Har Ladka Bura Nahi Hota by Goonj Chand

Kuch Mardon Ki Wajah Se Sabko Galat Thehrana Bhi Shi Nahi Hota,
Or Kisi Ke Keh Dene Bhar Se Har Ladka Bura Nahi Hota..

कुछ मर्दों की वजह से सबको गलत ठहरना भी सही नहीं होता,
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..
कोई उड़ाए अगर मजाक किसी का तो वो अक्सर टोक देता है..
तुम्हारे घर में भी तो माँ बहने है, ये कहकर रोक देता है..
छोड़ देता है वो रास्ता अक्सर लड़की के लिए,
जी हाँ हर कोई रास्ता रोकने वाला नहीं होता..
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..
जिंदगी को कैसे जीना है ये भी उसे बखूभी आता है..
और दोस्तों के साथ पार्टी करने तो वो भी जाता है..
पर आदत है उसे माँ बाप के साथ खाना खाने की,
इसलिए वो कभी घर आने में लेट नहीं होता..
और जी हाँ किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..
अपनी जिम्मेदारियों से वो कभी भागता नहीं है..
और मुसीबत के समय हिम्मत हारता नहीं है..
दफ़न कर देता है वो अपने अरमानो को सबकी ख़ुशी के लिए,
हर लड़का बाप की दौलत पर ऐश करने वाला नहीं होता..
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..
इश्क़ की दुनिया में भी वो बड़ा ईमानदार होता है..
और अपने इश्क़ की हिफाज़त के लिए वो सबसे जानदार होता है..
और अक्सर ढक देता है वो दुपट्टे से अपनी मोहब्बत को,
क्यूंकि हर लड़का इश्क़ में दुपट्टा हटाने वाला नहीं होता..
और कुछ लोगो के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..

कुछ मर्दों की वजह से सबको गलत ठहरना भी सही नहीं होता,
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..


Chal Aaj Main Tujhe Thukrati Hoon by Pooja Sonawale


Main Kya Hoon Aaj Main Tujhe Batati Hoon,
Tu Kya Mujhe Thukrayega, Chal Aaj Main Tujhe Thukrati Hoon..

मैं क्या हूँ ये आज मैं तुझे बताती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
बहुत जी लिए ईमानदारी वाली ज़िन्दगी,
चल आज मैं तेरी तरह पत्थर दिल होकर देखती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
तेरे हरेक झूठ का नकाब आज मैं उतारती हूँ,
और सुन आज भरी महफ़िल में मैं तुझे बेवफा कहकर पुकारती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
बहुत सस्ती लगती है ना मेरी मोहब्बत तुझे,
तो चल आज मैं कुछ अमीरो वाला काम करती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
तेरे चेहरे की रौनक का एक हसीं कारण थी ना मैं कभी,
तो चल आज तेरे दिल की तबाही की वजह भी मैं बन जाती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
बहुत सवाल उठाये तूने मेरी मोहब्बत पे, पर मैंने कभी तुझे कुछ कहा नहीं..
शक के कटघरे में खड़ा किया तूने मेरी मोहब्बत को,
फिर भी मैंने तुझपे कोई सवाल उठाया नहीं..
पर सुन तेरी असली जगह कहाँ है ये मैं तुझे बताती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
जो मोहब्बत मुझसे सीखी तूने, वो किसी और पे कुर्बान करने चला था तू..
ठोकर खाकर उससे फिर मेरे पास आने चला था तू..
पर आज धोखे का असली मतलब मैं तुझे समझाती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
बड़े अरसो बाद मुलाकात होगी तुझसे ये वादा आज मैं तुझसे करती हूँ..
और इसी बहाने मेरी शादी का इनविटेशन कार्ड भी मैं तुझे खुद देने आती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..
बहुत शौक है ना तुझे लोगो के दिलो से खेलने का,
चल आज मैं तेरे दिल के साथ खेलती हूँ..
तू क्या मुझे ठुकराएगा, चल आज मैं तुझे ठुकराती हूँ..


Ae Naukri Sare Yuva Tujhpe Hi Marte Hai


Badi Haseen Hogi Tu Ae Naukri,
Saare Yuva Aaj Tujhpe Hi Marte Hai..

