Main Har Bewafa Shaks Ki Aukaat Likhti Hun by Goonj Chand

Main Har Bewafa Shaks Ki Aukaat Likhti Hun by Goonj Chand

हाथ में दर्द लिए गमो के पन्ने बिछा उनपे अपने जज़्बात लिखती हूँ
जी हाँ मैं वही हूँ जो हर बेवफा शख्स की औकात लिखती हूँ

जब वफ़ा करने का दम नहीं तो कियूं किसी की ज़िन्दगी में जाते हो…
और तो और ज़िन्दगी भर साथ निभाने की झूठी कसमें भी खाते हो…
तुम जैसे झूठे लोगो को ही में सरे आम बे नक़ाब करती हूँ…
जी हाँ मैं वही हूँ जो हर बेवफा शख्स की औकात लिखती हूँ

अकेले में इतना प्यार जिसकी कोई हद नहीं…
और महफ़िल में हम जस्ट फ्रेंड है और कुछ नहीं…
लोगो की इन्ही सब बातो से में उनका डबल फेस भी भाप लेती हूँ…
जी हाँ मैं वही हूँ जो हर बेवफा शख्स की औकात लिखती हूँ

तुम्हे क्या लगता है बेवफाई करने की कोई सजा नहीं होती…
वक़्त आने पर इन जैसे लोगो के पास हसने की कोई वजह नहीं होती…
इसलिए हर गलत चीज़ के खिलाफ में अपनी आवाज़ रखती हूँ…
जी हाँ मैं वही हूँ जो हर बेवफा शख्स की औकात लिखती हूँ

हाथ में दर्द लिए गमो के पन्ने बिछा उनपे अपने जज़्बात लिखती हूँ
जी हाँ मैं वही हूँ जो हर बेवफा शख्स की औकात लिखती हूँ

Mere Kuch Sawal Hai by Zakir Khan

Mere Kuch Sawal Hai Jo Sirf Qayamat Ke Rozz Puchunga Tumse..
Kyonki Uske Pehle Tumhari Aur Meri baat Ho,
Is Layak Nahin Ho Tum..

मेरे कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूंगा तुमसे,
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके,
इस लायक नहीं हो तुम।

मैं जानना चाहता हूँ,
क्या रकीब के साथ भी चलते हुए शाम को,
यूं ही बेखयाली में उसके साथ भी हाथ टकरा जाता है तुम्हारा…

क्या अपनी छोटी ऊँगली से उसका भी हाथ थाम लिया करती हो?
क्या वैसे ही जैसे मेरा थामा करती थीं…

क्या बता दीं बचपन की सारी कहानियां तुमने उसको,
जैसे मुझको रात रात भर बैठ कर सुनाई थी तुमने..

क्या तुमने बताया उसको कि पांच के आगे की
हिंदी की गिनती आती नहीं तुमको…

वो सारी तस्वीरें जो तुम्हारे पापा के साथ,
तुम्हारे भाई के साथ की थी, जिनमे तुम बड़ी प्यारी लगीं,
क्या उसे भी दिखा दी तुमने…

ये कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूंगा तुमसे,
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके,
इस लायक नहीं हो तुम।

मैं पूंछना चाहता हूँ कि
क्या वो भी जब घर छोड़ने आता है तुमको,
तो सीढ़ियों पर आँखें मीच कर क्या मेरी ही तरह
उसके भी सामने माथा आगे कर देती हो तुम वैसे ही,
जैसे मेरे सामने किया करतीं थीं..

सर्द रातों में, बंद कमरों में क्या वो भी मेरी तरह
तुम्हारी नंगी पीठ पर अपनी उँगलियों से
हर्फ़ दर हर्फ़ खुद का नाम गोदता है,
और क्या तुम भी अक्षर ब अक्षर पहचानने की कोशिश करती हो,
जैसे मेरे साथ किया करती थीं..

