Humko To Sirf Ghar Pe Rehna Hai by Aushmann Khurrana

Humko To Sirf Ghar Pe Rehna Hai by Aushmann Khurrana

वो सामने वाली बिल्डिंग कुछ दिन पहले सील हो गयी।
और तब से आस पड़ोस के लोगो की जिंदगी थोड़ी तब्दील हो गयी।
उसी बिल्डिंग के नीचे वाली दुकान से तो घर का सामान आता था।
वो बिमारी के बारे में पहले बता देते तो क्या जाता था।

आज हम डरे हुए है।
जीवित है पर मरे हुए है।
आज लगता है काश कर दें सब कुछ ठीक इस दुनिया को करके Rewind
But Believe Me This is Nothing but the Collective Karma of Mankind
सलाम है उनको जो सड़कें साफ़ करता है।
कचरा लेकर जाता है।
घर का सामान लेकर आता है।
और फिर अपने घर जाता है।
पर हमने उनको कभी इज्जत दी ही नहीं,
हम पैसे वाले है, हमारे बाप का क्या जाता है।
और वो बेचारा डरता है,
कि कोरोना वायरस उसके परिवार को ना हो जाये। 
वो अपने छोटे बच्चों को छू नहीं पाता है।
ये आमिर गरीब का इंसानियत से परे का नाता है।
इस देश को गरीब ही चलाता था, गरीब ही चलाएगा।
हमे इस समय भी सब सुविधाएं गरीब ही दिलाएगा।

आज जब सब ठीक हो जायेगा तो इन लोगो को इज्जत देना।
कोई काम छोटा नहीं होता ये बात अपने पल्ले बाँध लेना।
आज डॉक्टर्स, नर्स, पुलिस, हमारे सिक्योरिटी गार्ड है, सबसे जयादा काम के।
हम सब बॉलीवुड हीरो है बस नाम के।
हम बस पैसे दे सकते है, हथियार दे सकते है।
लड़ना उनको है, उन्ही को सब कुछ सहना है।
हमको तो सिर्फ घर पे रहना है।
हमको तो सिर्फ घर पे रहना है।

Zinda Rahe To Fir Aayenge Tumhare Sehar Ko Aabaad Karne

Zinda Rahe To Fir Aayenge Tumhare Sehar Ko Aabaad Karne

A true description by a Mazdoor leaving big metro city

A very Heart touching poem…

जिंदा रहे तो फिर से आयेंगे,
तुम्हारे शहरों को आबाद करने…
वहीं मिलेंगे गगन चुंबी इमारतों के नीचे,
प्लास्टिक की तिरपाल से ढकी अपनी झुग्गियों में…

चौराहों पर अपने औजारों के साथ,
फैक्ट्रियों से निकलते काले धुंए जैसे,
होटलों और ढाबों पर खाना बनाते, बर्तनो को धोते…
हर गली हर नुक्कड़ पर फेरियों मे,
रिक्शा खींचते आटो चलाते मंजिलों तक पहुंचाते…

हर कहीं हम मिल जायेंगे,
पानी पिलाते गन्ना पेरते…
कपड़े धोते प्रेस करते,
समोसा तलते पानीपूरी बेचते…

ईंट भट्ठों पर,
तेजाब से धोते जेवरात,
पालिश करते स्टील के बर्तनों को,
मुरादाबाद ब्रास के कारखानों से लेकर,
फिरोजाबाद की चूड़ियों,
पंजाब के खेतों से लेकर लोहामंडी गोबिंद गढ़,
चायबगानों से लेकर जहाजरानी तक,
मंडियों मे माल ढोते…
हर जगह होंगे हम…

बस इस बार एक बार घर पहुंचा दो,
घर पर बूढी मां है बाप है…
सुनकर खबर वो परेशान हैं…
बाट जोह रहे हैं काका काकी,
मत रोको हमे जाने दो…
आयेंगे फिर जिंदा रहे तो,
नही तो अपनी मिट्टी मे समा जाने दो 🙏

