Main Friendzone Bankar Reh Gaya by Ankit Guryan

Uski Kahi Huyi Saari Baaten Mujhe Bahut Dard De Rahi Thi,
Par Main Uske Kahe Har Ek Lafaz Ke Dard Ko Seh Gaya..
Pyar Se Jyada Meri Dosti Pyari Thi Use,
Isliye Maine bhi Dosti Ko Kabool Kiya,
Aur Main Friendzone Bankar Reh Gaya..

पहली बार मैंने उसे लाइब्रेरी में देखा था..
मैं अपने दोस्तों के साथ बैठा था,
और वो अपनी सहेलियों के साथ Gossip कर रही थी.
उसकी खुली हुई जुल्फें और काली काली आंखे,
ना जाने क्यों मुझे बार-बार Hypnotize कर रही थी…
खैर मैं जानता नहीं था उसे,
पर फिर भी आज मेरी निगाहें बस उसी पे टिकी थी..
यूँ तो बंदा मैं सख्त था,
पर उस दिन मेरी सख्ती टूट चुकी थी..
शाम को मैं घर गया और मैंने फेसबुक ओपन की..
ज्यादा मुश्किल नहीं हुई मुझे उसे ढूंढने में,
और एक दोस्त की फ्रेंड लिस्ट में मुझे वो नजर आ गयी..
मैं काफी देर तक उसकी तस्वीर को निहारता रहा..
चूँकि आजतक किसी Unknown लड़की को Request भेजी नहीं थी मैंने,
इसलिए Add Friend पर Click करने से पहले मेरा अंगूठा भी कांपता रहा..
मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे मेरे,
“पता नहीं Request Accept करेगी भी या नहीं,
अगर डिलीट कर दी, तो दोबारा Add भी नहीं कर पाउँगा..
कहीं मेरे किसी दोस्त को तो नहीं बता देगी,
वो सब के सब कमीने है साले, मेरी बड़ी मजाक लेगे.
“वगैरह वगैरह”
खैर मैंने हिम्मत दिखाई, माता रानी का नाम लिया,
और Request भेज दी..
अब मुझे बस Request Accept होने का इंतज़ार था..
क्योंकि मेरा दिल उससे बातें करने को बड़ा बेकरार था..

3 दिन बीत चुके थे,
मैंने उसकी Profile को Check किया,
मलाल था मेरे दिल में क्योंकि उसने मेरे Request Accept नहीं की थी..
लेकिन साथ में एक छोटी सी ख़ुशी भी थी,
क्योंकि डिलीट भी तो नहीं की थी..
दिन हफ़्तों में बदलने लगे, हफ्ते महीनो में बदल गए..
महीने भी कहाँ रुकने वाले थे,
और अब एक साल से जयादा हो गया था..
मुझे Request भेजे हुए एक साल से ज्यादा हो गया था..
अब मैं भी उसकी यादों से निकलकर,
खुद की ज़िन्दगी में खो गया था..
मेरे कॉलेज के इम्तिहान के साथ,
मेरा कॉलेज भी पूरा हो गया था..
और अब वो वक़्त आ गया था,
जब मुझे ज़िन्दगी के इम्तिहान देने थे..
एक बूढी माँ थी घर में, एक छोटा भाई था..
घर में बड़ा तो मैं ही था,
इसलिए भाई के सपने मुझे ही पुरे करने थे..
यूँ तो दिल्ली शहर इतना भी बुरा नहीं था..
पर पता नहीं क्यों घर से दूर रहना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था..
कुछ दिन पराये शहर में धक्के खाये, इंटरव्यू दिए,
और Finally एक Job मिल गयी..
6 दिन ऑफिस होता था और Sunday Off मिलता था..
बहुत Busy हो गयी थी मेरी लाइफ,
खुद के बारे में सोचने तक का वक़्त नहीं मिलता था..

खैर उस दिन Sunday था..
मैं घर पर आराम से लेटा हुआ था..
तभी मेरे फ़ोन पर नोटिफिकेशन Bell बजी..
मैं फ़ोन उठाया और Check किया तो मुझे यकीन नहीं हुआ,
क्योंकि नोटिफिकेशन फेसबुक से आयी थी,
और लिखा था –
“Divya has Accepted Your Friend Request”

साथ में एक Message भी था,
जिसमे Hii लिखा हुआ था..
मैंने तुरंत रिप्लाई किया,
और हमारे बीच बातें होना शुरू हो गयी..
मुझे यकीन नहीं हो रहा था,
कि एक लड़की किसी Unknown बन्दे से,
कैसे इतने अच्छे से बात कर सकती है?
लेकिन बात तो कुछ और ही थी,
क्योंकि वो तो पहले से ही मेरे बारे में,
मेरे दोस्त से सबकुछ जान चुकी थी..
जोकि सौभाग्य से या दुर्भाग्य से, जैसे भी कहो,
उसका भी दोस्त था..