मेरे कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत के रोज़ पूछूंगा तुमसे,
क्योंकि उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके,
इस लायक नहीं हो तुम।

Wo Ladko ke Dil Se Game Khelti Rahi by Goonj Chand

Kitni Sacchai Se Wo Humse Jhooth Bolti Rahi…
Or Mere Sath Sath Kisi Or Ke Dil Se Bhi Wo Game Khelti Rahi…

कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
और मेरे साथ साथ किसी और के दिल से भी वो गेम खेलती रही..

जब मेरे साथ होती तो उसे दोस्त बताया करती थी,
और हो उसके साथ तो ये टैग वो मुझे चिपकाया करती थी..
ये दोस्ती और प्यार के चक्कर में वो एक अच्छा स्टेटस खोजती रही..
और बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..

शॉपिंग करनी हो तो मेरे साथ जाती थी..
और लॉन्ग ड्राइव पे जाना हो तो उसे कॉल लगाती थी..
साला हम दोनों की जिंदगी तो मॉल से लेकर सड़कों में उलझती रही,
और कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..

रूठ जाऊं कभी तो पास आकर वो मनाती भी थी..
और उससे मिलने के चक्कर में मुझसे दूर जाती भी थी..
चंद पैसो के लालच में वो हम दोनों की जिंदगी से खेलती रही,
और भाई बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..

झूठ ही तो था आखिर नहीं छुप पाया..
और डर गयी थी वो उस दिन जब उसने हम दोनों को साथ खड़ा पाया..
तब भी वो रो रोकर कि मैं तुम दोनों से प्यार करती हूँ, भाई यही कहती रही,
और बड़ी सच्चाई से वो उस दिन भी झूठ बोलती रही..

सुना है आजकल कुछ नए लड़के आये है उसकी लाइफ में..
वैसे देखा तो मैंने भी था उसे किसी की बाइक में..
मतलब हमारे बाद भी वो बड़ी शिद्दत से लड़को को खोजती रही,
और भाई सच में, बड़ी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..

कितनी सच्चाई से वो हमसे झूठ बोलती रही..
और मेरे साथ साथ किसी और के दिल से भी वो गेम खेलती रही..

                           

Ek Ghav Purana Baki Hai by Goonj Chand

Ek Ghav Purana Baki Hai by Goonj Chand

एक घाव पुराना बाकी हैं, एक दर्द पुराना बाकी हैं..
तेरे दिए गए एक एक दर्द का हिसाब चुकाना बाकी हैं …

आ बैठ जरा हिसाब करे, कुछ साल पुराने याद करे..
एक वक़्त ऐसा भी होता था, जब तू सिर्फ मुझ पर मरता था …
मेरी खुशी के खातिर बेमतलब सब से लड़ता था..
स्कूल से लेकर घर तक अपनी बाइक से फॉलो करता था..
क्या सच्चा था वो प्यार तेरा या सिर्फ दिखावा करता था..
क्यू दिया था धोखा तूने मुझे, इसका जबाब अभी भी बाकी हैं..
तेरे दिए गए एक एक दर्द का हिसाब चुकाना बाकी हैं..
एक घाव पुराना बाकी है, एक दर्द पुराना बाकी हैं..
तेरे दिए गए एक एक दर्द का हिसाब चुकाना बाकी हैं..

जब जख्म किसी को देता होगा, तब याद मेरी ही आती होगी..
ओर मन ही मन खुद पर तुझ को थोड़ी शर्म तो आती होगी…
खुद पर बीती तब तुझको मेरा दर्द समझ में आया हैं..
अक्सर गैरों के खातिर तूने मुझको ठुकराया हैं..
अब किस हक से तू कहता हैं कि फिर से वापिस आ जाओ..
पर बीती बातें भूलकर तुम पहली जैसी हो जाओ…
जो किया था तूने साथ मेरे वो सबको बताना बाकी…
तू ही है गुनेहगार मेरा यह इल्ज़ाम लगाना बाकी है…
तेरे दिए गए एक एक दर्द का हिसाब चुकाना बाकी हैं..
एक घाव पुराना बाकी है, एक दर्द पुराना बाकी हैं..
तेरे दिए गए एक एक दर्द का हिसाब चुकाना बाकी हैं..

