Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai by Rekha Sharma

 
Kagaj Par Pade Adhure Alfazon ko Pura Kar Jaata Hai..
Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai..

कागज पर पड़े अधूरे अल्फाजों को पूरा कर जाता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
थोड़ा सा बुद्धू, थोड़ा शायराना है..
मेरी सुरमयी आँखों पर उसका दिल दीवाना है..
मशरूफ है सब इस शहर की भागमभाग में..
पर वो थम जाता है किसी टपरी की छांव में..
उसकी कहानी की कश्ती को किनारो तक लाती हूँ..
उसके ख़्वाबों की दुनिया में एक आशियाँ मैं भी बनाती हूँ..
वो नहीं कहता पर उसका हर ख्वाब जानती हूँ..
उसके मुखौटे के पीछे की रूह को पहचानती हूँ..
मुझे रास्तों की परवाह नहीं, मैं उसे अपना घर मानती हूँ..
पर ये सारी बातें कहने से ना जाने मेरा मन क्यों कतराता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
मेरी सारी बातों को बड़े इत्मीनान से सुनता है..
मैं खफा हूँ तो हाँ मुझे मनाता है..
मैं परेशान हूँ तो परेशान हो जाता है..
अगर मैं चुप हूँ तो मेरा सर सहलाता है..
मेरे मन में चल रही हर उलझन को सुलझाता है..
मेरे हर अधूरे ख्वाब को मुकम्मल वो कराता है..
मेरे माथे की सिलवट को अपने होंठो से सहलाता है..
मेरे दिल का हाल जान उसके दिल को करार आता है..
खुद कितनी ही जदीद में हो, मेरा हर ख्वाब बांटता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
हाँ, हाँ मुझसे प्यार बेहद करता है, पर ये बात कहने से भी डरता है..
मेरे हंसने से लेकर मेरा खफा होना, हर चीज उसे पसंद है..
पर उसके जेहन में चल रही एक गंभीर सी रंज है..
अपने जज्बातों को शब्दों में पिरोता है..
सारी असमंजस को कविताओं का रूप देता है..
पर इन कविताओं को भी कहाँ मुकम्मल कर पता है..
दोस्ती के दायरे में अपने एहसासो को दफ़न कर जाता है..
उसकी खिलखिलाती हंसी यही आकर सिमट जाती है..
उसकी आँखों की चमक महज पानी बन बह जाती है..
मेरी तो कब से हाँ है, पर संकोच दो तरफ़ा रहता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..
पर, पर तेरी बातों से नहीं हूँ अनजान..
मुझे भी है तेरे इश्क़ की पहचान..
बहुत कर लिया सोच विचार,
आज करने जा रही हूँ सारी बातों का प्रचार..
कि हाँ तू है मेरी धड़कन, मैं हूँ तेरी जान..
तेरे दिल में ही आके रुकेगा मेरे दिल का ये विमान..
क्योंकि तेरे बिना मेरा दिल हर रोज मचल जाता है..
तू ही वो लड़का है जो मुझे मुझसे जयादा चाहता है..
 
 

Meri Mohabbat Ko Majboori Samajh Rakha Hai by Rekha Sharma

Mere Andar Ke Jawalamukhi Ko Mere Andar Ka Taap Samjh Kar Rakha Hai..
Meri Mohabbat ki Sharafat Ko Meri Majboori Samajh Kar Rakha Hai..