अब धीरे धीरे हम एक दूसरे के बारे में बहुत कुछ जानने लगे थे..
दिन से शुरुआत होती थी और देर रात तक बातें करने लगे थे..
उसके आने के मुझे अपनी ज़िन्दगी काफी हसीन लगने लगी थी..
आवाज तो अभी तक सुनी ना थी मैंने उसकी,
लेकिन बातें वो बहुत प्यारी करने लगी थी..
अब तो मैं हमेशा के लिए बस उसी से बातें करना चाहता था..
बेक़रार था मैं और उसकी आवाज सुनना चाहता था..
इसलिए एक दिन मैंने हिम्मत दिखाई,
और उसका नंबर मांग लिया..
मुझे बहुत बुरा लगा, क्योंकि उसने साफ़ मना कर दिया..
लेकिन मैंने अपना नंबर Msg किया और लिखा –
“अगर मुझपर विश्वास है तो मुझे Whatsapp कर देना,
नहीं तो मुझे फेसबुक पर Block कर देना.”
यूँ गुस्से में Msg करके मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था..
लेकिन करता भी क्या मैं,
मुझसे अब बिल्कुल भी इंतज़ार नहीं हो रहा था..
कुछ देर बाद मुझे एक नए नंबर से Whatsapp आया,
Msg में लिखा था –
“Hey Ankit, Divya Here”

हमारी बातों का सिलसिला अब कुछ ज्यादा हो गया था..
आवाज तो अभी भी सुनी ना थी मैंने उसकी,
लेकिन नंबर मिलने से मेरे बैचैन दिल को चैन मिल गया था..

खैर यूँ ही कुछ दिन बीत गए..
और मैंने एक दिन उसको कॉल के लिए पूछा..
उसने मुझे मना कर दिया और कहा –
“I will call you As soon As Possible”
मैंने भी ज्यादा Force नहीं किया,
और उसके कॉल का इंतज़ार करने लगा..
खैर उसी दिन माता रानी की कृपा हुई,
और शाम को मेरा फ़ोन जोरो से बजा..
उसने मुझे कॉल किया था..
मैंने फ़ोन उठाया और बस उसकी बातें सुनने लगा..
वो बोले जा रही थी और मैं चुपचाप,
बस उसकी आवाज को सुने जा रहा था..
काश मेरे पास कोई शक्ति होती,
तो मैं वक़्त को वहीं रोक देता,
और ताउम्र बस उस खूबसूरत एहसास,
और उस हसीन लम्हें को जी लेता..

अब हमारे बीच बातें पहले से कुछ ज्यादा होने लगी थी..
अपनी Problems भी वो मुझसे Share करने लगी थी..
उसकी Help करने को मैं हमेशा तैयार रहता था..
अब तो हमेशा के लिए मैं बस उसी का साथ चाहता था..
उसके इश्क़ का जूनून मुझपर कुछ यूँ होने लगा था..
मैं ना चाहते हुए भी उसकी DP पर Love React करने लगा था..
यूँ तो बहुत दूर थे हम एक दूजे से,
लेकिन बातों में दूरियां कम होने लगी थी..
मैं मरता क्या ना करता,
आखिर वो भी तो मुझे अब “I Love You” बोलने लगी थी..
हमारे बीच बातों का सिलसिला कुछ इस कदर बढ़ गया था..
कि 4 साल बीत चुके थे और हमें पता भी ना चला था..
यूँ तो इन 4 सालों में हमारे बीच थोड़ी बहुत लड़ाइयां भी हुई थी..
कई दिनों तक चलने वाली रुसवाइयाँ भी हुई थी..
मेरे रूठने पर वो मुझे बहुत प्यार से मनाया करती थी..
और खुद के रूठ जाने पर वो मुझे बहुत सताया करती थी..
अब मुझसे इंतज़ार नहीं हो रहा था,
और मुझे उससे अपना इज़हार-ए-इश्क़ करना था..
बेक़रार था मैं उससे मिलने को,
क्योंकि अब सारी उम्र उसी के संग चलना था..
इसलिए मैंने एक दिन उससे मिलने के लिए पूछ लिया..
उसने मुझे मना नहीं किया और हाँ बोल दिया..
उसने मुझे मिलने के लिए एक अनजान सा पता बताया था..
उस दिन मैं बहुत खुश था,
क्योंकि उसने मुझे अपने शहर बुलाया था..