Jiske Liye Mujhe छोड़ा Hai Tum Uske To Ho Jaate by Goonj Chand

Tu Khus Hai Apni Zindagi Me, Yahi Kehkar Hum Khud Ko Behlate..
Or Jiske Liye Tumne Mujhe छोड़ा Hai, Tum Uske To Ho Jaate..

तू खुश है अपनी जिंदगी में, यही कहकर हम खुद को बहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..

माना की इत्तेफाक से मिल गए थे तुम उस दिन रस्ते पर
पर जब लिफ्ट दे ही दी थी तो जनाब मंजिल तक तो छोड़ आते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..

सौ बार भी शुक्रिया करूँ तेरा तो काम होगा..
जो तुम बेवफाई ना करते तो हम शायर कैसे कहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..

तुझे भूलना आसान हो जाता मेरे लिए
जब हाथ उठा ही दिया था तो उसे मेरे गालो तक तो ले आते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..

सब पूछते है मुझसे कि मैं नफरत, बेवफाई या दिल टूटने पर ही क्यों लिखती हूँ..
प्यार पर भी लिखती मैं, अगर तुम ये प्यार निभा जाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..

तू खुश है अपनी जिंदगी में, यही कहकर हम खुद को बहलाते..
और जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा, तुम उसके तो हो जाते..

 
 

Aaj Achanak Use Meri Yaad Aayi Hai by Goonj Chand

Aaj Achanak Use Meri Yaad Aayi Hai..
Lagta Hai Fir Koi Musibat Uske Paas Aayi Hai..

आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
लगता है फिर कोई मुसीबत उसके पास आयी है..

यूँ तो याद नहीं करता वो बेवजह मुझे कभी..
कोई तो वजह है जो उसे मेरे पास लायी है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..

ठुकराया था मेरा प्यार उसने किसी गैर के लिए..
आज फिर किस्मत उसे उसी मोड़ पर लायी है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..

अब मैं क्या इलाज करूँ उसके इस दर्द का भला
मैंने तो खुद अपने लिए इसकी दवा मंगवाई है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..

अब क्या फायदा तेरे वापिस आने का भला..
भला जिस्म से निकलकर रूह कभी वापस आयी है..
आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..

आज अचानक उसे मेरी याद आयी है..
लगता है फिर कोई मुसीबत उसके पास आयी है..

 
 

Meri Kadar Tujhe Us Din Samajh Aayegi by Goonj Chand

Meri Kadar Tujhe Us Din Samajh Aayegi…
Jis Din Tere Jaisi Koi Tujhe Mil Jayegi..

मेरी कदर तुझे उस दिन समझ आएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

जो होगी फ्री पूरा पूरा दिन पर फिर भी,
तुझे Busy होने का MSG चिपगायेगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

जायेगा जब भी तू कुछ वक़्त बिताने उसके साथ,
तब तुझे Fully Ignore कर वो अपना सारा टाइम अपने फ़ोन पर बिताएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

भले ही 24 hours अपडेट रहेगी वो Whatsapp पर,
पर तेरे साथ अपनी DP कभी नहीं लगाएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

कभी कभी कर भी लेगी प्यार भरी 2-4 बातें तुझसे,
पर तेरे बीमार होने पर वो सारी रात तेरे सिर के पास नहीं बिताएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

ले आएगी बहार से तेरी पसंद का खाना भी कभी कभी,
पर रात के 2 बजे उठकर तेरे लिए आलू के पराठें नहीं बनाएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

मिलवाएगी अपने दोस्तों से भी बेशक वो तुझे,
पर अपना Just Friend कहकर वो तुझे Introduce करवाएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

मेरी कदर तुझे उस दिन समझ आएगी..
जिस दिन तेरे जैसी कोई तुझे मिल जाएगी..

 
 

Ye Shaam Bilkul Tum Jaisi Hai by Jai Ojha

Din se milkar aati hai, Raat ke Aagosh me ghul Jati hai..
Ye Shaam Bilkul Tum Jaisi hai, Baat Baat me badal Jati hai..

