुट्टे में उडाता हुआ..
पुरे घर के लिए अकेले कमाता हुआ..
खुद Sad रहकर बच्चों का New Year Happy मनाता हुआ..
मिल जायेगा कोई ना कोई मर्द आपको, अपना दर्द छुपाता हुआ..
अरे बॉर्डर पर तुम्हारे लिए लड़ता हुआ..
समाज में चार लोगों से डरता हुआ..
एक फौजी के सीने का नाप भी है..
हाँ, वो एक बेटी का बाप भी है..
तूफानों में भी अपना पैर जमाया हुआ..
मेहनत के पसीने से नहाया हुआ..
मिल जायेगा आपको कोई ना कोई मर्द, अपना दर्द छुपाया हुआ..
वो एक भाई भी है,
राखी से बंधी उसकी कलाई भी है..
वो Introvert भी है..
बैटमैन वाली उसके पास एक टी शर्ट भी है..
एक लड़की पे वो मरता भी है..
लेकिन हाँ, उसको कहने से वो डरता भी है..
दिल उसका भी टुटा है, लेकिन वो नाराज नहीं है..
वो ऐसी चीख है जिसमे आवाज नहीं है..
क्योंकि किसी का दुपट्टा उसके लिए कोई Toy नहीं है..
आशिक़ तो है लेकिन Playboy नहीं है..
हजार परेशानियों में भी मुस्कुराता हुआ..
लाख तकलीफ में भी कुछ ना बताता हुआ..
मिल जायेगा आपको कोई ना कोई मर्द, अपना दर्द छुपाया हुआ..
हाथ उठाये तो बे दर्द भी है..
मार खा जाये तो ना मर्द भी है
माना कि वो Perfect नहीं है..
क्या इसीलिए उसकी कोई Respect नहीं है..
रोज अंदर थोड़ा थोड़ा मरता हुआ..
अँधेरे से ज्यादा सवेरे से डरता हुआ..
हर Conditions में खुद को Adjust करता हुआ..
मुर्गा होकर कसाई पर Trust करता हुआ..
खुद भूखा रहकर पुरे परिवार को खिलाता है..
और दिन में चार बार,
“All men are Dog” वाली गाली भी वही खाता है..
वो एक पति भी है..
मजाक में कहो तो एक दुर्गति भी है..
Shopping Bags के बोझ को उठाया हुआ..
क्रेडिट कार्ड से अपनी नजरें चुराया हुआ..
सबकी फ़िज़ूलख़र्ची का उसके पास हिसाब है..
चेहरा उसका एक खुली किताब है..
ओवरटाइम में वो सोता नहीं है..
बोनस ना मिले फिर भी वो रोता नहीं है..
माँ और बीवी दोनों ही उसको प्यारी है..
पुरे घर की उसके ऊपर ही जिम्मेदारी है..
ज़िन्दगी ने उसकी बराबर मारी है..
कहीं डॉक्टर, कहीं इंजीनियर तो कहीं Peon भी है..
थोड़ा बहुत उसके सर पर लोन भी है..
इतना सब देकर भी वो स्वार्थी है..
लोग कहते है ये उसकी Patriarchy है..
वो ज्यादा Rude नहीं है..
शायद इसीलिए कइयों के लिए वो Dude नहीं है.
ये भी तो एक तरह का गम ही है..
गलती चाहे किसी की भी हो, दोषी तो हम ही है..
तुम तो लड़के हो, तुम्हें क्या डर है
ये उससे पूछो, जो ग्रेजुएशन के बाद भी घर पर बैठा है..
क्योंकि बेरोजगार से कोई नहीं पूछता कि,
भाई तू कैसा है
दिक्कत ये है कि लोग उसको समझते नहीं है..
जानते सब है फिर भी कहते कुछ नहीं है..
क्योंकि, बॉस इस सोसाइटी का एक ही Rule है..
जो Emotional है ना वही फूल है..
तो भाई जिंदगी में कभी रोने का नहीं..
आंसुओ के दाग अपनी शर्ट से धोने का नहीं..
कल हो ना हो ये तो एक फ़िल्मी बात है..
मगर बाहर की भीड़ में कभी अपने आप को खोने का नहीं..
क्योंकि जीने का सबसे अच्छा एक यही Way है..
मुबारक हो, आज “International Men’s Day” है..


Koi Itna Bada Bhi Hota Hai by Piyush Singh


Ae Fauji Kahan Rakhun Tujhko Mera Dil Tere Kad Se Chota Hai..
Tere Ijjat Ki Kya Baat Karun, Koi Itna Bada Bhi Hota Hai..