आज हम 4 साल में पहली बार मिलने वाले थे..
कुछ राज़ जो दिल में दफ़न थे,
आज सरेआम खुलने वाले थे..
मैं उसे इंतज़ार नहीं कराना चाहता था,
इसलिए मैं उसके आने से पहले ही पहुँच गया..
कुछ ही देर में उसने दस्तक दी,
और वो मेरे सामने आकर बैठ गयी..
मुझसे मिलकर वो बस मुस्कुराये जा रही थी..
मैं नजरें तक ना मिला पा रहा था उससे,
मेरी जान निकली जा रही थी..
लेकिन क्या करता मैं,
लेकिन क्या करता मैं,
थोड़ी हिम्मत तो मुझे भी दिखानी थी..
जो बात 4 साल से मेरे दिल में थी,
वो आज उसे बतानी थी..
मैंने एक गहरी सांस ली,
और फिर मैं उसकी आँखों में देखने लगा..
एक ही बार में अपने दिल की सारी बातें बोल दी मैंने,
और खामोश हो गया..
बहुत डर लग रहा था मुझे,
और मानो वक़्त तो जैसे ठहर सा गया था..
लेकिन मेरी बात पर उसने कोई Over React नहीं किया..
शायद दोस्त ही था मैं उसकी नजरों में,
इसलिए उसने मुझे Cheat नहीं किया..
वो बहुत प्यार से मुझे समझाने लगी..
हमारे दोस्ती के रिश्ते की अहमियत को मुझे बताने लगी..
उसने मुझे हमेशा एक अच्छा दोस्त माना है..
वो मुझे बस यही बात बताती रही..
उसके बारे में मुझे जो गलतफहमी थी,
वो पर्दा भी मेरी नजरों से हटाती रही..
उसकी कही हुई सारी बातें मुझे बहुत दर्द दे रही थी..
पर मैं उसके कहे हर एक लफ्ज़ के दर्द को सह गया..
प्यार से ज्यादा मेरी दोस्ती प्यारी थी उसे,
इसलिए मैंने भी दोस्ती को कबूल किया,
और मैं Friendzone बनकर रह गया..


उस दिन मैं सारी कश्मकश से आज़ाद हो गया था..
उसके I Love You के सच्चे मतलब को समझ गया था..
क्योंकि उस दिन से पहले मैं उसके Love You को कभी समझ ही नहीं पाया,
और हमेशा ही उसका अलग मतलब निकलता रहा..
वो तो मुझे अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती थी,
और मैं पागल उसे अपनी ज़िन्दगी का हमसफ़र मानता रहा..

~Ankit D perfect Guryan

 

Koi To Ho by Nidhi Narwal

Koi To Ho by Nidhi Narwal

कोई तो हो जो सुने तो सुने बस मेरी निगाह को,
क्योंकि जुबान पर अक्सर ताले,
और नज़रों में बहुत सारी कहानियाँ रखती हूँ मैं..
वो मुझसे बात करने आये और कहें,
कि मुझसे नज़रें मिलाओ..
फिर हो यूँ की वो कहें,
कि कुछ कहना चाहती हो?
जो नहीं कहना चाहती हो वो तो मैंने सुन लिया…

दिल तो हर जगह से टूटा हुआ है मेरा,
दिल के हर कोने, हर दीवार में छेद है,
मगर कोई तो हो जो झांक कर अंदर आने में दिलचस्पी रखें…
झांक कर भागने में नहीं…
दिल तो ढेर हो चुका एक घर है,
जो मरम्मत नहीं मांगता, बस सोहबत मांगता है..
उस शख्स की जो कि इसकी टूटी हुई दीवारों के अन्दर आ कर,
इसे जोर जोर से ये बताए कि इसकी बची कुची दीवारे मैली है…
जो रंगी जा सकती है…
कुछ तस्वीरें टंगी है अब भी पुरानी..
जो फेंकी जा सकती है…