मेरे अंदर के ज्वालामुखी को मेरे अंदर का ताप समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
मैं मोहब्बत बहुत करती हूँ तुमसे इस बात से तुम अनजान नहीं..
मेरे दिल की धड़कन का साज हो तुम, इस बात पर तुम्हें गुमान नहीं..
मेरे शिद्दत वाले इश्क़ को एहसासों की रवानी समझ रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
तुम्हारे एक इशारे पर मेरा इधर से उधर दौड़ लगाना मेरा..
तुम्हारी ना सुनु तो मन का थोड़ा मचल जाना मेरा..
तुम्हारे सारे ताने सुनकर भी तुम्हें पलकों पर बैठा रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
तब भी चोट तुम्हें लगे और दर्द हमें हो ऐसी हालत थी हमारी..
तुम ना कहो तो ना छू सके तुम्हें ये हिदायत थी हमारी..
हमारी हिदायत की तामील को तामील हुकुम समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
वो कहता था चेहरे की नुमाइश कर किया इश्क़, इश्क़ नहीं महज झूठा खवाब है..
पर भाती नहीं उसे फूटे आँख भी मैं, मेरे चेहरे पर उसे दिखते दाग है..
वो अपनी ही बातों की सरहाना कर उनसे मुकरा हुआ बैठा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
ना जाने कब उसके इश्क़ में इतना अँधा हो गयी..
उसे मासूम समझ उसका हर सितम सह गयी..
और मेरी मासूम नादान सी अठखेलियों को दिखावटी मुखौटा समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
दिल आवाज उसे सौ लगाए, वो एक नहीं सुनता..
मेरे गीले पड़े तकिये पर वो रहे सौ ख्वाब बुनता..
मैं पूछ लो जो हाल जरा इस बात को मेरी बेकरारी समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
बेनाम था ये रिश्ता, इस रिश्ते का कोई  नाम नहीं..
हूँ उसके दोस्तों में मशहूर, पर मेरी कोई पहचान नहीं..
और स्वाभिमान की इस लड़ाई को मेरा Arrogance समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..
क्या शिकायतें, क्या नाराजगी खुद को धोखा देने की बात है..
उस इंसान से हुई मोहब्बत या अपनी आशाओं से ध्यान देने की बात है..
क्या उम्मीदों को अपनी व्यहवार उसका समझ कर रखा है..
तभी तुम्हारी मोहब्बत की शराफत को तुम्हारी मजबूरी समझ कर रखा है..
 
 

Uthi Jo Ek Nazar Uspar To Katleaam Kar Dungi by Goonj Chand


Uthi Jo Ek Nazar Uspar To Katleaam Kar Dungi..

उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी,
और उसको नीचा दिखाने की कोशिश की तो तुझको बदनाम कर दूंगी..
और अब दिख भी गया उसके रास्ते में तो सोच लेना,
तेरी गली में आके बवाल कर दूंगी..
मैं खामखा तुझसे सवाल कर दूंगी..
तेरी नींद तेरा चैन, सब हराम कर दूंगी..
और मेरे प्यार पर उंगली उठाने की हिम्मत मत करना,
वरना खामखा तुझको नीलाम कर दूंगी..
मांगेगा माफ़ी तो माफ़ कर दूंगी..
वरना तेरे दोस्तों को भी तेरे खिलाफ कर दूंगी..
और जिन लोगो की वजह से तू इतना उछलता है ,
वक़्त आने पर उनका भी हिसाब कर दूंगी..
दीवानी हूँ उसकी ये ऐलान कर दूंगी..
दिल ही क्या ये जान भी उसके नाम कर दूंगी..
और तुझ जैसे 36 भी जाये ना उसके रास्ते पर,
तो माँ कसम 36 के 36 का हिसाब कर दूंगी..
मैं अपने अल्फाज़ो से ही उसका इलाज कर दूंगी..
और उसकी तन्हाई को भी हसीं शाम कर दूंगी..
और कौन कहता है कि सिर्फ बन्दे ही प्रोटेक्ट करते है अपनी बंदियों को,
अरे मैं तो लड़की होके भी लड़को वाला काम कर दूंगी..
कि उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी..

Main Pandit Ji Ka Beta Tha Wo Kazi Sahab Ki Beti Thi


Main Mandir Me Betha Tha, Wo Maszid Me Bethi Thi..
Main PanditJi Ka Beta Tha Wo Kazi Sahab Ki Beti Thi..