बाट जोह रहे हैं सब मिल कर हमारी, 
काका-काकी, ताया-ताई।
मत रोको हमे अब बस जाने दो…
विश्वास जो टूटा तुम शहर वालों से वापिस लाने में समय लगेगा।
हम भी इन्सान हैं तुम्हारी तरह,
वो बात अलग है हमारे तन पर,
पसीने की गन्ध के फटे पुराने कपडे हैं,
तुम्हारे जैसे उजले नही है कपडे।
चिन्ता मत करना बाबू तुम,
विश्वास जमा तो फिर लौटूंगा।
जिंदा रहे तो फिर आएँगे लौट कर।
जिन्दा रहे तो फिर आएँगे लौट कर।

वैसे अब जीने के उम्मीद तो कम है,
अगर मर भी गए तो हमें इतना तो हक दे दो।
हमें अपने इलाके की ही मिट्टी मे समा जाने दो ।
आपने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से,
जो कुछ भी खाने दिया उसका दिल से शुक्रिया ।
बना बना कर फूड पैकेट हमारी झोली में डाले उसका शुक्रिया।
आप भी आखिर कब तक हमको खिलाओगे ।
वक्त ने अगर ला दिया आपको भी हमारे बराबर,
फिर हमको कैसे खिलाओगे ।
तो क्यों नही जाने देते हो हमें हमारे घर और गाँव ।
तुम्हे मुबारक हो यह चकाचौंध भरा शहर तुम्हारा।
हमको तो अपनी जान से प्यारा है भोला-भाला गाँव हमारा ।।

Main Shunya Pe Sawar Hun by Zakir Khan

Main Shunya Pe Sawar Hoon…
Beadab Sa Main Khumaar Hoon…
Ab Mushkilo Se Kya Darun…
Main Khud Kehar Hazaar Hoon…
Main Shunya Pe Sawar Hoon…


मैं शून्य पे सवार हूँ..
बेअदब सा मैं खुमार हूँ..
अब मुश्किलों से क्या डरूं..
मैं खुद कहर हज़ार हूँ..
मैं शून्य पे सवार हूँ..
मैं शून्य पे सवार हूँ..


उंच-नीच से परे…
मजाल आँख में भरे…
मैं लड़ रहा हूँ रात से..
मशाल हाथ में लिए…
न सूर्य मेरे साथ है…
तो क्या नयी ये बात है..
वो शाम होता ढल गया…
वो रात से था डर गया…
मैं जुगनुओं का यार हूँ..
मैं शून्य पे सवार हूँ..
मैं शून्य पे सवार हूँ..

भावनाएं मर चुकीं..
संवेदनाएं खत्म हैं..
अब दर्द से क्या डरूं..
ज़िन्दगी ही ज़ख्म है..
मैं बीच रह की मात हूँ..
बेजान-स्याह रात हूँ..
मैं काली का श्रृंगार हूँ…
मैं शून्य पे सवार हूँ..
मैं शून्य पे सवार हूँ..


हूँ राम का सा तेज मैं..
लंकापति सा ज्ञान हूँ…
किस की करूं आराधना…
सब से जो मैं महान हूँ..
ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ..
मैं जल-प्रवाह निहार हूँ..
मैं शून्य पे सवार हूँ..
मैं शून्य पे सवार हूँ..

Kinnar by Shivani Tyagi – A Transgender life Story

Kinnar by Shivani Tyagi – A Transgender life Story

कोई शायर समझता है मुझे, कोई आवारा पागल समझता है।
मगर वो बिछड़ने का दर्द, या तो वो जमीं या वो बदल समझता है।
लाख समझा ले ये जमाना, पर वो दुरी का दर्द,
या तो तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है।

छोटा सा बच्चा जन्मा माँ के आँचल में,
माँ की खवाहिशे थी बहुत बड़ी बड़ी और पाँव थे बदल में।
माँ खुश थी और परेशान भी,
क्योंकि माहौल कुछ उदास था।
शायद मेरे सच का अब सबको अहसास था।
किन्नर का नाम दे दिया तो माँ का दिल भी रोता है।
मैं सवाल पूछती हूँ तो माँ कहती है –
ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