फौजी, कहाँ रखूं तुझको, मेरा दिल तेरे कद से छोटा है..
तेरे इज्जत की क्या बात करूँ, कोई इतना बड़ा भी होता है..
यहाँ रिश्तों के सन्नाटे में कोई किसी को वक़्त कहाँ दे पाता है..
इस देश में बेगानो पे भी तू जान लुटाकर आता है..
यहां वक़्त बुरा जाये तो, कोई कहाँ खड़ा भी होता है..
तेरे इज्जत की क्या बात करूँ, कोई इतना बड़ा भी होता है..
तेरे घर की दिवाली में फौजी अरमान जलाये जाते है..
तेरी अम्मी की हर दुआ में भी रमज़ान निभाए जाते है..
अपनों के बिना हर त्योहारों का रंग भी फीका होता है..
तेरे इज्जत की क्या बात करूँ, कोई इतना बड़ा भी होता है..
मेरी पंखुड़ियों के रंगो से, वर्दी का रंग निराला है..
मेरा काबा तू, मेरा चर्च तू, और तू ही मेरा शिवाला है..
इस वर्दी के अंदर शायद छुपा एक फरिश्ता होता है..
तेरे इज्जत की क्या बात करूँ, कोई इतना बड़ा भी होता है..
तेरे पाँव से लिपटे बच्चे को, तू छुड़ा गया था सीमा पर..
तेरी बीवी के हर आंसू पर तू लुटा गया था भारत माँ पर..
कोई अपने परिवार से क्या इस कदर बेवफा होता है..
तेरे इज्जत की क्या बात करूँ, कोई इतना बड़ा भी होता है..
जब तिरंगे में लिपटकर तेरी लाश घर को आई तो..
गर्व था तेरे बाप को पर आँख भी भर आई तो..
मर जाये मिट्टी के लिए, कोई इस कदर भी जिया होता है..
तेरे इज्जत की क्या बात करूँ, कोई इतना बड़ा भी होता है..
आसमानो की बुलंदी आगे तेरे छोटी पड़ी..
कर्जा तेरा इस देश पर इज्जत तेरी सबसे बड़ी..
पियूष भी क्या लिख पायेगा किरदार बड़ा जब होता है..
तेरे इज्जत की क्या बात करूँ, कोई इतना बड़ा भी होता है..

Ek Roz Kitaab Se Phool Mila by Jai Ojha


Ek Roz Kitaab Se Phool Mila, Bilkul Mujh Jaisi Hi Halat Me..
Tanha Sa Par Hansta Hua, Fana Ho Gya Mohabbat Me..

अमूमन ऐसा होता है कि जब हम कोई पुरानी किताब उठाते है और उसे खोलते है तो अक्सर हमें उसमे एक दबी हुई मोहब्बत मिलती है, वो दबी हुई मोहब्बत जिसे गुले सुर्ख कहा गया है, गुलाब का फूल जोकि प्रेम की निशानी है मोहब्बत का प्रतीक है, उसकी अपनी एक दास्तां है, अपनी एक कहानी है, उस कहानी को आज मैं बयां करने जा रहा हूँ. आप सबके सामने इस कहानी को पेश कर रहा हूँ, आप सब की तवज्जो चाहूंगा..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
तन्हा सा पर हँसता हुआ, फ़ना हो गया मोहब्बत में..
लोग कहते है मुरझाया है, जख़्म बड़े ही गहरे है..
लेकिन ध्यान से देखो तो सूफ़ी हुआ है, इश्क़ की खुशबू बिखेरे है..
अरे जख्मों से जिसके खुशबू आये, सोचो वो मरा होगा कैसी राहत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
ना जाने कितनी पीड़ाएँ सही, दर्द का भी कोई पार नहीं..
ये इश्क़ शायद एकतरफा था, था जिसमें कोई व्यापार नहीं..
अरे क्या कमाल बंदगी है उसकी, माशूक है जिसकी इबादत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
दर्द जब हद से गुजरा एक रोज़, तो दर्द में ही दवा मिली..
घुटन हुई दो पन्नो के बीच, तो शायरी की हवा मिली..
कांटे हो बदन पर भले ही, लेकिन उम्र गुजरी है शहादत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
जिन हाथों ने कुचला इसको, वो हाथ भी खुशबू से महक उठे..
क्या है कोई इस दुनिया में कहीं, जो यूँ मुरझाकर भी चमक उठे..
सदियों से ये पाक मोहब्बत, दफ़न होती है इसी रिवायत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
लेकिन इस फूल को कोई मलाल नहीं है, जीवन इश्क़ पर लुटाया है..
क्या हस्ती है उस आशिक की, जिसने काँटों को इश्क़ सिखाया है..
अरे गम भला क्या होगा उसको, कुर्बां हुआ है जो चाहत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
तन्हा सा पर हँसता हुआ, फ़ना हो गया मोहब्बत में..