मैं उनसे बातें तो नहीं करता पर उनकी बातें लाजवाब करता हूँ..
पेशे से शायर हूँ यारों, अल्फाज़ो से दिल का इलाज़ करता हूँ..
उन्हें तो मैं उस खुदा से भी छीन लाता पर उनकी बातो ने मुझे कायर बना रखा है..
यूँ तो शौंक नहीं है मुझे शायरी का पर उनकी आँखों ने मुझे शायर बना रखा है..
मैं मंदिर में बैठा था वो मस्जिद में बैठी थी..
मैं पंडित जी का बेटा था वो काज़ी साहब की बेटी थी..
मैं बुलेट पर चलकर आता था, वो बुरखे में गुजरती थी..
मैं कायल था उसकी आँखों का, वो मेरी नजर पर मरती थी..
मैं खड़ा रहता था चौराहे पर, वो भी छत पर चढ़ती थी..
मैं पूजा कर आता था मज़ारो की, वो मंदिर में नमाज़ पड़ती थी..
वो होली पे मुझे रंग लगाती, मैं ईद का जश्न मनाता था..
वो वैष्णो देवी जाती थी, मैं हाजी अली हो आता था..
वो मुझको क़ुरान सुनाती, मैं उसको वेद समझाता था..
वो हनुमान चालीसा पढ़ती थी, मैं सबको अजान सुनाता था..
उसे मांगता था मैं मेरे रब से, वो अल्लाह से मेरी दुआ करती थी..
ये सब उन दिनों की बात है जब वो मेरी हुआ करती थी..
फिर इस मजहबी इश्क़ का ऐसा अंजाम हुआ..
वो मुसलमानो में हो गयी और मैं हिन्दुओ में बदनाम हुआ..
मैं मंदिर में रोता था वो मस्जिद में रोती थी..
मैं पंडित जी का बेटा था, वो काज़ी साहब की बेटी थी..
रोते रोते हम लोगो की तब शाम ढला करती थी..
अपने अब्बू से छिपकर वो मस्जिद के पीछे मिला करती थी..
मैं पिघल जाता था बर्फ सा, वो जब भी छुआ करती थी..
ये सब उन दिनों की बात है जब वो मेरी हुआ करती थी..
कुछ मजहबी कीड़े आकर हमारी दुनिया उजाड़ गए..
जो खुदा से ना हारे थे, वो खुदा के बन्दों से हार गए..
जीतने की कोई गुंजाइस ना थी, मैं इश्क़ का हारा बाजी था..
जो उसका निकाह कराने आया था, वो उसी का बाप काज़ी था..
जो गूंज रही थी मेरे कानो में, वो उसकी शादी की शहनाई थी..
मैं कलियाँ बिछा रहा था गलियों में, आज मेरी जान की विदाई थी..
मैं वही मंदिर में बैठा था, पर आज वो डोली में बैठी थी..
मैं पंडित जी का बेटा था, वो काज़ी साहब की बेटी थी..


Intezaar Poetry by Jai Ojha – love Poem


Chalo Accha Hai Is Intezaar Mein Ye Zindagi To Gujar Jayegi..
Bas Mere Intezaar Ki Intha Kya Hai Ye Mat Pooch Mujhse,
Itna Samajh Le Ki Marte Waqt Bhi Aankhe Khuli Reh Jayegi..