खुदा ने आदमी जैसी वो नायब चीज बनाई थी।
और उससे ज्यादा खूबसूरत वो औरत नजर आई थी।
फिर एक और चीज बनाई जो खूबसूरत थी और नायाब भी।
किन्नर, पर ना आदमी को ना औरत को उसके अस्तित्व की कहानी नजर आई थी।
क्या हुआ अगर मेरा अस्तित्व अगर भिन्न है।
अर्धनारेश्वर हूँ मैं शिव का और यही मेरा चिन्ह है।
क्यों, कैसे हूँ मैं भिन्न, चीख चीखकर आंसू पूछता है।
मैं सवाल पूछती हूँ, मैं सवाल पूछती हूँ,
तो ये समाज कहता है – ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

मैं समाज भर से लड़ रही, खुद के सम्मान के लिए,
मैं लड़ रही थी अपने अस्तित्व के लिए।
और इंसान हूँ फिर भी लड़ रही हूँ,
अपनी पहचान के लिए।
और तुमने जरा भी वक़्त जाया ना किया ना,
मेरे अपमान के लिए।

बेनाम नहीं हूँ,
फिर भी किन्नरों जैसे ना जाने कैसे कैसे नामो से मुझे पुकारा जाता है।
बेघर नहीं हूँ, मेरा भी परिवार है,
जिसे समुदाय के नाम से जाना जाता है।
क्या खूब कहा है कि ऐ इंसान इतना जुल्म ना कर।
पूछ उस मिटटी से कि वो सिकंदर कहाँ है?
ख़ाक होगा एक दिन तू भी और मैं भी,
फिर बताना, कौनसा तेरा और कौनसा मेरा जहाँ है।
हर रोज, हर दिन ये ह्रदय मेरा तानो का बोझ ढोता है।
मैं पूछती हूँ तो फिर ये ह्रदय कहता है,
ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

हाँ माना मैंने, मैं ना किसी की जरुरत हूँ।
बलाए लेती हूँ, जिस्म से ना सही पर दिल से तो बहुत खूबसूरत हूँ।
तालियों से ही तो चलती थी, तुमने इसी का मजाक बना दिया।
फिर कामयाबी का मैंने ऐसा जादू चलाया,
कि मैंने उन्हें तालियां बजाना सीखा दिया।
अब पूछते है कि कोई इतनी परेशानी के बाद कैसे सफलता के बीज बो सकता है?
अब मैं कहती हूँ,
ऐसा ही होता था, ऐसा ही होता है, ऐसा ही होता है।

Bin Bulaye The Woh – Periods by Neha Duseja

Bin Bulaye The Woh  – Periods by Neha Duseja

वो दर्द में करराहती रही,
ना जाने अपने लबों के पीछे कितना कुछ छुपाती रही।
मासिक धर्म के नाम पर,
ना जाने कितने धार्मिक स्थलों से निकाली जाती रही।
वो दर्द में इतना करराहती रही..

उसके संघर्ष पर किये कई विमर्श,
पर उन दिनों किया ना उसे किसी ने स्पर्श।
वो खून से धब्बो सी सलवार,
ने किये उसकी शुद्धता पे कई वार।
वो दर्द में करराहती रही,
अपने लबों के पीछे कितना कुछ छुपाती रही।

जैसे मानो कल ही तो वो बच्ची थी।
और आज वो महिला कहला रही थी।
वो दर्द में काफी कुछ छुपाती रही।

अनजान थी वो कई बदलाव से,
जिनका जवाब मांग रही थी सबसे,
कमर दर्द, सर दर्द और ना जाने कितने दर्द में,
ढाल रही थी खुद को अब।
बार-बार समझाया जाता था उसे,
ये आम है।
पर फिर क्यों मर्द इस दर्द से अनजान है।

क्या महिला होना गुनाह है।
क्या यही मेरी सजा है।
अभिशाप नहीं, स्वाभाविक हूँ मैं,
ये छुपाने वाला कोई राज़ नहीं।
मन को मैला ना कर, लबों को साफ़ मत बता,
पीरियड्स” ही तो हूँ जनाब,
इतना क्या इसे रोग बताता है।

Mil Jayega Koi Mard Apko Apna Dard Chupaya Hua by RJ Raunac

Tufano Me Bhi Pair Jamaya Hua, Mehnat Ke Paseene Se Nahaya Hua.
Mil Jayega Koi Mard Apko Apna Dard Chupaya Hua..

