Chai Cigarette Bewafai Shayari by Ankit Guryan

Meri Mohabbat ko Hamesha Hi Wo Kuch Is Kadar Satati Rahi..

Main Chai Ka Shaukeen Tha Or Wo Mujhe Coffee Pilati Rahi..

उसकी मोहब्बत की बस इतनी सी कहानी है,

लोग उसके दीवाने है और वो चाय की दीवानी है..

मेरी मोहब्बत को हमेशा ही वो कुछ इस कदर सताती रही..

मैं चाय का शौक़ीन था और वो मुझे कॉफ़ी पिलाती रही..

ज्यादा कुछ की तमन्ना नहीं मुझको,

बस एक छोटी सी फरमाइश करता हूँ..

इन सर्द रातों में बस एक तेरा साथ हो,

और एक कप चाय की ख्वाहिश रखता हूँ..

तेरे चले जाने से जिंदगी मुझे कुछ यूँ अलग लगी है..

भूलकर कॉफ़ी मुझे आज फिर चाय की तलब लगी है..

भूल जायेगा तू हर गम अपने,

कभी एक लम्हा संग मेरे जीकर तो देख..

अरे क्या रखा है तेरे इन महखानो में,

कभी एक प्याली चाय संग मेरे पीकर तो देख..

कैसे छोड़ दूँ मैं चाय, सिगरेट और उसको अंकित..

क्योंकि ये तीनो मेरी बिगड़ी आदतों में जो शुमार है..

तेरी जुदाई के गम को सहना सीख गया हूँ,

और कुछ इस कदर जिंदगी जीने लगा हूँ मैं..

चाय पिया करता था तन्हाई में अक्सर,

अब साथ में सिगेरट भी पीने लगा हूँ मैं..

तेरे साथ बिताया हर एक लम्हा नफरत की आग में जला देता हूँ मैं..

इश्क़ की चिंगारी को अब जलने से पहले ही बुझा देता हूँ मैं..

तुम ख्वाब में भी आती हो और तुम याद भी बहुत आती हो,

मगर अफ़सोस तेरी यादों को अब सिगेरट के धुएं में उड़ा देता हूँ मैं..

तेरी मोहब्बत को भुलाने के लिए रोज सिगेरट फूंक रहा हूँ मैं..

जाने अनजाने में जिंदगी का एक एक दिन कम कर रहा हूँ मैं..

तुम बेवफा हो हमेशा यही सोचकर सोता हूँ,

हो सके तो इस नींद से मुझे जगाने आ जाना…

और लगे जो कभी मेरी सिगेरट तुम्हें अपनी सौतन,

तो मुझे समझने नहीं इसे बुझाने आ जाना..

हम प्यार करना जानते है, धोखा कभी किसी को दिया नहीं करते..

इश्क़ मोहब्बत की बाते करते है हमेशा, किसी की बेवफाई का जिक्र कभी किया नहीं करते..

और गलतफहमी है तुम्हें कि दाढ़ी बढाकर मजनू बन जायेंगे हम तेरे चले जाने के बाद,

हम चाय के शौक़ीन है मैडम, तुझ जैसे बेवफा के लिए शराब पिया नहीं करते..

रिश्ता हमारे प्यार का तुमने कुछ यूँ कलंकित कर दिया..

बेवफाई खुद की और ज़माने में बदनाम अंकित कर दिया..

 
 

Wo Ladko De Dil Se Game Khelti Rahi by Goonj Chand


Kitni Sacchai Se Wo Humse Jhooth Bolti Rahi..
Or Mere Sath Sath Kisi Or Ke Dil Se Bhi Wo Game Khelti Rahi..

कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
और मेरे साथ साथ किसी और के दिल से भी वो गेम खेलती रही..
जब मेरे साथ होती तो उसे दोस्त बताया करती थी,
और हो उसके साथ तो ये टैग वो मुझे चिपकाया करती थी..
ये दोस्ती और प्यार के चक्कर में वो एक अच्छा स्टेटस खोजती रही..
और बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
शॉपिंग करनी हो तो मेरे साथ जाती थी..
और लॉन्ग ड्राइव पे जाना हो तो उसे कॉल लगाती थी..
साला हम दोनों की जिंदगी तो मॉल से लेकर सड़कों में उलझती रही,
और कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
रूठ जाऊं कभी तो पास आकर वो मनाती भी थी..
और उससे मिलने के चक्कर में मुझसे दूर जाती भी थी..
चंद पैसो के लालच में वो हम दोनों की जिंदगी से खेलती रही,
और भाई बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
झूठ ही तो था आखिर नहीं छुप पाया..
और डर गयी थी वो उस दिन जब उसने हम दोनों को साथ खड़ा पाया..
तब भी वो रो रोकर कि मैं तुम दोनों से प्यार करती हूँ, भाई यही कहती रही,
और बड़ी सच्चाई से वो उस दिन भी झूठ बोलती रही..
सुना है आजकल कुछ नए लड़के आये है उसकी लाइफ में..
वैसे देखा तो मैंने भी था उसे किसी की बाइक में..
मतलब हमारे बाद भी वो बड़ी शिद्दत से लड़को को खोजती रही,
और भाई सच में, बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..

कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
और मेरे साथ साथ किसी और के दिल से भी वो गेम खेलती रही..


Jiske Liye Mujhe छोड़ा Hai Tum Uske To Ho Jaate by Goonj Chand


Tu Khus Hai Apni Zindagi Me, Yahi Kehkar Hum Khud Ko Behlate..
Or Jiske Liye Tumne Mujhe छोड़ा Hai, Tum Uske To Ho Jaate..

तू खुश है अपनी जिंदगी में, यही कहकर हम खुद को बहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
माना की इत्तेफाक से मिल गए थे तुम उस दिन रस्ते पर
पर जब लिफ्ट दे ही दी थी तो जनाब मंजिल तक तो छोड़ आते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
सौ बार भी शुक्रिया करूँ तेरा तो काम होगा..
जो तुम बेवफाई ना करते तो हम शायर कैसे कहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
तुझे भूलना आसान हो जाता मेरे लिए
जब हाथ उठा ही दिया था तो उसे मेरे गालो तक तो ले आते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
सब पूछते है मुझसे कि मैं नफरत, बेवफाई या दिल टूटने पर ही क्यों लिखती हूँ..
प्यार पर भी लिखती मैं, अगर तुम ये प्यार निभा जाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..
तू खुश है अपनी जिंदगी में, यही कहकर हम खुद को बहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..


Aaj Achanak Use Meri Yaad Aayi Hai by Goonj Chand


Aaj Achanak Use Meri Yaad Aayi Hai..
Lagta Hai Fir Koi Musibat Uske Paas Aayi Hai..

आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
लगता है फिर कोई मुसीबत उसके पास आयी है..
यूँ तो याद नहीं करता वो बेवजह मुझे कभी..
कोई तो वजह है जो उसे मेरे पास लायी है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
ठुकराया था मेरा प्यार उसने किसी गैर के लिए..
आज फिर किस्मत उसे उसी मोड़ पर लायी है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
अब मैं क्या इलाज करूँ उसके इस दर्द का भला
मैंने तो खुद अपने लिए इसकी दवा मंगवाई है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
अब क्या फायदा तेरे वापिस आने का भला..
भला जिस्म से निकलकर रूह कभी वापस आयी है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
लगता है फिर कोई मुसीबत उसके पास आयी है..


Meri Kadar Tujhe Us Din Samajh Aayegi by Goonj Chand


Meri Kadar Tujhe Us Din Samajh Aayegi…
Jis Din Tere Jaisi Koi Tujhe Mil Jayegi..

