Intezaar Poetry by Jai Ojha – love Poem


Chalo Accha Hai Is Intezaar Mein Ye Zindagi To Gujar Jayegi..
Bas Mere Intezaar Ki Intha Kya Hai Ye Mat Pooch Mujhse,
Itna Samajh Le Ki Marte Waqt Bhi Aankhe Khuli Reh Jayegi..

चलो अच्छा है इस इंतज़ार में ये जिंदगी तो गुजर जाएगी..
कवितायेँ जब तुमको छूकर लौट आएगी,
कवितायेँ जब तुमको छूकर लौट आएगी,
हाँ तब, तब किसी रोज सुकूँ से मौत आएगी..
हाँ तब, तब किसी रोज सुकूँ से मौत आएगी..
हम ब्लॉक है पर करेगें तेरी फोटो पे क्लिक बार बार,
हम ब्लॉक है पर करेगें तेरी फोटो पे क्लिक बार बार,
कभी तुम भी करके देखो ना, जरा तकलीफ समझ आएगी..
कभी तुम भी करके देखो ना, जरा तकलीफ समझ आएगी..
हम आये है तेरे शहर में, ना जाने कब मुलाक़ात तुमसे हो पायेगी,
हम आये है तेरे शहर में, ना जाने कब मुलाक़ात तुमसे हो पायेगी,
कभी तो कहीं तो नजर आओगी तुम मुझे,
कभी तो कहीं तो नजर आओगी तुम मुझे,
चलो अच्छा है इस इंतज़ार में ये जिंदगी तो गुजर जाएगी..
चलो अच्छा है इस इंतज़ार में ये जिंदगी तो गुजर जाएगी..
हमारी दास्ताँइश्क़ में तुम भी तो शामिल रही अब तक,
हमारी दास्ताँइश्क़ में तुम भी तो शामिल रही अब तक,
आज नहीं तो कल याद तुम्हे भी बहुत आएगी..
आज नहीं तो कल याद तुम्हे भी बहुत आएगी..
तेरी मेरी साँसों ने देखी जो इंतहा हमारे इश्क़ की,
तेरी मेरी साँसों ने देखी जो इंतहा हमारे इश्क़ की,
बता ना ये सांसे कैसे झूठ बोल पाएगी..
बता ना ये सांसे कैसे झूठ बोल पाएगी..
बस इतना मलाल रहा कि तुमसे ज्यादा वफादार तुम्हारी याद निकली,
बस इतना मलाल रहा कि तुमसे ज्यादा वफादार तुम्हारी याद निकली,
ये ताउम्र मुझे छोड़कर नहीं जाएगी..
ये ताउम्र मुझे छोड़कर नहीं जाएगी..
एक तेरी फितरत जो भूल जाती है कसमें सारी,
एक तेरी फितरत जो भूल जाती है कसमें सारी,
और एक मेरी रूह जो मरके भी वादे सारे निभाएगी..
और एक मेरी रूह जो मरके भी वादे सारे निभाएगी..
ये रंज है कि मेरा दर्द दिल अब कभी मिटेगा नहीं दोस्त,
हाँ ये रंज है कि मेरा दर्द दिल अब कभी मिटेगा नहीं दोस्त,
और ये गनीमत भी कि अब कोई चोट मेरा दिल नहीं तोड़ पाएगी..
और ये गनीमत भी कि अब कोई चोट मेरा दिल नहीं तोड़ पाएगी..
बस मेरे इंतज़ार की इंतहा क्या है ये मत पूछ मुझसे,
बस मेरे इंतज़ार की इंतहा क्या है ये मत पूछ मुझसे,
इतना समझ ले कि मरते वक़्त भी आंखे खुली रह जाएगी..
इतना समझ ले कि मरते वक़्त भी आंखे खुली रह जाएगी..
तुम्हारा इंतज़ार बढ़ते बढ़ते एक रोज इस हद तक जा पहुंचा,
कि तुमसे इसका ताल्लुक ही ना रहा..


Wo Ladko De Dil Se Game Khelti Rahi by Goonj Chand


Kitni Sacchai Se Wo Humse Jhooth Bolti Rahi..
Or Mere Sath Sath Kisi Or Ke Dil Se Bhi Wo Game Khelti Rahi..

कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
और मेरे साथ साथ किसी और के दिल से भी वो गेम खेलती रही..
जब मेरे साथ होती तो उसे दोस्त बताया करती थी,
और हो उसके साथ तो ये टैग वो मुझे चिपकाया करती थी..
ये दोस्ती और प्यार के चक्कर में वो एक अच्छा स्टेटस खोजती रही..
और बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
शॉपिंग करनी हो तो मेरे साथ जाती थी..
और लॉन्ग ड्राइव पे जाना हो तो उसे कॉल लगाती थी..
साला हम दोनों की जिंदगी तो मॉल से लेकर सड़कों में उलझती रही,
और कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
रूठ जाऊं कभी तो पास आकर वो मनाती भी थी..
और उससे मिलने के चक्कर में मुझसे दूर जाती भी थी..
चंद पैसो के लालच में वो हम दोनों की जिंदगी से खेलती रही,
और भाई बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
झूठ ही तो था आखिर नहीं छुप पाया..
और डर गयी थी वो उस दिन जब उसने हम दोनों को साथ खड़ा पाया..
तब भी वो रो रोकर कि मैं तुम दोनों से प्यार करती हूँ, भाई यही कहती रही,
और बड़ी सच्चाई से वो उस दिन भी झूठ बोलती रही..
सुना है आजकल कुछ नए लड़के आये है उसकी लाइफ में..
वैसे देखा तो मैंने भी था उसे किसी की बाइक में..
मतलब हमारे बाद भी वो बड़ी शिद्दत से लड़को को खोजती रही,
और भाई सच में, बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..

कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
और मेरे साथ साथ किसी और के दिल से भी वो गेम खेलती रही..


Nek Ne Nek Aur Bure Ne Bura Jaana Mujhe


Nek Ne Nek Aur Bure Ne Bura Jaana Mujhe
Jiski Jitni Fitrat Thi, Usne Utna Pehchana Mujhe

नेक ने नेक और बुरे ने बुरा जाना मुझे,
जिसकी जितनी फितरत थी, उसने उतना पहचाना मुझे..
फ़र्क़ ना पड़ता अगर वो बुरा ही जानते मुझे,
सह हम ये ना पाए कि नेक कहने के बाद बुरा उन्होंने माना मुझे..
बदलता तो मौसम था पर बदल वो इंसान गए,
जिसकी जैसी फितरत थी, वो वैसा मुझे पहचान गए,
काश बदलते मौसम के साथ मैं भी बदल जाता,
नेक को बुरा और बुरे को नेक कह पाता..
यूँ तो कहने से कुछ नहीं बदलता,
वरना मैं सब से पहले खुद को बदलता..
मौसम तो आज भी बदल रहा है,
पर ये मासूम दिल आज भी उन्हें नेक समझ रहा है..
मैं इस बेवक़ूफ़ दिल को कैसे समझाऊं,
कि वो नेक को बुरा और बुरे को नेक मान चुके है,
उनकी जैसी फितरत थी, वो वैसा पहचान चुके है..
ये पहचान तो मैं बदल नहीं पाउँगा,
पर एक दिन उन्हें जरूर भुला जाऊंगा..
याद तो तब भी उन्हें मैं किया करूँगा,
पर फ़र्क़ सिर्फ इतना होगा कि उनको बुरा वक़्त समझ लिया करूँगा..
और खुदा अब मुझे सिर्फ उसी से मिलाना,
जो नेक को नेक और बुरे को बुरा जाने,
तब तक भले ही मुझे कोई ना पहचाने..

Das Baje Baad wo Daru Ke Adde Pe Hota Hai by Goonj Chand


Meri Neende Udakar Wo Chain Ki Neend Sota Hai..
Or Roj Das Baje Baad Wo Daru Ke Adde Par Hota Hai..