बड़ी हसीन होगी तू नौकरी,
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..
सुख चैन खोकर, चटाई पे सोकर,
सारी रात जागकर पन्ने पलटते है..
दिन में तहरी और रात को मैगी,
आधे पेट ही खाके तेरा नाम जपते है..
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..
अंजान शहर में छोटा सा सस्ता रूम लेके,
किचन बैडरूम सब उसी में सहेज के,
चाहत में तेरी अपने माँ बाप, भाई बहन,
और दोस्तों से दूर रहते है..
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..
राशन की गठरी सिर पर उठाये,
अपनी मायूसी और मजबूरियां खुद ही छुपाये,
खचाखच भरी ट्रैन में बिना टिकट के,
रिस्क लेकर सफर करते है..
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..
इंटरनेट अखबारों में तुझको तलाशते,
तेरे लिए पत्र पत्रिकाएं पढ़ते पढ़ते,
बत्तीस साल तक के जवान कंवारे फिरते है..
बड़ी हसीन होगी तू नौकरी,
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..

Uthi Jo Ek Nazar Uspar To Katleaam Kar Dungi by Goonj Chand


Uthi Jo Ek Nazar Uspar To Katleaam Kar Dungi..

उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी,
और उसको नीचा दिखाने की कोशिश की तो तुझको बदनाम कर दूंगी..
और अब दिख भी गया उसके रास्ते में तो सोच लेना,
तेरी गली में आके बवाल कर दूंगी..
मैं खामखा तुझसे सवाल कर दूंगी..
तेरी नींद तेरा चैन, सब हराम कर दूंगी..
और मेरे प्यार पर उंगली उठाने की हिम्मत मत करना,
वरना खामखा तुझको नीलाम कर दूंगी..
मांगेगा माफ़ी तो माफ़ कर दूंगी..
वरना तेरे दोस्तों को भी तेरे खिलाफ कर दूंगी..
और जिन लोगो की वजह से तू इतना उछलता है ,
वक़्त आने पर उनका भी हिसाब कर दूंगी..
दीवानी हूँ उसकी ये ऐलान कर दूंगी..
दिल ही क्या ये जान भी उसके नाम कर दूंगी..
और तुझ जैसे 36 भी जाये ना उसके रास्ते पर,
तो माँ कसम 36 के 36 का हिसाब कर दूंगी..
मैं अपने अल्फाज़ो से ही उसका इलाज कर दूंगी..
और उसकी तन्हाई को भी हसीं शाम कर दूंगी..
और कौन कहता है कि सिर्फ बन्दे ही प्रोटेक्ट करते है अपनी बंदियों को,
अरे मैं तो लड़की होके भी लड़को वाला काम कर दूंगी..
कि उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी..

Randi Thi Saali – Wo Raat by Arti Dutt


Sometimes I die from a Pain
That flows throw my vein
But I am not supposed to Shout
Because I am not a woman to be proud
On my grave & Never, Never got even Sympathy
Because they call me – “Randi Thi Saali”

रात भर सीने से लगाके इश्क़ तो जाता लेते हो..
पर जनाब जब इज्जत देने की बारी आई,
तो क्योंरंडी हैकहकर निकल जाते हो..
वो कहता था इस दुनिया की सबसे खूबसूरत हसीना हो तुम,
एक रात के लिए ही सही पर मेरी अपनी दुनिया हो तुम..
केश सँवारे, पहनी साडी, बिलकुल वैसे,
जैसे हो तुम्हारे ही घर की नारी..
फिर क्यों, फिर क्यों मेरी रात कुछ इस कदर कटती,
कि मेरे माथे की बिंदी तेरी छाती पे जा चिपकती..
मोहब्बत का इज़हार तो हर रात सिगेरट से करता..
और पैसो के नाम पर सिर्फ चार आने फेंकता..
वो रात गवाह है, उस चादर पर लगे दाग की,
तेरे जिस्म से, मेरे जिस्म की खुशबु की..
बिस्तर पर पड़े उस पैकेट की और बंद कमरों में चीख़ती आवाजों की,
कि तू ही हर रोज हर दफा मेरी गली आता है..
और मेरे रंडी होने का आरोप भरे समाज में लगाता है..
हाँ कमाती हूँ मैं पैसे, अपने कपड़े उतर अपने जिस्म बेचके,
क्योंकि भीख मांगना मुझे मंजूर नहीं..
वो क्या है ना जनाब जिस्म की तड़प से कही जयादा पेट की भूख होती है..
जिस्म जरूर मरा है लेकिन रूह आज भी जिन्दा है..
अब और क्या नंगा करूँ इस समाज को,
जो मेरे ही नंगपन पर ललचाता है..
हसी आती है इस बात पर कि ये कैसी दोहरी जिंदगी जीता है..
Don’t feel pity for me, I am happy what I am Doing.
बस इतनी सी खवाहिश है कि
अगर आओ अगली दफा मेरी गली तो जरा तहज़ीब से आना,
वरना अपना ये कोट और पेन्ट अपने घर ही उतारना..