क्या तुमने किसी मर्द को देखा है?
उसके पीछे छिपे उसके दर्द को देखा है..
नहीं देखा है तो आज मेरी नजर से देखो,
अच्छी, बुरी, हर तरह से देखो..
क्योंकि वो देखना जरुरी है जो अनदेखा है..
जिसने feelings की बाढ़ को अपने जिगर से रोका है..
ये आसान बात नहीं होती,
दुनिया मर्द के लिए कभी नहीं रोती..
किसी को फर्क नहीं पड़ता, कितनी कठिन उसकी डगर है..
आपको तो पता भी नहीं कि आज के अख़बार की वो एक खबर है..
जेब की Savings चाय सुट्टे में उडाता हुआ..
पुरे घर के लिए अकेले कमाता हुआ..
खुद Sad रहकर बच्चों का New Year Happy मनाता हुआ..
मिल जायेगा कोई ना कोई मर्द आपको, अपना दर्द छुपाता हुआ..

अरे बॉर्डर पर तुम्हारे लिए लड़ता हुआ..
समाज में चार लोगों से डरता हुआ..
एक फौजी के सीने का नाप भी है..
हाँ, वो एक बेटी का बाप भी है..
तूफानों में भी अपना पैर जमाया हुआ..
मेहनत के पसीने से नहाया हुआ..
मिल जायेगा आपको कोई ना कोई मर्द, अपना दर्द छुपाया हुआ..

वो एक भाई भी है,
राखी से बंधी उसकी कलाई भी है..
वो Introvert भी है..
बैटमैन वाली उसके पास एक टी शर्ट भी है..
एक लड़की पे वो मरता भी है..
लेकिन हाँ, उसको कहने से वो डरता भी है..
दिल उसका भी टुटा है, लेकिन वो नाराज नहीं है..
वो ऐसी चीख है जिसमे आवाज नहीं है..
क्योंकि किसी का दुपट्टा उसके लिए कोई Toy नहीं है..
आशिक़ तो है लेकिन Playboy नहीं है..
हजार परेशानियों में भी मुस्कुराता हुआ..
लाख तकलीफ में भी कुछ ना बताता हुआ..
मिल जायेगा आपको कोई ना कोई मर्द, अपना दर्द छुपाया हुआ..

हाथ उठाये तो बे दर्द भी है..
मार खा जाये तो ना मर्द भी है
माना कि वो Perfect नहीं है..
क्या इसीलिए उसकी कोई Respect नहीं है..
रोज अंदर थोड़ा थोड़ा मरता हुआ..
अँधेरे से ज्यादा सवेरे से डरता हुआ..
हर Conditions में खुद को Adjust करता हुआ..
मुर्गा होकर कसाई पर Trust करता हुआ..
खुद भूखा रहकर पुरे परिवार को खिलाता है..
और दिन में चार बार,
“All men are Dog” वाली गाली भी वही खाता है..

वो एक पति भी है..
मजाक में कहो तो एक दुर्गति भी है..
Shopping Bags के बोझ को उठाया हुआ..
क्रेडिट कार्ड से अपनी नजरें चुराया हुआ..
सबकी फ़िज़ूलख़र्ची का उसके पास हिसाब है..
चेहरा उसका एक खुली किताब है..
ओवरटाइम में वो सोता नहीं है..
बोनस ना मिले फिर भी वो रोता नहीं है..
माँ और बीवी दोनों ही उसको प्यारी है..
पुरे घर की उसके ऊपर ही जिम्मेदारी है..
ज़िन्दगी ने उसकी बराबर मारी है..
कहीं डॉक्टर, कहीं इंजीनियर तो कहीं Peon भी है..
थोड़ा बहुत उसके सर पर लोन भी है..
इतना सब देकर भी वो स्वार्थी है..
लोग कहते है ये उसकी Patriarchy है..

