Toh Pata Chale Poetry by Jai Ojha in Hindi

Jo Kabhi Tum Mohabbat Karo To  Pata Chale,
Siddat Se Kisi Ko Chaho To  Pata Chale,
Yun Ishq To Tumne Bhi Kiya Hoga Kai Dafa,
Lekin Kabhi Tut ke Chaho Aur Bikhar Jao To Pata Chale.

जो कभी तुम मोहब्बत करो तो पता चले..
शिद्दत से किसी को चाहो तो पता चले..
यूँ इश्क़ तो किया होगा तुमने भी कई दफा,
लेकिन कभी टूट के चाहो और बिखर जाओ तो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले

क्या याद है तुमको हमारी मोहब्बत का वो जमाना..
वो सर्द रातों में रजाई में घुसकर मेरा तुमसे घंटो बतियाना..
अरे कितने झूठे थे तुम्हारे वो वादे तुम्हारे वो massages..
जो वो chat पढ़के दोबारा आके मुझसे नजरे मिला सकोतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
जो वो chat पढ़के दोबारा आके मुझसे नजरे मिला सकोतो पता चले..
और जो love you forever लिख दिया करती थी तुम हमेशा आखिर में,
कभी फुर्सत में आकर उस forever शब्द के मायने मुझे समझा जाओतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले

खैर अब तो मेरे Call logs में भी कहाँ नजर आती हो तुम..
अब तो मेरे call logs में भी कहाँ नजर आती हो तुम..
वो सुबह चार बजे तक चलने वाला फ़साना शायद रकीब को ही सुनाती हो तुम..
और बातें तो वो भी करता होगा बेहिसाब तुमसे,
लेकिन कभी सर्द रात में फ़ोन चार्ज पे लगा के तुमसे बतिया सकेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
और जो कभी तलब हो तलाश हो मेरी तरह उसे भी तुम्हारी अगर,
तो Block हो के facebook पे बार बार तुम्हारा नाम डाल के सर्च करता रहेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले

खैर मैं जानता हूँ वो भी नहीं देख पाता होगा तुम्हें जख्मी होते हुए,
अरे आखिर कोई कैसे देख ले तुम्हारे कोमल बदन पर चोट लगते हुए..
अरे यूँ मरहम तो वो भी बना होगा तुम्हारे घावों पे,
अरे यूँ मरहम तो वो भी बना होगा तुम्हारे घावों पे,
लेकिन कभी तुम्हारी अंगुली कट जाने पर अपनी जीभ तले दबा सकेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
लेकिन कभी तुम्हारी अंगुली कट जाने पर अपनी जीभ तले दबा सकेतो पता चले..
और जिंदगी तो उसने भी माना होगा तुम्हें,
लेकिन कभी खुदा मान के इबादत कर सकेतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले

खैर अब तो जाती हो तुम उसके संग दो जहानों में,
घूमती हो उसका हाथ थामे शहर शहर ठिकानो में..
लेकिन है हिम्मत तुम में अगर तो जहां किया था मुझसे ताउम्र साथ निभाने का वादा,
कभी उस वीराने हो आओ तो पता चले..
हमारी मोहब्बत को गुमनाम तो कर दिया है तुमने हर जगह से,
लेकिन वो दरख्त जहाँ पे गुदा है नाम मेरा और तुम्हारा,
जाओ और उसे बेनाम कर आओतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले

खैर अब तो उसके संग कई रातें भी बिताई होगी तुमने..
सिरहाने उसके बैठकर वो कहानियाँ भी सुनाई होगी तुमने..
सिरहाने उसके बैठकर वो कहानियाँ भी सुनाई होगी तुमने..
सुबह की चाय भी जो पीती हो उसके साथ अक्सर,
और बची हो हलक में थोड़ी सी भी वफ़ा अगर,
सुबह की चाय भी जो पीती हो उसके साथ अक्सर,
और बची हो हलक में थोड़ी सी भी वफ़ा अगर,
तो वो जो मेरे मुँह लगी कॉफ़ी जो मेरे साथ बैठकर पिया करती थी,
उस कॉफ़ी का एक घूंट भी अपने गले से उतारकर दिखा सको तोपता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले
उस कॉफ़ी का एक घूंट भी अपने गले से उतारकर दिखा सको तोपता चले..
और जो कभी तुम जानना चाहो कि गम  तन्हाई क्या है,
और जो कभी तुम जानना चाहो कि गम  तन्हाई क्या है,
तो उस cafe में जैसे मैं जाता हूँ अकेले जाके एक शाम बिता आओतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले

खैर तुम्हें तो शायद लगता होगा कि बर्बाद हो गया हूँ मैं,
लेकिन नहीं इस गम में रहकर हर गम से आजाद हो गया हूँ मैं..
अरे कितना चैन और सुकून है उस नींद में,
कितना चैन और सुकून है उस नींद में..
जो वो तकिया आंसुओ से गीला करके फिर पलट के उस पे सो सकोतो पता चले..
जो कभी मोहब्बत करो तो पता चले

 

Ab Farq Nahi Padta Poetry by Jai Ojha Part – 1

Ek Waqt Tha Jab Tujhse Beinteha Pyar Karta Tha.
Ab To Tu Khud Mohabbat Ban Chali Aaye To Mujhe farq Nahin Padta.

एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.
अब तू खुद मोहब्बत बन चली आये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब मैं तेरी परवाह करता था,
अब तो तू मेरी खातिर फ़ना भी हो जाये, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे हजारों Messages लिखा करता था.
और कोई काम ना था मेरा, और कोई काम ना था मेरा,
दिनभर बस तेरा Last Seen देखाकरताथा.
अब सुन ले तू, कि अब सुन ले तू,
अब तो अरसा बीत गया है Visit किये तेरे Profile को
जा, जा अब तू 24 घंटे भी Online रह तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझसे बिछड़ जाने का डर लगा रहता था.
तू कहीं छोड़ ना दे इस ख्याल से मैं सहमा सहमा सा रहता था.
लेकिन अब सुन ले, अब सुन ले, इतना जलील हुआ हूँ तेरे इश्क़ में,
इतना जलील हुआ हूँ तेरी इन रोज रोज छोड़ने छाड़ने की बातों से,
कि अब तू 1 क्या, 100 दफा छोड़ जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था, जब तुझ बिन एक पल ना रह सकता था.
बैचैन गुमशुदा था, अकेलेपन से डरता था.
लेकिन अब सुन ले कि अब तो इतना वक़्त बिता चूका हूँ इस अकेलेपन में,
अरे अब तो इतना वक़्त बिता चूका हूँ इस अकेलेपन में,
कि सुन ले, कि अब ताउम्र तन्हा रहना पड़ जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे कोई छू लेता तो मेरा खून खौल उठता था.
और इसलिए कई दफा मैं इन हवाओं से बैर पाला करता था.
अरे अपने हुस्न के सिवा कुछ नहीं है तेरे पास अगर,
अंग्रेजी में एक कहावत है
If Beauty is all you have, then ugly is all you are.
अगर आपके पास सिर्फ और सिर्फ ऊपर की खूबसूरती है,
और आपके अंदर कुछ भी नहीं है, तो आप भद्दे ही हो.
तो अपने हुस्न के सिवा कुछ नहीं है तेरे पास अगर,
तो जा, जा किसी के साथ हमबिस्तर भी हो जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
अरे इतना गुरुर किया तूने अपने इस मिट्टी के जिस्म पर,
जा तेरा ये जिस्म किसी और का हो जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब खुदा से तेरे लिए मन्नते माँगा करता था.
मुझे कुछ नहीं चाहिए था, सिर्फ तेरे लिए अपने उस खुदा को आजमाता था.
लेकिन अब सुन ले, अब तो मैं ना झुकता हूँ, ना पूजता हूँ, ना मानता हूँ किसी को,
अब तो भले ही तू खुद खुदा बन चली आये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब शेर लिखा करता था तेरे लिए और सुनाता था महफ़िलो में,
अरे अब तो अरसे बाद लिखी है ये अधूरी सी कविता तुझ पे,
तुझ पे लिखी है इसलिए अधूरी बोल रहा हूँ,
अरे अब तो अरसे बाद लिखी है ये अधूरी सी कविता तुझ पे,
अब सुन ले कि अब तो आगे कुछ भी ना लिखा जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
बताना तुझे मिल जाये कोई मुझ जैसा कहीं और अगर,
जा जा तू औरो को आजमा ले तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

एक वक़्त था जब तुझे हजारों की भीड़ में भी पहचान लिया करता था.
हिजाब में होती अगर तो आँखों से पहचान लिया करता था.
अब तो आँखों से ओझल किया है मैंने तुझे कुछ इस कदर,
की अगर तू इस भीड़ में मेरी आवाज भी सुन रही होगी तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

खैर फिर भी करता हूँ शुक्रिया तेरा, तुझे खोने से मैंने बहुत कुछ पा लिया है.
नज्मे, गजले और शायरिया सब मिल गयी है मुझे,
और इन्होने तो जैसे मुझे गले से लगा लिया है.
अब तो मुझे सुनने वाले भी है, चाहने वाले भी है, दाद देने वाले भी है,
लेकिन अब सुन ले कि अब तो इतना बेख़ौफ़ हो गया हूँ,
कि ये सब भी छोड़ जाये तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
अरे खुद में है मस्त हो गया है तेरा ये जय इतना,
कि अब कोई सुनने आये या ना आये मुझे फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

खैर चाहता तो नहीं था तुझे बेनकाब करूँ यूँ सबके सामने.
लेकिन सुन ले कि एक बेवफा मेरी कलम से बेइज्जत भी हो जाये,
तो मुझे फर्क नहीं पड़ता.
याद कर वो वक़्त जब एक लफ्ज नहीं सुन पाता था तेरे खिलाफ,
अब देख कि अब देख तेरी तौहीन पर यहाँ तालियां बज रही है,
तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.
एक वक़्त था जब तुझसे बेइंतहा प्यार करता था.

ना ना बेटा, तुमसे ना हो पायेगा ये कॉपी