मेरी नींदे उड़ाकर वो चैन की नींद सोता है..
और रोज दस बजे बाद वो दारू के अड्डे पर होता है..
मैं ये नहीं कहती कि पीना ही छोड़ दे..
पर यार ये रोज रोज पीना भी कहाँ अच्छा होता है..
डेली दस बजे बाद वो दारू के अड्डे पर होता है..
कहता है बहुत गम है मेरी जिंदगी में इसलिए पीता हूँ..
अरे भाई तुझे क्या लगता है कि औरतो की जिंदगी में कोई गम नहीं होता है..
और डेली दस बजे बाद वो दारू के अड्डे पर होता है..
कहता है मैं पीता नहीं वैसे, पर दोस्त पिला देते है..
अरे ये दारू के चक्कर में दोस्तों को बदनाम करना भी अच्छा नहीं होता है..
और डेली दस बजे बाद वो दारू के अड्डे पर होता है..
झूठ तो वैसे बड़ी शिद्दत से बोल लेता है वो,
पर नशे में डगमगाई जबान को ये कहाँ पता होता है..
और डेली दस बजे बाद वो दारू के अड्डे पर होता है..
यकीन नहीं होता तो घर जाकर देख लेना उसके,
उसका कमरा भी रोज उसके इंतज़ार में अकेला ही सोता है..
और डेली दस बजे बाद वो दारू के अड्डे पर होता है..
मेरी नींदे उड़ाकर वो चैन की नींद सोता है..
और रोज दस बजे बाद वो दारू के अड्डे पर होता है..


Itna Aasan Hota Hai Kya Ek Ladka Hona by Pooja Sonawale


Itna Aasan Hota Hai Kya Ek Ladka Hona..

कि आपके कंधो से कंधे मिलाऊँ उतनी ऊंचाई नहीं है मेरी..
पर कोशिश जरूर करुँगी उस ऊंचाई तक पहुँचने की,
जहाँ आपके कंधे ना पहुँच पाए..
जिम्मेदारियां तो इनके सर पर भी बहुत होती है,
पर ये कभी बताते नहीं है..
रोते तो ये भी बहुत है, पर ये कभी जताते नहीं है..
सपने तो इनकी आँखों में भी बहुत होते है,
पर घर की ख्वाहिशो के सामने इन सपनो को बस सपनो तक ही सीमित रखना..
इतना आसान होता है क्या एक लड़का होना..
मुश्किले तो इन्हे भी दस्तक देती है..
कठिनाइयाँ तो इनकी राह पे भी आती है..
पर इन कठिनाइयों का निडर होकर सामना करना,
मुश्किलों को अपनी मुस्कान के पीछे छुपाना..
इतना आसान होता है क्या एक लड़का होना..
माँ की जरूरते, बहन की नादानियाँ, पापा की वो डाँट..
और ढेर सारे नखरों के साथ ढेर सारे खर्चे उठाना..
इतना आसान होता है क्या एक लड़का होना..
छोड़ जाए बीच रास्ते पे अगर कोई लड़की,
तो तुम खुश रहना, ये कहकर उसे अलविदा कहना..
दिल में लगी ठोकर को भूलकर एक नई शुरुआत करना..
इतना आसान होता है क्या एक लड़का होना..
बुरा भला तो इन्हे भी लोग बहुत कहते है..
सिर्फ एक लड़की के खातिर पूरी मर्दजात को लोग बदनाम करते है..
इस बदनामी को ईमानदारी से सहना..
इतना आसान होता है क्या एक लड़का होना..

Main Apni Pehchan Banaunga – Motivational Poetry


Main Apni Pehchan Banaunga – Motivational Poetry
Main Aajkal Kyun Itna Hairan Hoon,
Shayad Apni Jindagi Se Pareshaan Hoon..