वो ज्यादा Rude नहीं है..
शायद इसीलिए कइयों के लिए वो Dude नहीं है.
ये भी तो एक तरह का गम ही है..
गलती चाहे किसी की भी हो, दोषी तो हम ही है..
तुम तो लड़के हो, तुम्हें क्या डर है
ये उससे पूछो, जो ग्रेजुएशन के बाद भी घर पर बैठा है..
क्योंकि बेरोजगार से कोई नहीं पूछता कि,
भाई तू कैसा है
दिक्कत ये है कि लोग उसको समझते नहीं है..
जानते सब है फिर भी कहते कुछ नहीं है..
क्योंकि, बॉस इस सोसाइटी का एक ही Rule है..
जो Emotional है ना वही फूल है..

तो भाई जिंदगी में कभी रोने का नहीं..
आंसुओ के दाग अपनी शर्ट से धोने का नहीं..
कल हो ना हो ये तो एक फ़िल्मी बात है..
मगर बाहर की भीड़ में कभी अपने आप को खोने का नहीं..
क्योंकि जीने का सबसे अच्छा एक यही Way है..
मुबारक हो, आज “International Men’s Day” है..

 
 

Ek Roz Kitaab Se Phool Mila by Jai Ojha

Ek Roz Kitaab Se Phool Mila, Bilkul Mujh Jaisi Hi Halat Me..
Tanha Sa Par Hansta Hua, Fana Ho Gya Mohabbat Me..

अमूमन ऐसा होता है कि जब हम कोई पुरानी किताब उठाते है और उसे खोलते है तो अक्सर हमें उसमे एक दबी हुई मोहब्बत मिलती है, वो दबी हुई मोहब्बत जिसे गुले सुर्ख कहा गया है, गुलाब का फूल जोकि प्रेम की निशानी है मोहब्बत का प्रतीक है, उसकी अपनी एक दास्तां है, अपनी एक कहानी है, उस कहानी को आज मैं बयां करने जा रहा हूँ. आप सबके सामने इस कहानी को पेश कर रहा हूँ, आप सब की तवज्जो चाहूंगा..

एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
तन्हा सा पर हँसता हुआ, फ़ना हो गया मोहब्बत में..

लोग कहते है मुरझाया है, जख़्म बड़े ही गहरे है..
लेकिन ध्यान से देखो तो सूफ़ी हुआ है, इश्क़ की खुशबू बिखेरे है..
अरे जख्मों से जिसके खुशबू आये, सोचो वो मरा होगा कैसी राहत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..

ना जाने कितनी पीड़ाएँ सही, दर्द का भी कोई पार नहीं..
ये इश्क़ शायद एकतरफा था, था जिसमें कोई व्यापार नहीं..
अरे क्या कमाल बंदगी है उसकी, माशूक है जिसकी इबादत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..

दर्द जब हद से गुजरा एक रोज़, तो दर्द में ही दवा मिली..
घुटन हुई दो पन्नो के बीच, तो शायरी की हवा मिली..
कांटे हो बदन पर भले ही, लेकिन उम्र गुजरी है शहादत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..

जिन हाथों ने कुचला इसको, वो हाथ भी खुशबू से महक उठे..
क्या है कोई इस दुनिया में कहीं, जो यूँ मुरझाकर भी चमक उठे..
सदियों से ये पाक मोहब्बत, दफ़न होती है इसी रिवायत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..

लेकिन इस फूल को कोई मलाल नहीं है, जीवन इश्क़ पर लुटाया है..
क्या हस्ती है उस आशिक की, जिसने काँटों को इश्क़ सिखाया है..
अरे गम भला क्या होगा उसको, कुर्बां हुआ है जो चाहत में..
एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..