मेरी कदर तुझे उस दिन समझ आएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..
जो होगी फ्री पूरा पूरा दिन पर फिर भी,
तुझे Busy होने का MSG चिपगायेगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..
जायेगा जब भी तू कुछ वक़्त बिताने उसके साथ,
तब तुझे Fully Ignore कर वो अपना सारा टाइम अपने फ़ोन पर बिताएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..
भले ही 24 hours अपडेट रहेगी वो Whatsapp पर,
पर तेरे साथ अपनी DP कभी नहीं लगाएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..
कभी कभी कर भी लेगी प्यार भरी 2-4 बातें तुझसे,
पर तेरे बीमार होने पर वो सारी रात तेरे सिर के पास नहीं बिताएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..
ले आएगी बहार से तेरी पसंद का खाना भी कभी कभी,
पर रात के 2 बजे उठकर तेरे लिए आलू के पराठें नहीं बनाएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..
मिलवाएगी अपने दोस्तों से भी बेशक वो तुझे,
पर अपना Just Friend कहकर वो तुझे Introduce करवाएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..
मेरी कदर तुझे उस दिन समझ आएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..


Ye Shaam Bilkul Tum Jaisi Hai by Jai Ojha


Din se milkar aati hai, Raat ke Aagosh me ghul Jati hai..
Ye Shaam Bilkul Tum Jaisi hai, Baat Baat me badal Jati hai..
बहुत से Writers हुए है इस दुनिया में, बहुत से शायर, बहुत से प्रेमी या बहुत से Artist, जिन्होंने अपनी अपनी गर्लफ्रेंड की तुलना, अपनी माशूका की तुलना अलग अलग चीजों से की है. जैसे किसी ने रात से तुलना की है, किसी ने चाँद से तुलना की है, किसी ने शबनम से तुलना की है, किसी ने फूल से तुलना की है, तो ऐसे Comparisons किये गए है और बहुत कुछ लिखा गया है. यहां पे जो Writer है इसकी जो गर्लफ्रेंड है वो इसकी जिंदगी में आती है और बार बार चली जाती है. बार बार आती है और बार बार चली जाती है तो इस वजह से इसके जीवन में एक बिखराव पैदा हो गया है. उस बिखराव के through ये Poetry निकलती है, तो वो लिखता है

कि दिन से मिलकर आती है, रात के आगोश में घुल जाती है..
दिन से मिलकर आती है, रात के आगोश में घुल जाती है..
ये शाम बिलकुल तुम जैसी है, बात बात में बदल जाती है..
खूबसूरत है, शीतल है, आतुर भी है तुम जैसी,
खूबसूरत है, शीतल है, आतुर भी है तुम जैसी..
बस जरा नादान है शायद कि अधूरे चाँद से बहल जाती है..
ठंडी हवाएं, सुर्ख सफ़क और भी जाने कितने वादे है..
साथ रहने की कसमें खाकर, रफ़ता रफ़ता ढल जाती है..
येशाम बिलकुलतुम जैसीहै, बातबात मेंबदल जातीहै..
कि कभी सुर्ख लाल, कभी जर्द सी, कभी हवाओं सी मचल जाती है..
कभी सुर्ख लाल, कभी जर्द सी, कभी हवाओं सी मचल जाती है..
इसकी शक्ल होती अगर, तो हूहू दिखती तुम जैसी,
एक पल में मगरूर है और एक ही पल में पिघल जाती है..
येशाम बिलकुलतुम जैसीहै, बातबात मेंबदल जातीहै..
कि मन भरता है तो सब दबाकर, गम हो जाती है अँधेरे में..
मन भरता है तो सब दबाकर, गम हो जाती है अँधेरे में..
लौट आती है कुछ दूर जाकर, जब दोबारा मेरी कमी से खल जाती है..
कितना लम्बा इंतज़ार होता है कि कुछ पल मिल जाये ये शाम मुझे?
मैं आगोश में भरने लगता हूँ और ये बेरहम तन्हा छोड़ फिसल जाती है..
येशाम बिलकुलतुम जैसीहै, बातबात मेंबदल जातीहै..
बस एक गिला, एक मलाल ताउम्र रहेगा शायद इसे..
कि बस एक गिला, एक मलाल ताउम्र रहेगा शायद इसे..
कि आती है रोज मिलने और बिना मिले निकल जाती है..
येशाम बिलकुलतुम जैसीहै, बातबात मेंबदल जातीहै..
इस शाम के बाद ये रात मुझे काटनी मुश्किल हो जाती है..
कि शाम के बाद ये रात मुझे काटनी मुश्किल हो जाती है..
डूबते सूरज में सारी खुशियां जैसे, धीमी आंच पे जल जाती है..
कह दो इसे कि या तो रुक जाये, या तो ना आया करे यूँ कुछ वक़्त के लिए,
मैं बिखरा बिखरा रह जाता हूँ और ये अगले ही दिन संभल जाती है..
येशाम बिलकुलतुम जैसीहै, बातबात मेंबदल जातीहै..