मैं आजकल क्यों इतना हैरान हूँ..
शायद अपनी ज़िंदगी से परेशान हूँ..
सबकुछ अजीब सा लगता है..
जब उजाले में भी अँधेरा ही दिखता है..
कुछ भी करने में डर सा लगता है..
क्यूंकि हर तरफ मुश्किलों का पहाड़ जो गिरता है..
शायद इसी वजह से मैं हैरान हूँ..
और अपनी जिंदगी से परेशान हूँ..
कम्बख्त इन पहाड़ो से कौन डरता है..
इन पर तो चढ़ने का दिल करता है..
फिर भी लाचार मैं हो जाता हूँ..
जब पहाड़ पर नया पहाड़ गिरता पाता हूँ..
काश मैं कुछ एहसास कर पाता कि,
मुसीबतो से बच जाता या फिर पहाड़ो को चीर के निकल जाता..
फिर भी शायद मैं हैरान रहता,
तब किसी और वजह से परेशान रहता..
जो मजा पहाड़ के ऊपर से निकलने में है..
वो कहाँ उससे बच के निकलने में है..
आखिर ऊपर से ही तो आस्मां साफ़ दिखता है..
नीचे तो धूल में ही इंसान बसता है..
धूल में रहना किसे अच्छा लगता है..
मेरा भी दिल आसमान में उड़ने को करता है..
क्या मैं खुद को खुशकिस्मत कह सकता हूँ..
क्यूंकि मुझे हरतरफ मुसीबतो का पहाड़ जो दिखता है..
आखिर इन पहाड़ो पर चढ़कर ही तो, मैं आस्मां छू पाउँगा..
और अपनी हैरान परेशान जिंदगी को एक मुकाम पर पहुंचा पाउँगा..
मुझे पुरी उम्मीद है कि मुकाम पर पहुंचकर भी मैं हैरान हो जाऊंगा..
जब मुकाम के आगे भी एक और अनजान जिंदगी पाउँगा..
उस वक़्त भी मैं हैरान हो जाऊंगा,
क्यूंकि तब मैं परेशान ना होकर एक नई पहचान बनाउँगा..

Jiske Liye Mujhe छोड़ा Hai Tum Uske To Ho Jaate by Goonj Chand


Tu Khus Hai Apni Zindagi Me, Yahi Kehkar Hum Khud Ko Behlate..
Or Jiske Liye Tumne Mujhe छोड़ा Hai, Tum Uske To Ho Jaate..

तू खुश है अपनी जिंदगी में, यही कहकर हम खुद को बहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
माना की इत्तेफाक से मिल गए थे तुम उस दिन रस्ते पर
पर जब लिफ्ट दे ही दी थी तो जनाब मंजिल तक तो छोड़ आते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
सौ बार भी शुक्रिया करूँ तेरा तो काम होगा..
जो तुम बेवफाई ना करते तो हम शायर कैसे कहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
तुझे भूलना आसान हो जाता मेरे लिए
जब हाथ उठा ही दिया था तो उसे मेरे गालो तक तो ले आते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
सब पूछते है मुझसे कि मैं नफरत, बेवफाई या दिल टूटने पर ही क्यों लिखती हूँ..
प्यार पर भी लिखती मैं, अगर तुम ये प्यार निभा जाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
तू खुश है अपनी जिंदगी में, यही कहकर हम खुद को बहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..


Ab Wo Teri Wali Nahi Hai by Goonj Chand


Tere Lakh Manane Par Bhi Wo Aane Wali Nahi Hai..
Aur Sunna Bhai, Ab Wo Tere Wali Nahi Hai..

तेरे लाख मनाने पर भी वो आने वाली नहीं है..
और सुनना भाई, अब वो तेरे वाली नहीं है..
तू तो उसे टाइम भी खैरात की तरह देता था..
पूरा दिन फ्री होते हुए भी उसका फ़ोन काट देता था..
आज तू भले ही खाली हो, पर वो खाली नहीं है..
और सुनना भाई, अब वो तेरे वाली नहीं है..
वो पागल थी तेरे प्यार में और तू कहीं और बिजी था..
तेरी नजरो में लड़कियों को पटाना शायद बहुत इजी था..
तू होगा बेशक राजा उसकी कहानी में, पर वो तेरी रानी नहीं है..
और सुनना भाई, अब वो तेरे वाली नहीं है..
वो तुझे सच्चा प्यार करती थी, तो भी तूने उसे छोड़ दिया..
पर कभी ये जानने की कोशिश की, कि उसने क्यों रिश्ता तोड़ दिया..
क्यूंकि वो समझ चुकी थी कि इस रिश्ते में तुझसे निभने वाली नहीं है..
और सुनना भाई, अब वो तेरे वाली नहीं है..
प्यार का नाटक करते करते शायद तुझे भी प्यार हो ही गया..
और आज उसे किसी और का होते देख, तेरा दिल भी रो ही दिया..
पर अब तेरे इन आंसुओ पर ना वो पिघलने वाली नहीं है..
और सुनना भाई, अब वो तेरे वाली नहीं है..
तेरे लाख मनाने पर भी वो आने वाली नहीं है..
और सुनना भाई, अब वो तेरे वाली नहीं है..


