Badnaam Shayar by Vihaan Goyal

the digital shayar
Ek Ek Shakhsh Ki Jubaan Par Mera Naam Aa Raha Hai,
Ab Kehte Hai Ki Wo Dekho Shayar Badnaam Aa Raha Hai..

तेरा दर्द कुछ इस तरह से मेरे काम रहा है,
एक एक शख्श की जुबां पर मेरा नाम रहा है..
जो लोग पहले हमें पहचानते तक ना थे,
अब कहते है, वो देखो शायर बदनाम रहा है..

तेरे इस आशिक़ का है लोगो में ये सुरूर आजकल,
हमें दवा देकर हो रहे है मशहूर आजकल..
उन्हें दिल से जो निकाला तो ये मकाम रहा है..
एक एक शख्श की जुबां पर मेरा नाम रहा है..
अब कहते है, वो देखो शायर बदनाम रहा है..

अपने जिस्म में रूह सा उतारते थे तुझे,
मानकर जिंदगी गुजारते थे तुझे..
अब ये हाल है, ना ही कोई दुआ ना ही कोई सलाम रहा है..
एक एक शख्श की जुबां पर मेरा नाम रहा है..
अब कहते है, वो देखो शायर बदनाम रहा है..

सर्द रातों में जब बेलिबास होकर जब कांपने लगते थे,
तो सुलगाते थे तुझे और तापने लगते थे..
तेरे होंठ जब मेरे होंठो के करीब आते थे..
तो ऐसा लगता था कि मेरे करीब कोई जाम रहा है..
एक एक शख्श की जुबां पर मेरा नाम रहा है..
अब कहते है, वो देखो शायर बदनाम रहा है..

भले ही तुझे हमसे मोहब्बत ना हो,
मैं चाहूंगा तुझे भले इजाजत ना हो..
हर दिन अश्क बनकर आँखों में तू सुबह शाम रहा है..
एक एक शख्श की जुबां पर मेरा नाम रहा है..
अब कहते है, वो देखो शायर बदनाम रहा है..

काश कि मेरी याददाश्त चली जाती,
मेरे दिल मेरे दिमाग से तेरी हर बात चली जाती..
ना चाहते हुए भी तेरा जिक्र सरेआम रहा है..
एक एक शख्श की जुबां पर मेरा नाम रहा है..
अब कहते है, वो देखो शायर बदनाम रहा है..

 

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