Main Raavan Hi Thik Hun by Shekhar


Han Main Ghamandi, Main Paapi, Main Takat Ka Prateek Hun..
Aur Main Wahi Raavan, Dashanan Jiddi Hun, Aur Thoda Sa Dheeth Hun..
Ki Sunlo Tum Sari Duniya Walo,
Tum Ram Ban Jao, Main Raavan Hi Thik Hun..

नई नई कमाई दौलत के किस्से चीखे नहीं जाते..
और हम कलाकार है बुलाये जाते है, ख़रीदे नहीं जाते..
बाल नौचेगा, खुद को कोसेगा और एक वक़्त बात मर भी जायेगा..
तू खुद बिक जायेगा पर मुझे खरीद नहीं पायेगा..
इन नशो से नशीली मेरी मोहब्बत है,
मेरी मोहब्बत के नशे में होकर देखो..
और अगर जानना है मेरा दिल हाल,
तो कोई अपना होकर देखो..
कद आसमान का, पेड़ ताड़ का नापता नहीं है..
जो मेरे पास है मैंने खुद कमाया है किसी के बाप का नहीं है..
महफ़िल बदनाम मुझे खुद बदनामो ने किया है..
अरे इन्हे क्या पता मुझे बड़ा तुफानो ने किया है..
ये इतने छोटे है मुझसे कि इन्हे देखने के लिए मुझे झुकना पड़ता है..
ये इतना पीछे रह गए कि इन्हे देखने के लिए भी रुकना पड़ता है..
बुरा हमें सिर्फ और सिर्फ हमारे हालात करते है..
जाने अनजाने में सही वो आज भी हमारी बात करते है..
और एक वक़्त पहले इस नाम से घिन्न थी उन्हें,
आज वो पागल बैठ के रावण नाम का जाप करते है..
कुछ के लिए बुरा, कुछ के लिए ताकत और कुछ के लिए क्षमता हूँ..
हाँ मैं वही रावण हूँ जो आज भी अपनी बहन की सुनता हूँ..
कि अपने झूठे स्वाभिमान का सम्मान लोग सतयुग से करते रहे है..
जो खुद अपने हाथो से इज्जत उतारते है, वो आज खड़े होकर मेरे पुतले जला रहे है..
उन्हें बता दूँ कि पुतले जलाने से क्या होगा, हर तरफ राख और धुंआ होगा..
झांककर देख गिरेबान में अपने जरा, ये रावण तुझसे अच्छा कई गुना होगा..
ना मैं मरा था ना मैं हारा था, मुझे बस मेरे विश्वास और भरोसे ने मारा था..
कि हाँ किया गलत एक औरत की इज्जत के लिए दूसरी को उठा लाया था..
तो बता दूँ कि राम ने सीता को कुरान सा साफ़ और गीता सा पाक ही वापस पाया था..
तो क्यों फिर सतयुग से कलयुग तक सीता को अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है..
कभी अपनों में कभी परायों में उसे खुद को साबित करना पड़ता है..
हाँ मैं वही रावण हूँ जिसे आयोध्या के राजा राम ने हराया था..
और जिसके लिए हराया था वो उसे अपने पास ना रख पाया था..
हाँ मैं घमंडी, मैं पापी, मैं ताकत का प्रतीक हूँ..
और मैं वही रावण दशानन जिद्दी हूँ, और थोड़ा सा ढीठ हूँ..
कि सुनलो तुम सारी दुनिया वालो,
तुम राम बन जाओ, मैं रावण ही ठीक हूँ..