एक रोज़ किताब से फूल मिला, बिलकुल मुझ जैसी ही हालत में..
तन्हा सा पर हँसता हुआ, फ़ना हो गया मोहब्बत में..

Gentleman Kise Kehte Hai by Ayushmann Khurrana

Gentleman Kise Kehte Hai?

You Know, मर्द का एक Stereotype है,
बड़ी Macho वाली Hype है,
वो घर चलाएगा, वो लड़की को बचाएगा
वो रोयेगा नहीं, Weak नहीं होगा
मुझे लगा ये तो साला कुछ ठीक नहीं होगा

मुझे ना Hero, ना Savior,
ना सुपरमैन बनना था
जो रो सके, जो गा सके,
किसी को बचा पाए तो बचा सके,
ऐसा Man बनना था

मैं हिंदी में सेंटी होता हूँ,
पंजाबी में गाता हूँ
ऐसा Man हूँ..
टाई बांधना मुझे नहीं आता,
पर खाना ठीक ठाक बनाता हूँ
ऐसा Man हूँ

तुम्हारी इंग्लिश Slow है या Fast है,
मुझे फ़र्क नहीं पड़ता
तुम Gay हो, Straight हो, तुम्हारी क्या Caste है,
मुझे फ़र्क नहीं पड़ता

I know that the ads have told you to play it too Cool,
And Father asked you to be disciplined
As if you are always in School.

उन्होंने बोला, Gentleman बनो…
But ये भी बोला कि,
Man का Gentle होना खराब है
क्योंकि तुम्हें तो Honour बचाना है,
जादू वाला परफ्यूम लगाना है,
उसी से लड़कियां तुम पर मरेंगी

पर मरेंगी क्यों?
उन्हें मरना नहीं चाहिए
मैं जहाँ हूँ, जहाँ खड़ा हूँ,
उन्हें डरना नहीं चाहिए
Pink और Pink Floyd के बीच में,
वो कुछ भी पसंद कर सकता है
अँधेरा ज्यादा हो तो वो भी डर सकता है
क्योंकि Violence उसके साथ भी हुआ है
Patriarchy ने उसको भी गलत तरीके से छुआ है

वो जल्दी बड़ा होने के बोझ के नीचे बड़ा होता है,
दिल उसका भी 300 ग्राम का हीहोता है..
पर उस पर लोहे का सोशल कवर चढ़ा होता है..
उसे बस, कार और गन के खिलौनों में मत बांधो,
जब वो बच्चा हो
जरुरी नहीं कि ड्राइवर अच्छा हो,
हो सकता है कि मशीनों के काम में थोड़ा कच्चा हो..
पर मर्द होने की इकलौती शर्त यही है कि सच्चा हो

अब जरुरी नहीं कि मेरा Passion गिटार हो, कूल हो,
मेरे हाथ में लड़की के लिए फूल हो,
हो सकता है कि मेरे पास लम्बी गाड़ी हो,
हो सकता है कि लाइफ की हर एक Ride Pool हो

तुम्हें पता है, बच्चों को मैं भी संभालता हूँ,
वो थक के आती है तो अदरक वाली चाय भी उबालता हूँ,
लड़का और लड़की में फ़र्क बहुत है,
और ये फ़र्क खूबसूरत है,
ये मैं जनता हूँ..
पर फ़र्क करने को सबसे बड़ा गुनाह मानता हूँ..

शायद इसीलिए, इसीलिए अपने बेटे से कहता हूँ,
कि जरुरी नहीं उनके लिए कुर्सी खींचना,
या गाड़ी का दरवाजा खोलना,
पर जब कुछ गलत हो, तो सबसे पहले बोलना..
क्योंकि Six Pack से नहीं बनते है मर्द,
ना ज्यादा कमाने से बनते है..
ना चिल्लाने से, ना आंसू छुपाने से बनते है…

किसी और को ठंड लगती है तो दिल उसका भी सर्द होता है,
कि जिसको दर्द होता है, असल में वही मर्द होता है..