Woh Gairo ke Hona Seekh Gye by Jai Ojha

Hum unke the unhi ke rahe, 
Wo Na Jaane Kab gairo ke hona sikh gaye.

समय के साथ वक़्त के साथ किस तरह लोग बदल जाते है, उस पर यह शायरी है..

कि वो प्यार मोहब्बत के अकीदतमंद बड़ी जल्दी नफरत करना सीख गए..
कि वो प्यार मोहब्बत के अकीदतमंद बड़ी जल्दी नफरत करना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
हम तो नावाकिफ थे इस बात से कि वो अजनबी इस कदर हो जायेंगे..
नजर आते थे जो फ़ोन के हर गलियारें में, वो एक फोल्डर में सिमट कर रह जायेंगे..
हम तो नावाकिफ थे इस बात से कि वो इस रिश्ते को इतनी बेरहमी से तोड़ जायेंगे..
कि हमें सबसे पहले जवाब देने वाले हमारा Massage seen करके छोड़ जायेंगे..
हम शहरों शाम मुन्तजिर रहे उनके Massages जवाबों के,
और वो किसी दूसरी महफ़िल chat में Reply करना सीख गए..
जब बड़े दिनों बाद हम से पूछा हाल दिल उन्होंने,
तो भैय्या हम भी खुद्दार थे मुस्कुराके झूट बोलना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
हम नावाकिफ थे इस बात से कि लोग बदल भी जाया करते है..
वो आँखों में आँख डाल किये वादों से मुकर भी जाया करते है..
अरे सदायें (आवाज) आती थी जिनको हमारे सीने से,
वो अब किसी और से लिपटना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
कि सदायें आती थी जिनको हमारे सीने से,
वो अब किसी और से लिपटना सीख गए..
और दिल में आशियाँ बनाया था जिन्होंने गुजरते हुए,
अब सामने से नजरे चुराके चलना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
हम नावाकिफ थे इस बात से कि वो चेहरे को साफ़ और दिल को मैला रखते है..
कुछ लोग हसी ऐसे भी होते है जो खिलौनों से नहीं जज्बातों से खेला करते है..
अरे, हम आशिक़ नादान थे ताजिंदगी भीतर बाहर एक से रहे,
और वो कम्बख्त बेवफाई करते करते रोजाना जिल्द बदलना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
हमने उनके साथ अर्श (आकाश) के सपने देखे थे,
और जब हकीकत से हुए रूबरू तो खाई से उछलना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
हम नावाकिफ थे इस बात से कभी वक़्त हमारे इतना खिलाफ हो जायेगा..
कि उनकी मेहँदी में चुपके से बनाया वो अक्षर इस कदर साफ़ हो जायेगा..
हम उनके नाम का हर्फ़ हथेली पे नहीं दिल पे लिखना चाहते थे,
इसलिए दर्द होता रहा, हर्फ़ बनता रहा और हम दिल कुरेदना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
दर्द होता रहा, हर्फ़ बनता रहा और हम दिल कुरेदना सीख गए..
हम उनपे मरकर जीना चाहते थे मगर,
हुए अलहदा (दूर होना) उनसे जबसे जीते जी मरना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
हम नावाकिफ थे इस बात से कि वो हमारे बिना भी रह सकते थे..
जो फ़साने उन्होंने हमसे कहे थे, अब वो किसी और से भी कह सकते थे..
अरे हमने तो सोना समझ यूँ पकडे रखा था उनको,
और वो कम्बख्त धूल थे निकले कि बड़े इत्मीनान से फिसलना सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..
अरे हमने तो सोना समझ यूँ पकडे रखा था उनको,
और वो कम्बख्त धूल थे निकले कि बड़े इत्मीनान से फिसलना सीख गए..
हम कुछ देर जो दूर हुए क्या उनसे, वो हमारे बिना रहना ही सीख गए..
हमतो उनकेथे उन्हीके रहे, वो जाने कबगैरो केहोना सीखगए..