बहुत से Writers हुए है इस दुनिया में, बहुत से शायर, बहुत से प्रेमी या बहुत से Artist, जिन्होंने अपनी अपनी गर्लफ्रेंड की तुलना, अपनी माशूका की तुलना अलग अलग चीजों से की है. जैसे किसी ने रात से तुलना की है, किसी ने चाँद से तुलना की है, किसी ने शबनम से तुलना की है, किसी ने फूल से तुलना की है, तो ऐसे Comparisons किये गए है और बहुत कुछ लिखा गया है. यहां पे जो Writer है इसकी जो गर्लफ्रेंड है वो इसकी जिंदगी में आती है और बार बार चली जाती है. बार बार आती है और बार बार चली जाती है तो इस वजह से इसके जीवन में एक बिखराव पैदा हो गया है. उस बिखराव के through ये Poetry निकलती है, तो वो लिखता है

कि दिन से मिलकर आती है, रात के आगोश में घुल जाती है..
दिन से मिलकर आती है, रात के आगोश में घुल जाती है..
ये शाम बिलकुल तुम जैसी है, बात बात में बदल जाती है..

खूबसूरत है, शीतल है, आतुर भी है तुम जैसी,
खूबसूरत है, शीतल है, आतुर भी है तुम जैसी..
बस जरा नादान है शायद कि अधूरे चाँद से बहल जाती है..
ठंडी हवाएं, सुर्ख सफ़क और भी जाने कितने वादे है..
साथ रहने की कसमें खाकर, रफ़ता रफ़ता ढल जाती है..
ये शाम बिलकुल तुम जैसी है, बात बात में बदल जाती है..

कि कभी सुर्ख लाल, कभी जर्द सी, कभी हवाओं सी मचल जाती है..
कभी सुर्ख लाल, कभी जर्द सी, कभी हवाओं सी मचल जाती है..
इसकी शक्ल होती अगर, तो हूहू दिखती तुम जैसी,
एक पल में मगरूर है और एक ही पल में पिघल जाती है..
ये शाम बिलकुल तुम जैसी है, बात बात में बदल जाती है..

कि मन भरता है तो सब दबाकर, गम हो जाती है अँधेरे में..
मन भरता है तो सब दबाकर, गम हो जाती है अँधेरे में..
लौट आती है कुछ दूर जाकर, जब दोबारा मेरी कमी से खल जाती है..
कितना लम्बा इंतज़ार होता है कि कुछ पल मिल जाये ये शाम मुझे?
मैं आगोश में भरने लगता हूँ और ये बेरहम तन्हा छोड़ फिसल जाती है..
ये शाम बिलकुल तुम जैसी है, बात बात में बदल जाती है..
बस एक गिला, एक मलाल ताउम्र रहेगा शायद इसे..
कि बस एक गिला, एक मलाल ताउम्र रहेगा शायद इसे..
कि आती है रोज मिलने और बिना मिले निकल जाती है..
ये शाम बिलकुल तुम जैसी है, बात बात में बदल जाती है..

इस शाम के बाद ये रात मुझे काटनी मुश्किल हो जाती है..
कि शाम के बाद ये रात मुझे काटनी मुश्किल हो जाती है..
डूबते सूरज में सारी खुशियां जैसे, धीमी आंच पे जल जाती है..
कह दो इसे कि या तो रुक जाये, या तो ना आया करे यूँ कुछ वक़्त के लिए,
मैं बिखरा बिखरा रह जाता हूँ और ये अगले ही दिन संभल जाती है..
ये शाम बिलकुल तुम जैसी है, बात बात में बदल जाती है..

 


Woh Gairo ke Hona Seekh Gye by Jai Ojha

Hum unke the unhi ke rahe, 
Wo Na Jaane Kab gairo ke hona sikh gaye.

समय के साथ वक़्त के साथ किस तरह लोग बदल जाते है, उस पर यह शायरी है..
कि वो प्यार मोहब्बत के अकीदतमंद बड़ी जल्दी नफरत करना सीख गए..
कि वो प्यार मोहब्बत के अकीदतमंद बड़ी जल्दी नफरत करना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..