Gentleman Kise Kehte Hai by Ayushmann Khurrana


Gentleman Kise Kehte Hai?

You Know, मर्द का एक Stereotype है,
बड़ी Macho वाली Hype है,
वो घर चलाएगा, वो लड़की को बचाएगा
वो रोयेगा नहीं, Weak नहीं होगा
मुझे लगा ये तो साला कुछ ठीक नहीं होगा
मुझे ना Hero, ना Savior,
ना सुपरमैन बनना था
जो रो सके, जो गा सके,
किसी को बचा पाए तो बचा सके,
ऐसा Man बनना था
मैं हिंदी में सेंटी होता हूँ,
पंजाबी में गाता हूँ
ऐसा Man हूँ..
टाई बांधना मुझे नहीं आता,
पर खाना ठीक ठाक बनाता हूँ
ऐसा Man हूँ
तुम्हारी इंग्लिश Slow है या Fast है,
मुझे फ़र्क नहीं पड़ता
तुम Gay हो, Straight हो, तुम्हारी क्या Caste है,
मुझे फ़र्क नहीं पड़ता
I know that the ads have told you to play it too Cool,
And Father asked you to be disciplined
As if you are always in School.
उन्होंने बोला, Gentleman बनो…
But ये भी बोला कि,
Man का Gentle होना खराब है
क्योंकि तुम्हें तो Honour बचाना है,
जादू वाला परफ्यूम लगाना है,
उसी से लड़कियां तुम पर मरेंगी
पर मरेंगी क्यों?
उन्हें मरना नहीं चाहिए
मैं जहाँ हूँ, जहाँ खड़ा हूँ,
उन्हें डरना नहीं चाहिए
Pink और Pink Floyd के बीच में,
वो कुछ भी पसंद कर सकता है
अँधेरा ज्यादा हो तो वो भी डर सकता है
क्योंकि Violence उसके साथ भी हुआ है
Patriarchy ने उसको भी गलत तरीके से छुआ है
वो जल्दी बड़ा होने के बोझ के नीचे बड़ा होता है,
दिल उसका भी 300 ग्राम का हीहोता है..
पर उस पर लोहे का सोशल कवर चढ़ा होता है..
उसे बस, कार और गन के खिलौनों में मत बांधो,
जब वो बच्चा हो
जरुरी नहीं कि ड्राइवर अच्छा हो,
हो सकता है कि मशीनों के काम में थोड़ा कच्चा हो..
पर मर्द होने की इकलौती शर्त यही है कि सच्चा हो
अब जरुरी नहीं कि मेरा Passion गिटार हो, कूल हो,
मेरे हाथ में लड़की के लिए फूल हो,
हो सकता है कि मेरे पास लम्बी गाड़ी हो,
हो सकता है कि लाइफ की हर एक Ride Pool हो
तुम्हें पता है, बच्चों को मैं भी संभालता हूँ,
वो थक के आती है तो अदरक वाली चाय भी उबालता हूँ,
लड़का और लड़की में फ़र्क बहुत है,
और ये फ़र्क खूबसूरत है,
ये मैं जनता हूँ..
पर फ़र्क करने को सबसे बड़ा गुनाह मानता हूँ..
शायद इसीलिए, इसीलिए अपने बेटे से कहता हूँ,
कि जरुरी नहीं उनके लिए कुर्सी खींचना,
या गाड़ी का दरवाजा खोलना,
पर जब कुछ गलत हो, तो सबसे पहले बोलना..
क्योंकि Six Pack से नहीं बनते है मर्द,
ना ज्यादा कमाने से बनते है..
ना चिल्लाने से, ना आंसू छुपाने से बनते है,
किसी और को ठंड लगती है तो दिल उसका भी सर्द होता है,
कि जिसको दर्द होता है, असल में वही मर्द होता है..
तू चाहे Carpet पे सोये,
चाहे Red Carpet पे चले,
Let me tell you, you are the most powerful,
As long as their lives
A Gentleman in You
English Version

What makes a true Gentleman?
Is it his suit and his tie?
Or the fact that he isn’t afraid to cry?
Is it the way he shoulders tradition?
Or the fact that he is a good son?
The way he treats women
Or the way he is a master in the kitchen?
Is it the way he stands up for what is right?
The way he is always fair in a fight?
Or is it in his heart,
Which pains when another is hurt?

Baap Ka Maal Samjha Hai Kya?