“इसरतेकतरा हैदरियां मेंफ़ना होजाना”
“दर्दका हदसे गुजरनाहै दवाहो जाना”


Ab Farq Nahi Padta Poetry by Jai Ojha Part – 2


Ek Waqt Tha Jab Tujhse Pyar Karta Tha,
Ab Tu Khud Mohabbat Ban Chali Aaye, Mujhe farq Nahin  Padta.


एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.
अब तू खुद मोहब्बत बन चली आये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब मैं तेरी परवाह करता था,
अब तो तू मेरी खातिर फ़ना भी हो जाये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब ना जाने तेरी ID के कितने चक्कर लगाता था.
तेरी हर पोस्ट तेरे हर स्टेटस के मायने निकाला करता था.
लेकिन अब सुन ले, अब सुन ले तू,
जब से मुसलसल खेला है Block और Unblock काखेलमेरेसाथ,
जा मुझे ता जिंदगी तेरी block list मेंरखले, मुझेफर्कनहींपड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
जा मुझे ता जिंदगी तेरी Block list मेंरखले, मुझेफर्कनहींपड़ता.
याद कर वो वक़्त जब तेरी DP देखकर ही,
मेरी धड़कने तेज हो जाया करती थी.
याद कर वो वक़्त जब तेरी Dp देखकर ही,
मेरी धड़कने तेज हो जाया करती थी.
लेकिन अब सुन ले, अब सुन ले तू,
अब किसी राह पर बिलकुल करीब से गुजर जाये, तो मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब तुझे तकलीफ में देखकर मेरी आँखे भर आया करती थी.
तुझे जो खंरोच भी जाये तो मेरी सांसे अटक जाया करती थी.
लेकिन अब सुन ले कि अब तो बेफिक्री का सुरूर है मुझपर कुछ ऐसा,
कि कम्बख्त तेरी सांसे भी थम जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
हाँ तेरा कहना भी वाजिब है कि इसे इश्क़ नहीं कहते
पर मेरी ये कविता सुनकर जो एक बेवफा को मेरी मोहब्बत पर शक हो जाये.
तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब तेरे इश्क़ कि मिशालें दिया करता था.
प्यार मोहब्बत के मायनो में बस कसमें वादे लिखा करता था.
अरे क्या कमाल हश्र किया है तूने वफ़ादाराने उल्फत का,
कि अब ये सारे का सारा शहर बेवफा हो जाये, मुझे फर्क नहीं पड़ता.
हाँ माना तेरी खूबसूरती मशहूर है दुनिया जहाँ में,
अगर इस कविता में तेरी बेवफाई के चर्चे हो जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब तेरी एक झलक पाने के लिए तरस जाया करता था.
तू जिस कोने से नजर आती थी, मैं बस वही ठहर जाया करता था.
अरे बिठा रखा था जो मुद्दतो से इन पलकों पे मैंने,
उसूलो से तो गिर गयी है, अब नजरो से गिर जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
बदसीरत हो गए हो तो फिजूल है ये खूबसूरती तुम्हारी,
फिर भले खुदा तुम्हे हसीं चेहरे बक्श जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब तुझे शामोंशहर बैठकर मनाया करता था.
गुस्ताखियाँ तेरी हुआ करती थी और दरख्वास्तें मैं किया करता था.
तेरे उस बेवजह रूठने को मनाया है जाने कितनी दफा मैंने,
कि भले ही पूरी की पूरी कायनात ख़फ़ा हो जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
अरे जो मेरी ना हो सकी वो उसकी क्या होगी,
अब भले कुछ वक़्त के लिए किसी गैर का दिल बहल जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब तेरी महक पाने को,
तू जहां से गुजरती थी, मैं वहां से गुजरता था.
जो हवा तुझे छूती है, वो मुझे छु जाये इस भरोसे चलता था.
लेकिन अब सुन ले कि अब तो सूफी हूँ खुशबु है खुद की सांसो में,
अब तो भले तू इस हवा में भी घुल जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
कि जब से मिट्टी होना पसंद आया है मुझको,
फिर भले महलो में आशियाँ हो जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.
खैर अब तुझसे नफरत है, मोहब्बत है, कोई गिला शिकवा नहीं है.
कुछ अनसुना है अनकहा है, बचा कोई सिलसिला नहीं है.
महज इन कविताओं में जिक्र बचा है तेरा और सुन ले,
कि इतना ताल्लुक भी मिट जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
राबदा हो बेवफाओ से तो बेहतर है, मेरे यार सब सुन लेना,
फिर रिश्ता भले काफ़िर दिलो से हो जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एकवक़्तथाजबतुझसेबेइंतहा प्यार करता था.