Circus by Jai Ojha – Mujhe Nahi Samajh Aata Kyun


Mujhe Nahin Samjh Aata Kyun?

मुझे नहीं समझ आता क्यों, मुझे नहीं समझ आता क्यों,
क्यों वो शख्श जिसमे मुझे अपना सबकुछ नजर आया,
वो दुबारा नजर तक नहीं आया..
कि वो राही जिसे मिल गया है हमसफ़र कोई और,
लौटकर घर नहीं आया..
क्यों मान लिए किसी ने अपना और फेंक दिया अगले ही पल,
जैसे कभी कोई राब्ता ना था..
कि वो जो सिर्फ और सिर्फ मेरा लगने लगा था,
मेरा ना था..
कि वो जिसने तुम्हे दिखा दिए तमाम हसीं ख्वाब,
सबको कुचलकर आगे बढ़ जाता है..
और क्यों तुम्हारा जेहन यकीन करता है इतना,
कि बस उम्मीद लिए रह जाता है..
क्यों किसी गैर के दिए जख्म का कभी फ़र्क़ नहीं पड़ता,
और क्यों किसी अपने के ठुकराने पर दिल फिर सम्भल नहीं पाता..
मुझे नहीं समझ आता क्यों, मुझे नहीं समझ आता क्यों,
एक परिंदा आसमान में उड़ते हुए रह जाता है इतने पीछे,
कि दोबारा उसे अपना काफिला नहीं दिखता..
और आखिर क्यों दर बदर भटकने पर भी उसे,
तिनका तिनका जोड़कर बनाया अपना घोंसला नहीं मिलता..
मुझे समझ नहीं आता क्यों,
उस महंगी कार को जो तेजी से गुजर जाती है,
सड़क के किनारे सोया बच्चा नहीं दिखता..
और आखिर क्यों फ़क़त एक लाइन खींच देने पर,
एक शख्स को दूसरे शख्श में इंसां नहीं दिखता..
मुझे नहीं समझ आता क्यों एक सजी परोसी थाली को,
उसके खाने वाला नहीं मिलता..
और आखिर क्यों एक मासूम को कचरे के ढेर में ढूंढ़ने पर भी,
अपना निवाला नहीं मिलता..
मुझे नहीं समझ आता क्यों, मुझे नहीं समझ आता क्यों,
एक तरफ विश्व की सबसे ऊँची ईमारत खड़ी होती है,
और दूसरी तरफ एक शख्श अपना घर तूफ़ान में उड़ जाने के डर से सो नहीं पाता..
और आखिर क्यों उसे बचपन से लेकर आज तक,
बार बार कहकर पुकारा गया है मर्द..
कि वो सिसकियाँ भरता है लेकिन कभी खुलकर रो नहीं पाता..
मुझे नहीं समझ आता क्यों एक बच्चे का बस्ता इतना भारी कर दिया जाता है,
कि वो नहीं पाता ताउम्र जो वो बन सकता था..
और आखिर क्यों उसे खुला मैदान छोड़कर थमाया जाता है एक टारगेट,
जो ताजिंदगी कभी पूरा नहीं हो पाता..
मुझे नहीं समझ आता क्यों, मुझे नहीं समझ आता क्यों,
मजबूरियों ने किसी के बचपन को इतनी बेरहमी से जकड़ा होता है,
आखिर क्यों दुकान पर उन नन्ही सी मासूम उँगलियों ने,
चाय के गलास को पकड़ा होता है..
मुझे नहीं समझ आता क्यों यहाँ जीने के लिए हर रोज मरना पड़ता है..
क्यों एक मुर्दा इमारत के बनने के लिए जिन्दा पेड़ को काटना पड़ता है..
ये कैसा सर्कस है जिंदगी का साहब,
कि यहाँ रोटी के लिए एक बच्ची को सर्कस में होना पड़ताहै..
मुझे नहीं समझ आता क्यों…….

