Ali Mera Dost Mera Bhai by Darshan Rajpurohit


Ali Mera Dost Mera Bhai by Darshan Rajpurohit


अली मेरा दोस्त, मेरा भाई,
लेकिन ना जाने क्यों हमें साथ देख दुनिया की आंखे खटकती थी..
हमारी यारी देख उनकी नफ़रतें हम पर अटकती थी..
मैंने अली के घर की सेवईंयां खाई है..
दिवाली की मिठाइयां मैंने उसको भी खिलाई है..
हर अवसर पर उसके घर से मेरे घर बधाइयाँ आयी है..
मैंने अपनी तकलीफे उसको सुनाई है..
मैंने उसको अपनी पूजा सुनाई है..
उसने भी मुझे अपनी नमाज़ सिखाई है..
दिवाली पर उसने फुलझड़ियां जलाई है..
रमजान के महीने में मैंने अपने घर की खिड़कियों पर लाइटें लगाई है..
क्यों तुम्हारा प्रमाण मेरे लिए जरुरी है..
क्यों मैं मेरे हिसाब से जी नहीं सकता..
क्यों वो मेरे घर का खा नहीं सकता..
क्यों मैं उसका झूठा पी नहीं सकता..
मैं हाजी अली गया हूँ, वो बाबुलनाथ भी आया है..
और इफ्तार का खाना हमने साथ में खाया है..
हिन्दू मुस्लिम एक नहीं हो सकते,
कौन कह गया ये अरे ये कौनसा परिंदा था..
तुझे क्या पता राम रहीम दोस्त रहे होंगे,
तू क्या तब जिन्दा था..
मैंने उसके घर की शादियों में मजा खान पान का लिया है..
और मेरे घर की शादियों में उसने कन्यादान भी किया है..
क्यों ये भाईचारा देख के तंग होते हो,
तिलक और टोपी का मिलान देखकर दंग होते हो..
गीता और कुरान में कहाँ कुछ गलत बताया है..
दोनों ने हमको सिर्फ और सिर्फ अमन सिखाया है..
यदि इसपर भी आपत्ति है तेरी,
तो खुली चुनौती है मेरी..
कि बता किस आयात या श्लोक में ये बात बतायी..
कि मुस्लमान मेरा दोस्त नी हो सकता और हिन्दू उसका भाई..

Aazadi Ka Jashan by RJ Vashishth


Humne Aazadi Ka Jashan Mana Liya..

हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..
माँ एक ही दिन की तो छुट्टी मिलती है, सोने दे ना माँ
ऐसा कहते हुए भारत माँ को सोते सोते सलाम कर दिया..
हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..
जो शहीद हुए है उनकी, जरा याद करो कुर्बानी
ये गाते गाते, “Bro, Cheap Thrills, क्या सही गाना है यार, मजा गया
 हमने यह भी कह दिया..
और आज़ादी का जश्न मना लिया..
हैल्लो, हम उनके जैसे नहीं है, ठीक है..
हमने तो सुबह उठके फ्लैग होस्टिंग किया,
और उसके बाद टीवी पे परेड भी देखी..
बस इतना कहके रास्ते पे थोड़ा कचरा भी फेंक दिया..
आज़ादी है भाई, हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..
अरे यार,  Is it 69th or 70th..
भाई क्या फर्क पड़ता है, Just Type Happy Independence Day..
ऐसे Confusion में हमने आज़ादी को Fusion बना दिया..
हाँ हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..


Maa Teri Yaad Bahut Satati by RJ Vashishth


Maa Teri Yaad Bahut Satati, Maa Teri Yaad Bahut Satati..

माँ तेरी याद बहुत सताती..
रात को देरी से सो जाऊँ तो अब डाँट नहीं सुनाती..
सुबह को जल्दी उठाने के लिए अब कोई आवाज नहीं आती..
बाहर का खाना अच्छा नहीं है, मत खा
ऐसा कई बार सुना था..
आज तुझसे दूर है तो शौंक से या फिर,
मजबूरी में बाहर का खाना खाते है..
पर जीभ से तेरे हाथो से बनी रोटी की मिठास नहीं जाती..
कंगन की खनक नहीं सुनाई पड़ती..
बेटा जल्दी घर जाना, रात को ठंड लगेगी, स्वेटर लेके जा
आज जब भी ऑफिस से घर वापिस जाते ठंड लगती है,
तब माँ तेरी वो बात जरूर याद आती है..
माँ तेरी हर बात जरूर याद आती है..
बेपरवाही से बीमार पड़ता तो रो रो के दवाई लेकर आती..
बुखार को भगाने तू रात भर गीले कपडे लगाती..
मुझे पहले खिलाती, खुद ना खाती..
ना जाने क्यों आज बुखार लाने की बचकानी चाह दिल से आती..
माँ तेरी याद बहुत सताती, माँ तेरी याद बहुत सताती..


Purana Khat by Rj Vashishth


Ek Purana Sa Khat Mila Hai Aaj.
Thoda Phat Sa Gya Hai, Thoda Peela Pad Gya Hai..

एक पुराना सा खत मिला है आज..
थोड़ा पीला पड़ गया है..
उसके लफ्ज़ भी जैसे पीलिये से हो गए है..
एक पुराना सा खत मिला है आज..
आंखे छोटी करके पढ़ना पड़ता है उसको,
एक पुराना सा खत मिला है आज, थोड़ा फट सा गया है..
जैसे दिल के खवाहिश के परे जाके उसे किसी ने फाड़ दिया हो..
जरा देखे तो सही इसमें कौन कौन से लम्हे टांके है..
लिखा हैबात है एक रात की,
जब पहली बार उस शख्श को मिलने का मौका मिला था..
बाहर जैसे पूरा शहर नए साल को मनाने के लिए पागल हुए जा रहा था,
और ये बेचारा पहली बार मिलने के जश्न में बावला हुए जा रहा था..
एक पुराना सा खत मिला है आज, थोड़ा फट सा गया है..
लिखा है, जब पहली बार तुम्हे देखा था तो लगा था,
कि नए साल की तरह जिंदगी का भी एक नया सिरा शुरू हो रहा है..
बस इसे यही थमा दूँ..
थाम लूँ वो नफ़्ज़ जिसे सिर्फ तुम्हारी धड़कन महसूस कर पाए..
एक पुराना सा खत मिला है..
जब शराब के नशे में पूरा शहर अनाप शनाप बके जा रहा था,
तब मैं तुम्हारी आँखों के नशे से कायल हुए यहां वहां बिखरा पड़ा था..
बिलकुल उस पत्ते की तरह, हाँ बिलकुल उस पत्ते की तरह,
जो तुम्हारी खिड़की के पास आके उसी पेड़ से गिरता था..
बिलकुल उस पत्ते की तरह यहां वहां बिखरा पड़ा था..
एक पुराना सा खत मिला है..
जब पहली दफा उन होंठो को छुआ था तो ऐसा लगा था,
कि आज ये लम्हा यही पर कैद कर लूँ..
तुझे मुझमे कैद कर लूँ और खुद रिहा हो जाऊँ जिंदगी से..
तुझे मुझमे कैद कर लूँ और खुद ही रिहा हो जाऊँ जिंदगी से..
एक पुराना सा खत मिला है, थोड़ा फट सा गया है..


Baap Ka Maal Samjha Hai Kya?