Ye Kuch Batein Hai Jo Bekar Hai by Jai Ojha


Aaj Mera Dil Jakhmi Hai, Lekin Sanson Mei Magruri Hai,
Ye kuch Baatein Hai Jo Bekar Hai Lekin Tujhe Batani Jaruri Hai.
आज मेरा दिल जख्मी हैलेकिन साँसों मे मगरूरी है,
बात उस दिन की हो रही है जिस दिन वो आशिक,
जो पूरी तरह Move On हो गया है Break up से , उसी बारे में बात है..
तो आज मेरा दिल जख्मी हैलेकिन साँसों मे मगरूरी है,
आज मेरा दिल जख्मी हैलेकिन साँसों मे मगरूरी है,
ये कुछ बातें हैं जो बेकार हैलेकिन तुझे बतानी जरूरी है..
आज तूने नहीं पूछा हाल मेरा,
आज तूने नहीं पूछा हाल मेरालेकिन तबियत मेरी अच्छी है..
मुस्कान जरा सी झूठी हैलेकिन ये बाते बिल्कुल सच्ची है..
आज तूने नहीं पूछाफिर भी मैनें खाना खाया है..
आज तूने नहीं पूछा फिर भी मैनें खाना खाया है..
आज सुबह तेरा Call नहीं थामेरी मां ने मुझे जगाया है..
आज सुबह तेरा Call नहीं था , मेरी मां ने मुझे जगाया है..
शुक्रिया तेरा कि आज राजा बेटा हुआ हूं फिर से,
इन Babu, Janu , Sona से दूरी है..
ये कुछ बातें हैं जो बेकार हैलेकिन तुझे बतानी जरूरी है..
आज बड़े दिनो बाद Whatsapp पे DP खुद की लगाई है..
क्या बताऊँ तेरी सारी Photos Delete करकेक्या गज़ब की नींद आई है..
आज तेरे होने या  होने का कोई असर नहीं होता है,
आज जा तू चौबीस घन्टें ऑनलाइन रह लेमुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है..
अरे बहुत गुजारिश कर ली तुझसे,
अरे बहुत गुजारिश कर ली तुझसेअब सख्ती अपनी भी पूरी है..
ये कुछ बाते हैं जो बेकार हैलेकिन तुझे बतानी जरूरी है..
कि आज तुझसे नहीं मिला मैंमगर मुलाकात खुद से हो गई है..
कि आज तुझसे नहीं मिला मैं मगर मुलाकात खुद से हो गई है..
तेरे बिना जी नहीं सकताये गलतफहमी दूर हो गई हैं..
तेरे बिना जी नहीं सकताये गलतफहमी दूर हो गई हैं..
आज उन पुराने Conversations को मैंने फिर से नहीं टटोला है..
आज उन पुराने Conversations को , मैंने फिर से नहीं टटोला है..