हाँ वैसे काफी नुकसान हुआ है दर-ओ-दीवार के टूटने से,
मगर इसकी बुनियाद अब भी सलामत है…
कोई तो हो कि जो देखें तो देखें बस मुझको,
कहें मुझसे कि ये मुस्कराहट ना खूबसूरत तो है,
मगर ख़ास नहीं…
ख़ास है ये ज़ख्म जो तुमने कमाये है पहने नहीं,
कहें मुझसे कि ये ख़ुशी मेरी है मैं नहीं..
कहें मुझसे कि जो मैं दिखती हूँ ना वो मैं हूँ नहीं..
कहें मुझसे कि मैं अपनी नज़्मों को,
अपनी ज़हन के आगे का पर्दा बना कर रखती हूँ..
पर्दा जिसके आर पार दिखता है…

कहें मुझसे कि मेरी मुस्कुराहटें बस मेरी नाकाम कोशिशें है..
अपने जज़्बात पे लगाम लगाने के लिए,
कहें मुझसे कि ये नक़ाब उतार कर रख दे तू,
और आइना देख महज खुद को देखने के लिए,
छुपाने के लिए नहीं…
कहें मुझसे कि तू दर्द का चेहरा है,
दरारों से भरा हुआ, बिगड़ा हुआ…
दर्द जो हसीं है, इश्क़ है..
कहें मुझसे की तू दर्द है, हसीं है, इश्क़ है…

Apni To Bichhad Jaane Ki Ladai Thi – The Kaafir Poem

Apni To Bichhad Jaane Ki Ladai Thi – The Kaafir Poem

Log Ladte Hai Milne Ki Khatir,
Par Apni To Bichhad Jaane Ki Ladai Thi…


लोग लड़ते हैं मिलने की ख़ातिर,
पर अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी|
जीत मिली हम दोनो को बस,
बस आँसू की कमाई थी|
लोग लड़ते हैं मिलने की ख़ातिर,
पर अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी|


तुम पंछी थे और मैं थी मछली,
हम दोनो की अलग थी दुनिया,
अलग सुबह और अलग जहाँ|
सब कहते थे हम दोनों का,
इस दुनिया में मेल कहाँ,
पर भूल नहीं पाऊँगी वो लम्हा,
जब तुमने दिल की धड़कने सुनायी थी| 
लोग लड़ते हैं मिलने की ख़ातिर, 
पर अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी।


ये बिछड़ना मिलना ये तो शायद मुहब्बत है,
अपने प्यार को वो दे देना,
जिसकी उसे ज़रूरत है, 
हम दोनो थे क़ैद कहीं,
अपनी समझ की सलाखों में,
तुमने ऐसा रिहा किया,
ख़ुद आज़ादी शर्मायी थी;
लोग लड़ते हैं मिलने की ख़ातिर, 
पर अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी|

मिलेंगे हम ये वादा है ,
रोज़ रात को चाँद के ज़रिए,
मैं भेजूँगी पैग़ाम तुम्हें,
इस बहती हुई हवा के ज़रिए,
साथ रहेंगे सोच में दोनो,
नाज़ुक नाज़ुक यादों में,
मैं कहूँगी मुझको एक मिला था, पागल,
जिसने ज़िंदगी सिखायी थी,
तुम कहना सबसे, एक ज़िद्दी पड़ोसन, 
अपने घर भी आयी थी|
चलो बहुत हुआ, अब चुप रहूँगी,
चुप्पी में मज़मून है ज़्यादा,
तुम जैसा बनना, कहूँगी सबको, 
बस इतना ही मेरा वादा,
इससे ज़्यादा कहूँगी कुछ तो फूट पड़ेगी रुलायी भी,
लोग लड़ते हैं मिलने की ख़ातिर,
पर अपनी तो बिछड़ जाने की लड़ाई थी|


Meri Holi Tere Bina Berang Hai by Goonj Chand

Meri Holi Tere Bina Berang Hai by Goonj Chand

माना आज हर जगह रंग ही रंग है..
मेरी होली तेरे बिना बेरंग है

कही उड़ेगा गुलाल तो कही पानी बरसेगा…
पर आज भी मेरा दिल तेरी याद में तरसेगा…
जानती हूँ तू आ नहीं सकता,
क्योंकि बोहोत सी मजबूरियां तेरे संग है….
मेरी होली तेरे बिना बेरंग है

आज फिरसे बोहोत से बहाने बनाने पड़ेंगे मुझको…
और शायद कही लोगो के फ़ोन भी काटने पड़ेंगे मुझको…
क्योंकि मेरी हर खुशी और रंग तो सिर्फ तेरे संग है…
मेरी होली तेरे बिना बेरंग है