Tere Bina Hi Is Ishq Ko Mukammal Karungi by Goonj Chand


Ab Main Akele Hi Tujhse Mohabbat Karungi..
Aur Tere Bina Hi Is Ishq Ko Mukammal Karungi..

अब मैं अकेले ही तुझसे मोहब्बत करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
ना कोई गिला है तुझसे ना बैर है कोई..
जो कोई पूछे मेरे बारे तो कहना गैर है कोई..
मैं तो फिर भी तेरे ही बारे में बाते करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
जाने के बाद ना तूने मुड़के देखा ना मैं तेरे पास आयी..
पर तूने कर ली है शादी ऐसी मेरे कानो में आवाज आयी..
अब इस कहानी की रुक्मणि ना सही तो फिर राधा ही बनुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
अब ना तेरे वापस आने की ख़ुशी है और जाने का डर तो निकल ही गया..
पकड़ के रखा था जो इतने सालो से, आखिर वो रिश्ता भी हाथो से फिसल ही गया..
एकतरफा थी मोहब्बत तो अब एकतरफा ही रखूंगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
ना लगाउंगी तुझ पर बेवफाई का इलज़ाम अब..
पर तुझसे प्यार करना बस यही है मेरा काम अब..
मैं तो बस मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
अब मैं अकेले ही तुझसे मोहब्बत करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..


Papa Ki Chai by Goonj Chand


Bahut KhushNasib Hote Hai wo Log,
Jinhe Subah Chai Ke Gilash Ke Sath Unki Maa Uthaya Karti Hai..
Par Unse Bhi Jayada KhushNasib Hun Main,
Kyonki Meri Subah To Mere Papa Ki Chai Banaya Karti Hai..

बहुत खुशनसीब होते है वो लोग, जिन्हे सुबह चाय के गिलास के साथ उनकी माँ उठाया करती है..
पर उनसे भी ज्यादा खुशनसीब हूँ मैं, क्योंकि मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..
उठ जा बेटा सुबह हो गयीजब ये कहकर आप मुझे उठाया करते हो..
बहुत ही खुश हो जाती हूँ मैं, जब आप इस कदर अपना प्यार जताया करते हो..
और आपकी ये पागल बेटीथोड़ी देर और सोने दो ना पापा
ऐसा कहकर अपने मुँह पर चादर डाला करती है..
इसी तरह वो भी अपना प्यार जताया करती है..
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..
माँ के पूछने पर खाना क्या बनाऊं, आप तुरंत मुझसे पूछा करते हो..
और अपनी कोई पसंद नहीं, सिर्फ मेरी ही फ़िक्र करते हो..
तब आपकी ये पागल बेटी एक एक करके अपनी फरमाइशें गिनाया करती है..
और इसी तरह नखरे दिखा वो भी अपनी बात मनाया करती है..
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..
जब गुस्सा करे मम्मी मुझपर तो आप तुरंत मनाया करते हो..
और तेरी मम्मी तो पागल हैआंख मारकर ये जुमला भी दोहराया करते हो..
तब आपकी ये पागल बेटी खुश होकर मम्मी को चिढ़ाया करती है..
और इसी तरह नखरे दिखा वो भी अपना प्यार जताया करती है..
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..
दूर हूँ अब आपसे तो खुद ही बना लेती हूँ चाय..
और हूँ कहीं बाहर तो पी लेती हूँ नागोरी की चाय..
पर ये सब चाय तो सिर्फ नींद भगाया करती है
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..
बहुत खुशनसीब होते है वो लोग, जिन्हे सुबह चाय के गिलास के साथ उनकी माँ उठाया करती है..
पर उनसे भी ज्यादा खुशनसीब हूँ मैं, क्योंकि मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..

Baap Ka Maal Samjha Hai Kya?