अब तू ही पढ़ उनकोकि फक्र होगा तुझे कि तूने कितनी खूबसूरती से झूठ बोला है..
अरे आज तन्हा हूं तो क्या हुआइस तन्हाई से यारी है..
ये कुछ बातें हैं जो बेकार हैलेकिन तुझे बतानी जरूरी है..
हां Phone से ले के ज़हन तक हर जगह से तुझे निकाला है..
हां Phone से लेके ज़हन तक हर जगह से तुझे निकाला है..
रिहा सा हो गया हूं जब से तेरा Number Delete कर डाला है,
मैं डरता था जिस कल सेउसे आंखों में आंखे डाल देख आया हूं..
मैं डरता था जिस कल सेउसे आंखों में आंखे डाल देख आया हूं..
तेरे लिए उन खतों को उन फूलो को खुशबू समेत फेंक आया हूं..
आज तो जैसे जीत गया हूं,
वरना बता कि सच्चे आशिक नेकभी बाजी हारी है..
ये कुछ बातें हैं जो बेकार हैलेकिन तुझे बतानी जरूरी है..
आज तेरे घर के आगे से नहीं निकलालेकिन बहुत दूर तक जा पहुंचा हूं..
फिरता था कभी गलीगलीअब आसमान में उड़ता हूं..
फिरता था कभी गलीगली अब आसमान में उड़ता हूं..
मायूसी थी छायी जहां पर आज वहां मुस्कान फिर से वहां पर लौट कर आयी है.
मायूसी थी छायी जहां पर आज वहां मुस्कान फिर से वहां पर लौट कर आयी है.
देख पलके भी कितनी खुश हैंमुद्दतों बाद गालों से जो टकराई हैं,
देख आज मैं अकेला हूं और पूरा हूंतू किसी के साथ होकर भी अधूरी हैं..
ये कुछ बातें हैं जो बेकार हैलेकिन तुझे बतानी जरूरी है..
आज उठा हूं बिस्तर से औरआईने में शक् खुद की देख डाली है..
बाल बिखरें हैं दाढ़ी बड़ी है और आंखे जरा सी काली हैं,
आज उठा हूं बिस्तर से औरआईने में शक् खुद की देख डाली है..
बाल बिखरें हैं दाढ़ी बड़ी है और आंखे जरा सी काली हैं..
आज तो जैसे आंखों का पानीखत् सा हो गया है..
टूट कर जो जुड़ा है दिलनया जन् सा हो गया है..
आज तो जैसे आंखों का पानीखत् सा हो गया है..
टूट कर जो जुड़ा है दिल नया जन् सा हो गया है..
आज सूफियत हैं रुख पे आंखों में अजब सी नूरी हैं..
ये कुछ बातें हैं जो बेकार हैलेकिन तुझे बतानी जरूरी है।