वो दिन भी याद आता है मुझे,
जब हमने साथ होली मनाई थी…
और मैंने अपने हाथो की छाप,
तेरे कपड़ो पे लगायी थी…
आज भी मेरे दिल के कोने में बसे सिर्फ वही रंग है…
मेरी होली तेरे बिना बेरंग है

मानती हूँ तू दूर है मुझसे पर है यही कही आस पास
तो क्या हुआ जो इस होली तुम साथ नहीं पर कभी तो होगी मुलाकात
तब तक लड़नी मुझे अकेली ही ये जंग है
मेरी होली तेरे बिना बेरंग है

माना आज हर जगह रंग ही रंग है…
मेरी होली तेरे बिना बेरंग है…

Ek Ladki Hai Jo Mujhe Mujhse Jyada Janti Hai by Amandeep Singh

Jo Lafaz Juban Tak Nahin Aate Mere,
Wo Unhe Bhi Pehchanti Hai..
Ek Ladki Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Janti Hai..

जो लफ्ज़ जुबां तक नहीं आते मेरे,
वो उन्हें भी पहचानती है..
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है..

सूझ बुझ में मुझसे आगे है..
वो थम जाती है जब दुनिया भागे है..
मशरूफ रहती है ना जाने किस गांव में त्योहारों में..
पायल पहनती है वो अपने पांवो में..
मेरी कहानियों को बड़े इत्मीनान से सुनती है..
मेरे शब्दों पर पलके रख शायद वो भी ख्वाब बुनती है..
कुछ छिपाता हूँ उससे तो ना जाने कैसे जान जाती है..
हर बार, हर बार मेरा मुखौटा हटा मेरी सच्चाई पहचान जाती है..
उसे रास्तों की परवाह नहीं है वो खुद को लहर मानती है..
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है..

मैं ना सुनूँ तो गुस्से में आती है..
मैं सुन लूँ तो मुस्कुराती है..
मैं उदास हूँ तो समझाती है..
मैं चुप हूँ तो सहलाती है..
मैं खफा हूँ तो ना ही मुझे मनाती है..
मेरी नाकामियों पर भी अपना हक़ जताती है..
थोड़ी बेसुरी है पर गाकर सुनाती है..
मैं परेशान ना करूँ तो परेशान हो जाती है..
इतनी तिलिस्मानी होकर भी मुझे वो अपना दोस्त मानती है..
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है..

हाँ, हाँ मैं उससे मजाक बेहद करता हूँ..
पर उसे खोने से भी डरता हूँ..
उसकी नापसंद भी मुझे पसंद है..
उसकी आवारगी में मेरी आज़ादी बंद है..
मैं शब्द रखता हूँ, वो जज्बात उठाती है..
मैं शब्द रखता हूँ, वो जज्बात उठाती है..
मेरे कोरे कागज़ पर किसी कविता सी उतर जाती है..
पर पूरी कविता में भी वो कहाँ खरी उतरती है..
रोज़ रोज़ भला जन्नत से कहाँ ऐसी परी उतरती है..
मैं उम्मीद ना तोड़ दूँ, इसलिए मेरा हाथ थामती है..
मुझसे ज्यादा मेरे सपनो को वो हकीकत मानती है..
उसे रास्तों की परवाह नहीं है वो खुद को लहर मानती है..
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है..

~Amandeep Singh

School Wala Love by Goonj Chand

School Wala Love by Goonj Chand

Meri Khoobsurati Ko Usne Us Din Is Kadar Sajaya Tha

मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..
कि बिंदी लगाना भूल गयी थी मैं,
तो उसने काले पेन से टिका लगाया था..

वो अक्सर दूर से ही देखता था मुझे तो सब ठीक था…
पर बात तो उस दिन बिगड़ी,
जिस दिन उसने सबके सामने मुझे गले लगाया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

वैसे तो बहोत सी गाड़िया आती थी गली में मेरी…
पर आफत तो उस दिन आ गयी,
जिस दिन उसने हॉर्न बजाया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

कि अपनी ही क्लास के लड़के नज़र चुरा कर चलते मुझसे,
क्योंकि उसने उन सब को मुझे उनकी भाभी बताया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

एक दोस्त का बर्थडे था तो मैं ब्लैक ड्रेस में पहुंची थी..
मुझे ब्लैक कपड़ो में देख,
वो तुरंत घर जाकर काला कुर्ता डाल आया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

वो अक्सर छुप-छुप कर तोहफे भी देता था मुझे..
पर मेरा दिमाग तो उस दिन घुमा,
जिस दिन मुझे पायल देने के चक्कर में वो अपनी साइकिल बेच आया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