Ek Ladke Ke Dil Me Kitna Dard Rehta Hai by Aarav Singh


Apni Paidaish Se Hi Jo Apne Pariwaar Ki Ashao Ka Bojh Dhota Hai..
Tum Kya Jano Ek Ladke Ke Dil Me Kitna Dard Rehta Hai..

अपनी पैदाइश से ही जो अपने परिवार की आशाओं का बोझ ढोता है..
तुम क्या जानो एक लड़के के दिल में कितना दर्द रहता है..
बचपन से ही सिखाया जाता है कि तुम एक लड़के हो,
और एक लड़का कभी नहीं रोता है..
लग भी जाये कोई चोट तो भी वो किसी से नहीं कहता है..
और जो बहादुरी का भार रखा जाता है उसके ऊपर..
अपने आंसुओ को उसके पीछे छिपाकर वो जिंदगी भर जीता है..
और तुम क्या जानो एक लड़के के दिल में कितना दर्द रहता है..
वो बेरोजगारी की शर्मिंदगी, वो बहन की शादी का कर्ज..
जिसे चाहा था सच्चे दिल से, जब वो लड़की वो छोड़कर दूर चली जाती है..
ख़त्म कर ले खुद की जिंदगी ये इच्छा उस लड़के के मन में भी आती है..
पर फिर उसकी माँ का चेहरा उसकी आँखों के आगे आने लगता है..
मर जाएगी तेरी माँ ये सोचकर उसका दिल जोर से धड़कता है..
और फिर वो उसी टूटे हुए दिल के साथ जिंदगी भर जीता है..
और तुम क्या जानो एक लड़के के दिल में कितना दर्द रहता है..
जिंदगी कभी खुद की नहीं, जिया बस औरों के लिए..
कभी माँ बाप, कभी बीवी, कभी बच्चों के लिए अपने हर पल दिए..
कभी माँगा नहीं बदले में कुछ भी, बिना शर्त ही सबकुछ सहता है..
और तुम क्या जानो एक लड़के के दिल में कितना दर्द रहता है..


Best Friend Poetry by Tavneet Singh


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आखिर तुम क्यों दिल के इतने पास हो,
कोई तो वजह जरूर है जो तुम इतने खास हो..
मेरे दोस्तों में सबसे पहले तुम्हारा ही नाम आता है,
रब की कसम हमारा पिछले कई जन्मो से नाता है..
6th क्लास में रब में मुझे तुझसे मिलाया था,
और उस मुलाकात में ही मैंने तुम्हें मेरी जिंदगी का हिस्सा बनाया था..
वो वक़्त मैं कैसे भूल जाऊं जो मैंने तेरे साथ बिताया था..
क्यूंकि तुम्हारी हर एक आदत ने मुझे दीवाना जो बनाया था..
उस वक़्त कुछ दोस्त तुम्हारे पास मुझसे ख़ास थे,
लेकिन तुम तो मेरे दिल के तब भी बहुत पास थे..
9876543210, यही वो नंबर है जो मैं अक्सर मिलाया करता था,
जब भी तुम्हारी पक पक सुनने को मेरा दिल तरसता था..
ज्यादातर तेरे ही बारे में सोचा करता था,
यहां तक की हैंडराइटिंग भी तेरी ही कॉपी किया करता था..
लिखावट तेरी बेमिशाल थी, और ड्राइंग भी कमाल थी..
तूने भी अपनी दोस्ती तब खूब निभाई,
जब मेरे हिस्से की ड्राइंग भी तूने थी बनाई..
टीचर भी देखकर समझ लिया करता था,
और मेरी जगह तेरी ही तारीफ किया करता था..
तेरे बिना मेरा वक़्त कहाँ कटता था,
शायद इसलिए जब कोई तुझसे बात करे,
तो मेरा दिल अंदर ही अंदर जलता था..
सच कहूँ तो तू मेरे लिए एक अनजान पहेली थी,
जिसमे उलझने का दिल हमेशा करता था..
आखिर उस अनजान पहेली ने कुछ ऐसा उलझाया,
कि उलझते हुए भी वो सुलझने लगी
जो पहेली मेरे दिल के पास थी,
वो अब मेरी जिंदगी बनने लगी थी..
अब तक जिंदगी में मैंने कई अच्छे दोस्तों का साथ पाया है,
और मैंने सबको तेरी बाते बता बता के पकाया है..
उन सबको लगता है कि तू मेरे लिए बहुत ख़ास है,
और तू ही सबसे जयादा मेरे दिल के पास है..
लेकिन हकीकत तो ये है कि ये सब दोस्त मेरे दिल के पास है,
और तेरे लिए बहुत खास है,
क्यूंकि ये तो केवल रब ही जनता है कि,
किसका दिल किसके पास है?
कहीं कहीं मैं आज भी तुझपे मरता हूँ,
और कही तुझे मुझसे अच्छा कोई और ना मिल जाये,
इस बात से मन ही मन में डरता हूँ..
इसी डर से रब से यही दुआ करता हूँ,
कि हे! रब मुझपे एक एहसान जरूर करना,
इस दोस्त को मुझसे कभी भी जुदा ना करना..