तू चाहे Carpet पे सोये,
चाहे Red Carpet पे चले,
Let me tell you, you are the most powerful,
As long as their lives
A Gentleman in You

English Version

 
What makes a true Gentleman?
Is it his suit and his tie?
Or the fact that he isn’t afraid to cry?
Is it the way he shoulders tradition?
Or the fact that he is a good son?
The way he treats women
Or the way he is a master in the kitchen?
Is it the way he stands up for what is right?
The way he is always fair in a fight?
Or is it in his heart,
Which pains when another is hurt?

 

Har Ladka Bura Nahi Hota by Goonj Chand

Kuch Mardon Ki Wajah Se Sabko Galat Thehrana Bhi Shi Nahi Hota,
Or Kisi Ke Keh Dene Bhar Se Har Ladka Bura Nahi Hota..

कुछ मर्दों की वजह से सबको गलत ठहरना भी सही नहीं होता,
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..

कोई उड़ाए अगर मजाक किसी का तो वो अक्सर टोक देता है..
तुम्हारे घर में भी तो माँ बहने है, ये कहकर रोक देता है..
छोड़ देता है वो रास्ता अक्सर लड़की के लिए,
जी हाँ हर कोई रास्ता रोकने वाला नहीं होता..
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..

जिंदगी को कैसे जीना है ये भी उसे बखूभी आता है..
और दोस्तों के साथ पार्टी करने तो वो भी जाता है..
पर आदत है उसे माँ बाप के साथ खाना खाने की,
इसलिए वो कभी घर आने में लेट नहीं होता..
और जी हाँ किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..

अपनी जिम्मेदारियों से वो कभी भागता नहीं है..
और मुसीबत के समय हिम्मत हारता नहीं है..
दफ़न कर देता है वो अपने अरमानो को सबकी ख़ुशी के लिए,
हर लड़का बाप की दौलत पर ऐश करने वाला नहीं होता..
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..

इश्क़ की दुनिया में भी वो बड़ा ईमानदार होता है..
और अपने इश्क़ की हिफाज़त के लिए वो सबसे जानदार होता है..
और अक्सर ढक देता है वो दुपट्टे से अपनी मोहब्बत को,
क्यूंकि हर लड़का इश्क़ में दुपट्टा हटाने वाला नहीं होता..
और कुछ लोगो के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..

 
कुछ मर्दों की वजह से सबको गलत ठहरना भी सही नहीं होता,
और किसी के कह देने भर से हर लड़का बुरा नहीं होता..

 
 

Ae Naukri Sare Yuva Tujhpe Hi Marte Hai

Badi Haseen Hogi Tu Ae Naukri,
Saare Yuva Aaj Tujhpe Hi Marte Hai..

बड़ी हसीन होगी तू नौकरी,
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..

सुख चैन खोकर, चटाई पे सोकर,
सारी रात जागकर पन्ने पलटते है..
दिन में तहरी और रात को मैगी,
आधे पेट ही खाके तेरा नाम जपते है..
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..

अंजान शहर में छोटा सा सस्ता रूम लेके,
किचन बैडरूम सब उसी में सहेज के,
चाहत में तेरी अपने माँ बाप, भाई बहन,
और दोस्तों से दूर रहते है..
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..

राशन की गठरी सिर पर उठाये,
अपनी मायूसी और मजबूरियां खुद ही छुपाये,
खचाखच भरी ट्रैन में बिना टिकट के,
रिस्क लेकर सफर करते है..
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..

इंटरनेट अखबारों में तुझको तलाशते,
तेरे लिए पत्र पत्रिकाएं पढ़ते पढ़ते,
बत्तीस साल तक के जवान कंवारे फिरते है..
बड़ी हसीन होगी तू नौकरी,
सारे युवा आज तुझपे ही मरते है..

ना ना बेटा, तुमसे ना हो पायेगा ये कॉपी