चलो अच्छा है इस इंतज़ार में ये जिंदगी तो गुजर जाएगी..
कवितायेँ जब तुमको छूकर लौट आएगी,
कवितायेँ जब तुमको छूकर लौट आएगी,
हाँ तब, तब किसी रोज सुकूँ से मौत आएगी..
हाँ तब, तब किसी रोज सुकूँ से मौत आएगी..
हम ब्लॉक है पर करेगें तेरी फोटो पे क्लिक बार बार,
हम ब्लॉक है पर करेगें तेरी फोटो पे क्लिक बार बार,
कभी तुम भी करके देखो ना, जरा तकलीफ समझ आएगी..
कभी तुम भी करके देखो ना, जरा तकलीफ समझ आएगी..
हम आये है तेरे शहर में, ना जाने कब मुलाक़ात तुमसे हो पायेगी,
हम आये है तेरे शहर में, ना जाने कब मुलाक़ात तुमसे हो पायेगी,
कभी तो कहीं तो नजर आओगी तुम मुझे,
कभी तो कहीं तो नजर आओगी तुम मुझे,
चलो अच्छा है इस इंतज़ार में ये जिंदगी तो गुजर जाएगी..
चलो अच्छा है इस इंतज़ार में ये जिंदगी तो गुजर जाएगी..
हमारी दास्ताँइश्क़ में तुम भी तो शामिल रही अब तक,
हमारी दास्ताँइश्क़ में तुम भी तो शामिल रही अब तक,
आज नहीं तो कल याद तुम्हे भी बहुत आएगी..
आज नहीं तो कल याद तुम्हे भी बहुत आएगी..
तेरी मेरी साँसों ने देखी जो इंतहा हमारे इश्क़ की,
तेरी मेरी साँसों ने देखी जो इंतहा हमारे इश्क़ की,
बता ना ये सांसे कैसे झूठ बोल पाएगी..
बता ना ये सांसे कैसे झूठ बोल पाएगी..
बस इतना मलाल रहा कि तुमसे ज्यादा वफादार तुम्हारी याद निकली,
बस इतना मलाल रहा कि तुमसे ज्यादा वफादार तुम्हारी याद निकली,
ये ताउम्र मुझे छोड़कर नहीं जाएगी..
ये ताउम्र मुझे छोड़कर नहीं जाएगी..
एक तेरी फितरत जो भूल जाती है कसमें सारी,
एक तेरी फितरत जो भूल जाती है कसमें सारी,
और एक मेरी रूह जो मरके भी वादे सारे निभाएगी..
और एक मेरी रूह जो मरके भी वादे सारे निभाएगी..
ये रंज है कि मेरा दर्द दिल अब कभी मिटेगा नहीं दोस्त,
हाँ ये रंज है कि मेरा दर्द दिल अब कभी मिटेगा नहीं दोस्त,
और ये गनीमत भी कि अब कोई चोट मेरा दिल नहीं तोड़ पाएगी..
और ये गनीमत भी कि अब कोई चोट मेरा दिल नहीं तोड़ पाएगी..
बस मेरे इंतज़ार की इंतहा क्या है ये मत पूछ मुझसे,
बस मेरे इंतज़ार की इंतहा क्या है ये मत पूछ मुझसे,
इतना समझ ले कि मरते वक़्त भी आंखे खुली रह जाएगी..
इतना समझ ले कि मरते वक़्त भी आंखे खुली रह जाएगी..
तुम्हारा इंतज़ार बढ़ते बढ़ते एक रोज इस हद तक जा पहुंचा,
कि तुमसे इसका ताल्लुक ही ना रहा..


Tere Bina Hi Is Ishq Ko Mukammal Karungi by Goonj Chand


Ab Main Akele Hi Tujhse Mohabbat Karungi..
Aur Tere Bina Hi Is Ishq Ko Mukammal Karungi..

अब मैं अकेले ही तुझसे मोहब्बत करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
ना कोई गिला है तुझसे ना बैर है कोई..
जो कोई पूछे मेरे बारे तो कहना गैर है कोई..
मैं तो फिर भी तेरे ही बारे में बाते करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
जाने के बाद ना तूने मुड़के देखा ना मैं तेरे पास आयी..
पर तूने कर ली है शादी ऐसी मेरे कानो में आवाज आयी..
अब इस कहानी की रुक्मणि ना सही तो फिर राधा ही बनुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
अब ना तेरे वापस आने की ख़ुशी है और जाने का डर तो निकल ही गया..
पकड़ के रखा था जो इतने सालो से, आखिर वो रिश्ता भी हाथो से फिसल ही गया..
एकतरफा थी मोहब्बत तो अब एकतरफा ही रखूंगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
ना लगाउंगी तुझ पर बेवफाई का इलज़ाम अब..
पर तुझसे प्यार करना बस यही है मेरा काम अब..
मैं तो बस मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..
अब मैं अकेले ही तुझसे मोहब्बत करुँगी..
और तेरे बिना ही इस इश्क़ को मुकम्मल करुँगी..