Toh Pata Chale Poetry by Jai Ojha in Hindi


Jo Kabhi Tum Mohabbat Karo To  Pata Chale,
Siddat Se Kisi Ko Chaho To  Pata Chale,
Yun Ishq To Tumne Bhi Kiya Hoga Kai Dafa,
Lekin Kabhi Tut ke Chaho Aur Bikhar Jao To Pata Chale.
जो कभी तुम मोहब्बत करो तो पता चले..
शिद्दत से किसी को चाहो तो पता चले..
यूँ इश्क़ तो किया होगा तुमने भी कई दफा,
लेकिन कभी टूट के चाहो और बिखर जाओ तो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
क्या याद है तुमको हमारी मोहब्बत का वो जमाना..
वो सर्द रातों में रजाई में घुसकर मेरा तुमसे घंटो बतियाना..
अरे कितने झूठे थे तुम्हारे वो वादे तुम्हारे वो massages..
जो वो chat पढ़के दोबारा आके मुझसे नजरे मिला सकोतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
जो वो chat पढ़के दोबारा आके मुझसे नजरे मिला सकोतो पता चले..
और जो love you forever लिख दिया करती थी तुम हमेशा आखिर में,
कभी फुर्सत में आकर उस forever शब्द के मायने मुझे समझा जाओतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
खैर अब तो मेरे Call logs में भी कहाँ नजर आती हो तुम..
अब तो मेरे call logs में भी कहाँ नजर आती हो तुम..
वो सुबह चार बजे तक चलने वाला फ़साना शायद रकीब को ही सुनाती हो तुम..
और बातें तो वो भी करता होगा बेहिसाब तुमसे,
लेकिन कभी सर्द रात में फ़ोन चार्ज पे लगा के तुमसे बतिया सकेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
और जो कभी तलब हो तलाश हो मेरी तरह उसे भी तुम्हारी अगर,
तो Block हो के facebook पे बार बार तुम्हारा नाम डाल के सर्च करता रहेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
खैर मैं जानता हूँ वो भी नहीं देख पाता होगा तुम्हें जख्मी होते हुए,
अरे आखिर कोई कैसे देख ले तुम्हारे कोमल बदन पर चोट लगते हुए..
अरे यूँ मरहम तो वो भी बना होगा तुम्हारे घावों पे,
अरे यूँ मरहम तो वो भी बना होगा तुम्हारे घावों पे,
लेकिन कभी तुम्हारी अंगुली कट जाने पर अपनी जीभ तले दबा सकेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
लेकिन कभी तुम्हारी अंगुली कट जाने पर अपनी जीभ तले दबा सकेतो पता चले..
और जिंदगी तो उसने भी माना होगा तुम्हें,
लेकिन कभी खुदा मान के इबादत कर सकेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
खैर अब तो जाती हो तुम उसके संग दो जहानों में,
घूमती हो उसका हाथ थामे शहर शहर ठिकानो में..
लेकिन है हिम्मत तुम में अगर तो जहां किया था मुझसे ताउम्र साथ निभाने का वादा,
कभी उस वीराने हो आओ तो पता चले..
हमारी मोहब्बत को गुमनाम तो कर दिया है तुमने हर जगह से,
लेकिन वो दरख्त जहाँ पे गुदा है नाम मेरा और तुम्हारा,
जाओ और उसे बेनाम कर आओतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
खैर अब तो उसके संग कई रातें भी बिताई होगी तुमने..
सिरहाने उसके बैठकर वो कहानियाँ भी सुनाई होगी तुमने..
सिरहाने उसके बैठकर वो कहानियाँ भी सुनाई होगी तुमने..
सुबह की चाय भी जो पीती हो उसके साथ अक्सर,
और बची हो हलक में थोड़ी सी भी वफ़ा अगर,
सुबह की चाय भी जो पीती हो उसके साथ अक्सर,
और बची हो हलक में थोड़ी सी भी वफ़ा अगर,
तो वो जो मेरे मुँह लगी कॉफ़ी जो मेरे साथ बैठकर पिया करती थी,
उस कॉफ़ी का एक घूंट भी अपने गले से उतारकर दिखा सको तोपता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
उस कॉफ़ी का एक घूंट भी अपने गले से उतारकर दिखा सको तोपता चले..
और जो कभी तुम जानना चाहो कि गम  तन्हाई क्या है,
और जो कभी तुम जानना चाहो कि गम  तन्हाई क्या है,
तो उस cafe में जैसे मैं जाता हूँ अकेले जाके एक शाम बिता आओतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
खैर तुम्हें तो शायद लगता होगा कि बर्बाद हो गया हूँ मैं,
लेकिन नहीं इस गम में रहकर हर गम से आजाद हो गया हूँ मैं..
अरे कितना चैन और सुकून है उस नींद में,
कितना चैन और सुकून है उस नींद में..
जो वो तकिया आंसुओ से गीला करके फिर पलट के उस पे सो सकोतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले


Baap Ka Maal Samjha Hai Kya?