हम तो नावाकिफ थे इस बात से कि वो अजनबी इस कदर हो जायेंगे..
नजर आते थे जो फ़ोन के हर गलियारें में, वो एक फोल्डर में सिमट कर रह जायेंगे..
हम तो नावाकिफ थे इस बात से कि वो इस रिश्ते को इतनी बेरहमी से तोड़ जायेंगे..
कि हमें सबसे पहले जवाब देने वाले हमारा Massage seen करके छोड़ जायेंगे..
हम शहरों शाम मुन्तजिर रहे उनके Massages जवाबों के,
और वो किसी दूसरी महफ़िल chat में Reply करना सीख गए..
जब बड़े दिनों बाद हम से पूछा हाल दिल उन्होंने,
तो भैय्या हम भी खुद्दार थे मुस्कुराके झूट बोलना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..

हम नावाकिफ थे इस बात से कि लोग बदल भी जाया करते है..
वो आँखों में आँख डाल किये वादों से मुकर भी जाया करते है..
अरे सदायें (आवाज) आती थी जिनको हमारे सीने से,
वो अब किसी और से लिपटना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..
कि सदायें आती थी जिनको हमारे सीने से,
वो अब किसी और से लिपटना सीख गए..
और दिल में आशियाँ बनाया था जिन्होंने गुजरते हुए,
अब सामने से नजरे चुराके चलना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..

हम नावाकिफ थे इस बात से कि वो चेहरे को साफ़ और दिल को मैला रखते है..
कुछ लोग हसी ऐसे भी होते है जो खिलौनों से नहीं जज्बातों से खेला करते है..
अरे, हम आशिक़ नादान थे ताजिंदगी भीतर बाहर एक से रहे,
और वो कम्बख्त बेवफाई करते करते रोजाना जिल्द बदलना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..
हमने उनके साथ अर्श (आकाश) के सपने देखे थे,
और जब हकीकत से हुए रूबरू तो खाई से उछलना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..

हम नावाकिफ थे इस बात से कभी वक़्त हमारे इतना खिलाफ हो जायेगा..
कि उनकी मेहँदी में चुपके से बनाया वो अक्षर इस कदर साफ़ हो जायेगा..
हम उनके नाम का हर्फ़ हथेली पे नहीं दिल पे लिखना चाहते थे,
इसलिए दर्द होता रहा, हर्फ़ बनता रहा और हम दिल कुरेदना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..
दर्द होता रहा, हर्फ़ बनता रहा और हम दिल कुरेदना सीख गए..
हम उनपे मरकर जीना चाहते थे मगर,
हुए अलहदा (दूर होना) उनसे जबसे जीते जी मरना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..

हम नावाकिफ थे इस बात से कि वो हमारे बिना भी रह सकते थे..
जो फ़साने उन्होंने हमसे कहे थे, अब वो किसी और से भी कह सकते थे..
अरे हमने तो सोना समझ यूँ पकडे रखा था उनको,
और वो कम्बख्त धूल थे निकले कि बड़े इत्मीनान से फिसलना सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..
अरे हमने तो सोना समझ यूँ पकडे रखा था उनको,
और वो कम्बख्त धूल थे निकले कि बड़े इत्मीनान से फिसलना सीख गए..
हम कुछ देर जो दूर हुए क्या उनसे, वो हमारे बिना रहना ही सीख गए..
हम तो उनके थे उन्ही के रहे, वो जाने कब गैरो के होना सीख गए..

 
“इसरते कतरा है दरियां में फ़ना हो जाना”
“दर्दका हद से गुजरना है दवा हो जाना”

 
 

Ab Farq Nahi Padta Poetry by Jai Ojha Part – 2

Ek Waqt Tha Jab Tujhse Pyar Karta Tha,
Ab Tu Khud Mohabbat Ban Chali Aaye, Mujhe farq Nahin  Padta.

एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.
अब तू खुद मोहब्बत बन चली आये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब मैं तेरी परवाह करता था,
अब तो तू मेरी खातिर फ़ना भी हो जाये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब ना जाने तेरी ID के कितने चक्कर लगाता था.
तेरी हर पोस्ट तेरे हर स्टेटस के मायने निकाला करता था.
लेकिन अब सुन ले, अब सुन ले तू,
जब से मुसलसल खेला है Block और Unblock का खेल मेरे साथ,
जा मुझे ता जिंदगी तेरी block list में रखले, मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.
जा मुझे ता जिंदगी तेरी Block list में रखले, मुझे फर्क नहीं पड़ता.
याद कर वो वक़्त जब तेरी DP देखकर ही,
मेरी धड़कने तेज हो जाया करती थी.
याद कर वो वक़्त जब तेरी Dp देखकर ही,
मेरी धड़कने तेज हो जाया करती थी.
लेकिन अब सुन ले, अब सुन ले तू,
अब किसी राह पर बिलकुल करीब से गुजर जाये, तो मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे तकलीफ में देखकर मेरी आँखे भर आया करती थी.
तुझे जो खंरोच भी जाये तो मेरी सांसे अटक जाया करती थी.
लेकिन अब सुन ले कि अब तो बेफिक्री का सुरूर है मुझपर कुछ ऐसा,
कि कम्बख्त तेरी सांसे भी थम जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
हाँ तेरा कहना भी वाजिब है कि इसे इश्क़ नहीं कहते
पर मेरी ये कविता सुनकर जो एक बेवफा को मेरी मोहब्बत पर शक हो जाये.
तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तेरे इश्क़ कि मिशालें दिया करता था.
प्यार मोहब्बत के मायनो में बस कसमें वादे लिखा करता था.
अरे क्या कमाल हश्र किया है तूने वफ़ादाराने उल्फत का,
कि अब ये सारे का सारा शहर बेवफा हो जाये, मुझे फर्क नहीं पड़ता.
हाँ माना तेरी खूबसूरती मशहूर है दुनिया जहाँ में,
अगर इस कविता में तेरी बेवफाई के चर्चे हो जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तेरी एक झलक पाने के लिए तरस जाया करता था.
तू जिस कोने से नजर आती थी, मैं बस वही ठहर जाया करता था.
अरे बिठा रखा था जो मुद्दतो से इन पलकों पे मैंने,
उसूलो से तो गिर गयी है, अब नजरो से गिर जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
बदसीरत हो गए हो तो फिजूल है ये खूबसूरती तुम्हारी,
फिर भले खुदा तुम्हे हसीं चेहरे बक्श जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे शामोंशहर बैठकर मनाया करता था.
गुस्ताखियाँ तेरी हुआ करती थी और दरख्वास्तें मैं किया करता था.
तेरे उस बेवजह रूठने को मनाया है जाने कितनी दफा मैंने,
कि भले ही पूरी की पूरी कायनात ख़फ़ा हो जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
अरे जो मेरी ना हो सकी वो उसकी क्या होगी,
अब भले कुछ वक़्त के लिए किसी गैर का दिल बहल जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तेरी महक पाने को,
तू जहां से गुजरती थी, मैं वहां से गुजरता था.
जो हवा तुझे छूती है, वो मुझे छु जाये इस भरोसे चलता था.
लेकिन अब सुन ले कि अब तो सूफी हूँ खुशबु है खुद की सांसो में,
अब तो भले तू इस हवा में भी घुल जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
कि जब से मिट्टी होना पसंद आया है मुझको,
फिर भले महलो में आशियाँ हो जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

खैर अब तुझसे नफरत है, मोहब्बत है, कोई गिला शिकवा नहीं है.
कुछ अनसुना है अनकहा है, बचा कोई सिलसिला नहीं है.
महज इन कविताओं में जिक्र बचा है तेरा और सुन ले,
कि इतना ताल्लुक भी मिट जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
राबदा हो बेवफाओ से तो बेहतर है, मेरे यार सब सुन लेना,
फिर रिश्ता भले काफ़िर दिलो से हो जाये तो फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

 

 

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