Tujhe Paane Ki Zid Me Khud Ko Khoti Ja Rahi Hoon by Goonj Chand


Khud Ke Banaye Rishton Me Ulajhti Ja Rahi Hun..
Ek Tujhe Paane Ki Zid Me Khud Ko Khoti Jaa Rhi Hun..

खुद के बनाये रिश्तों में उलझती जा रही हूँ..
एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ..
तेरे उन बेजान से खतो में तेरे अलफ़ाज़ आज भी ज़िंदा है मेरे पास
पर खुद में जान होते हुए भी, बेजान सी होती जा रही हूँ..
एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ..
घर में बिखरी चीजे पसंद नहीं है मुझे..
इसलिए उन्हें समेटने की चाह में खुद को ही बिखेरती जा रही हूँ..
एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ..
मैं तो वो चिराग थी जिसे बारिश तक का खौफ ना था..
पर अब तो हवा के हलके से झोंके से डरी जा रही हूँ..
एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ..
पहले तो हर छोटी छोटी बात पर आंसू बहा दिया करती थी..
पर अब तो अपने आंसूओ को अपनी हंसी से छुपाये जा रही हूँ..
एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ..
ज़िन्दगी के हर मोड़ पर साथ निभाने का वादा तो हम दोनों का था ना..
पर क्यों आज ये सारे वादे मैं अकेले ही निभाए जा रही हूँ..
एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ..
खुद के बनाये रिश्तों में उलझती जा रही हूँ..
एक तुझे पाने की ज़िद में खुद को खोती जा रही हूँ..


Tuta Hua Dil Mera Aaj Firse Jud Raha Tha by Goonj Chand


Tuta Hua Dil Mera Aaj Firse Jud Raha Tha..
Aur Todne Wale Ki Taraf Hi Dobara Jhuk Raha Tha..

टुटा हुआ दिल मेरा आज फिरसे जुड़ रहा था
और तोड़ने वाले की तरफ ही दोबारा झुक रहा था..
बोल नहीं पाती थी जिसके आगे मैं कभी ऊँची आवाज में,
आज वो मेरी सारी बातें सर झुकाये सुन रहा था..
टुटा हुआ दिल मेरा आज फिर जुड़ रहा था
दिल मेरा फिरसे नए ख्वाब बन रहा था
और फिर अपने लिए उसी बेवफा को चुन रहा था..
यूँ तो भरोसा नहीं था मुझे उसपर पहले की तरह..
पर फिर भी ये दिमाग था जो सिर्फ दिल की सुन रहा था..
टुटा हुआ दिल मेरा आज फिरसे जुड़ रहा था
जमीं पे बिखरा दिल मेरा अब आसमां में उड़ रहा था..
ना जाना था जिस गली, अब उसी गली में मुड़ रहा था..
मुद्दतों बाद खुशियां रही थी ज़िन्दगी में हमारी..
पर ना जाने क्यों इस बात से जमाना जल रहा था..
टुटा हुआ दिल मेरा आज फिरसे जुड़ रहा था
अपने पहले प्यार से मुझे दोबारा प्यार हो रहा था..
और वो अपनी सारी गलतियां स्वीकार कर मेरे आगे रो रहा था..
यूँ तो वफाये आज भी उतनी ही थे उसके लिए मेरे दिल में,
पर उसकी बेवफाई का जनाज़ा भरे बाजार उठ रहा था..
शायद इसीलिए मेरा टुटा हुआ दिल आज फिरसे जुड़ रहा था


Teri Nafrat Keh Rahi Hai Tujhe Pyar Hai Mujhse by Goonj Chand


Meri Bepanah Mohabbat Ko Aaj Bhi Ikraar Hai Tujhse..
Aur Teri Nafrat Keh Rahi Hai Tujhe Pyar Hai Mujhse..