Main Pandit Ji Ka Beta Tha Wo Kazi Sahab Ki Beti Thi


Main Mandir Me Betha Tha, Wo Maszid Me Bethi Thi..
Main PanditJi Ka Beta Tha Wo Kazi Sahab Ki Beti Thi..

मैं उनसे बातें तो नहीं करता पर उनकी बातें लाजवाब करता हूँ..
पेशे से शायर हूँ यारों, अल्फाज़ो से दिल का इलाज़ करता हूँ..
उन्हें तो मैं उस खुदा से भी छीन लाता पर उनकी बातो ने मुझे कायर बना रखा है..
यूँ तो शौंक नहीं है मुझे शायरी का पर उनकी आँखों ने मुझे शायर बना रखा है..
मैं मंदिर में बैठा था वो मस्जिद में बैठी थी..
मैं पंडित जी का बेटा था वो काज़ी साहब की बेटी थी..
मैं बुलेट पर चलकर आता था, वो बुरखे में गुजरती थी..
मैं कायल था उसकी आँखों का, वो मेरी नजर पर मरती थी..
मैं खड़ा रहता था चौराहे पर, वो भी छत पर चढ़ती थी..
मैं पूजा कर आता था मज़ारो की, वो मंदिर में नमाज़ पड़ती थी..
वो होली पे मुझे रंग लगाती, मैं ईद का जश्न मनाता था..
वो वैष्णो देवी जाती थी, मैं हाजी अली हो आता था..
वो मुझको क़ुरान सुनाती, मैं उसको वेद समझाता था..
वो हनुमान चालीसा पढ़ती थी, मैं सबको अजान सुनाता था..
उसे मांगता था मैं मेरे रब से, वो अल्लाह से मेरी दुआ करती थी..
ये सब उन दिनों की बात है जब वो मेरी हुआ करती थी..
फिर इस मजहबी इश्क़ का ऐसा अंजाम हुआ..
वो मुसलमानो में हो गयी और मैं हिन्दुओ में बदनाम हुआ..
मैं मंदिर में रोता था वो मस्जिद में रोती थी..
मैं पंडित जी का बेटा था, वो काज़ी साहब की बेटी थी..
रोते रोते हम लोगो की तब शाम ढला करती थी..
अपने अब्बू से छिपकर वो मस्जिद के पीछे मिला करती थी..
मैं पिघल जाता था बर्फ सा, वो जब भी छुआ करती थी..
ये सब उन दिनों की बात है जब वो मेरी हुआ करती थी..
कुछ मजहबी कीड़े आकर हमारी दुनिया उजाड़ गए..
जो खुदा से ना हारे थे, वो खुदा के बन्दों से हार गए..
जीतने की कोई गुंजाइस ना थी, मैं इश्क़ का हारा बाजी था..
जो उसका निकाह कराने आया था, वो उसी का बाप काज़ी था..
जो गूंज रही थी मेरे कानो में, वो उसकी शादी की शहनाई थी..
मैं कलियाँ बिछा रहा था गलियों में, आज मेरी जान की विदाई थी..
मैं वही मंदिर में बैठा था, पर आज वो डोली में बैठी थी..
मैं पंडित जी का बेटा था, वो काज़ी साहब की बेटी थी..


Baap Ka Maal Samjha Hai Kya?