मेरी बेपनाह मोहब्बत को आज भी इकरार है तुझसे..
और तेरी नफरत कह रही है तुझे प्यार है मुझसे..
तुझे किस बात का गुरुर है जो जाता नहीं
तेरे बिना एक भी लम्हा मैंने कभी काटा नहीं..
तुझे है बेचैनी तो मेरा करार है तुझसे..
और तेरी नफरत कह रही है तुझे प्यार है मुझसे..
तूने मेरे प्यार को कभी समझा नहीं है..
मेरे प्यार पर हावी तेरी गलतफहमियां रही है..
तेरे लिए मैं कुछ नहीं पर मेरा सारा जहाँ है तुझसे..
और तेरी नफरत कह रही है तुझे प्यार है मुझसे..
कोशिश की थी मैंने कि सुलझा सकूँ रिश्तों में पड़ी उन गांठो को..
पर भुला ना पायी अपने गालो पर पड़े तेरे उन चांटो को..
तू भूल गया शायद पर मेरा दिल भी कही बेजार है तुझसे
और तेरी नफरत कह रही है तुझे प्यार है मुझसे..
बीत गए कितने साल ये सोचकर कि तू कभी वापस आएगा..
और तुझे हुई उन गलतफहमियों की माफ़ी मांग मुझे मनाएगा..
पर तुझे आज भी है गलतफहमिया पर मेरा हर विश्वास है तुझसे..
और तेरी नफरत कह रही है तुझे प्यार है मुझसे..
मेरी बेपनाह मोहब्बत को आज भी इकरार है तुझसे..
और तेरी नफरत कह रही है तुझे प्यार है मुझसे..


Love Birds by Goonj Chand


Ek Dusre Se Jeetne Ke Chakkar Me,
Hum Dono Hi Haar Jayenge..

मत ढूंढ मुझसे दूर जाने के बहाने,
प्यार से कह दे हम खुद ही दूर चले जायेंगे
एक दूसरे से जीतने के चक्कर में,
हम दोनों ही हार जायेंगे..
जानती हूँ अब वो मोहब्बत नहीं तुझे मुझसे,
तू जा ढूंढ ले तुझे तुझ जैसे तो बहुत मिल जायेंगे..
एक दूसरे से जीतने के चाह में,
हम दोनों ही हार जायेंगे..
करेंगे वो भी वादे वफ़ा तुझसे,
पर जनाब हमारी तरह निभा नहीं पाएंगे..
एक दूसरे से जीतने के चाह में,
हम दोनों ही हार जायेंगे..
आना मत वापस अगर चले गए इस बार,
क्योंकि हम भी फिर अपनी लाइफ में MOVE ON कर जायेंगे..
एक दूसरे से जीतने के चाह में,
हम दोनों ही हार जायेंगे..
सोच ले अभी भी वक़्त है तेरे पास रुकने का,
क्योंकि अगर हम चले गए तो लौटकर नहीं आएंगे..
एक दूसरे से जीतने के चाह में,
हम दोनों ही हार जायेंगे..
कि चल छोड़ ये फालतू की बातें ये तो रोज़ का ड्रामा है..
लव बर्ड्स है यार हम एक दूसरे के बिना जी नहीं पाएंगे..
और ये जानती थी मैं कि ये रूठने मनाने के अंत में हम दोनों ही मान जायेंगे..
एक दूसरे से जीतने के चाह में,
हम दोनों ही हार जायेंगे..
Baap Ka Maal Samjha Hai Kya?