अक्सर मुझे देखने के चक्कर में मार खता था वो,
पर क़यामत तो उस दिन आयी,
जब मार खाते-खाते भी मुझे देख वो मुस्कुराया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

वैसे तो लोगो से मिलना जुलना ज्यादा पसंद नहीं है मुझे…
पर उस दिन न जाने क्यों अच्छा लगा,
जिस दिन उसने मुझे अपनी माँ से मिलवाया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

हम साथ रहे या ना रहे ये तो अलग बात है…
हम साथ है या नहीं ये भी अलग बात है…
पर इन खूबसूरत पलो ने मुझे एक अलग ही एहसास कराया था…
मेरी खुबसूरती को उसने उस दिन इस कदर सजाया था..

Phir Kabhi AND Dard Ka Samandar by Sugandha Gupta

Phir Kabhi AND Dard Ka Samandar by Sugandha Gupta

कई मुस्कुराते हुए चेहरे दर्द लिए बैठे है महफ़िल में,
तू नाराज़ ना हो बेवफाई सच्ची मोहब्बत किये बैठे है महफ़िल में।

लिखना तो बहुत कुछ है उसकी भोली सी मुस्कान पे,
उसकी नशीली आँखों पे,
पर आज फुर्सत नहीं है दुनिया के सवालों से।
कि लिखूंगी, कहूँगी और पिरो लुंगी तुम्हे खुद में कहीं,
फिर कभी…
और कह दूंगी तुमसे हर वो बात जो अब तक कहा नहीं।
पर फिर कभी….

कि खोल दूंगी वो राज़,
जिसका इंतज़ार भी तुम हो और इकरार भी तुम हो।
पर फिर कभी….

कि अभी खोयी हूँ दुनिया के ग़मों में मैं,
अभी पाया है मैंने खुद को कहीं,
जोड़े है खुद के बिखरे हुए टुकड़े मैंने,
कि अभी मशगूल हूँ खुद को समेटने में मैं।
कि सजाऊंगी, संवारूंगी और पिरो लुंगी तुम्हे खुद में कहीं,
पर फिर कभी, पर फिर कभी…

लिखूंगी कसीदे तुम पे कई हजार,
पर फिर कभी, फिर कभी…लिखना तो बहुत कुछ है तुम पे,
पर लिखूंगी तुमपे, फिर कभी…

कि कुछ बचा नहीं लिखने को,
कोई नई कहानी पुराने सलीके से लिखते है।
तुम अपनी और हम अपनी रवानी लिखते है।
जो वक़्त गुजर गया उस वक़्त से दो यादें लिखते है।
तुम अपनी जवानी हम अपना बचपना लिखते है।
तुमसे हुयी जो कभी वो पहली मुलाकात लिखते है।
चलो नई कहानी पुराने सलीके से लिखते है।

हम पुरानी किताबो में छुपे गुलाब लिखते है।
तुम चाय की वो पहली चुस्की लिखो।
कि बचा नहीं कुछ लिखने को,
हम अपने रिश्ते की नई कहानी लिखते है।
कि तुम हमारे दिल्ली की सुबह,
और हम तुम्हारे बनारस की शाम लिखते है।

“दर्द का समंदर”

दर्द का समंदर लिए फिरते है।
हम बेवफाई का वो मंजर लिए फिरते है।
खिलते फूलो को तो बहुत देखा है,
आजकल हम सूखे पत्तो से मिलते है।
नहीं आता है चैन अब वफाओ में,
हम बेवफाई का वो सुकून भरा बवंडर लिए फिरते है।
कब कोई आता है अकेलेपन का साथी बनकर,
हम हर रोज एक नए चेहरे के साथ मिलते है।
नहीं रुकते अब उसके नाम से हम,
अपने ही नाम की खोज में हर रोज निकलते है।
दर्द का समंदर लिए फिरते है।
हम बेवफाई का वो मंजर लिए फिरते है।
यूँ ही तो नहीं हम पत्थर बनते है।
आंसुओ से हर जख्म को सींते है।
क्या मिला इस ज़माने में आशिकी करके,
हम आज भी अपनी माँ की गोद में सिर रखके रोते है।

Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai by Rekha Sharma

Kagaj Par Pade Adhure Alfazon ko Pura Kar Jaata Hai..
Ek Ladka Hai Jo Mujhe Mujhse Jayada Chahta Hai..

कागज पर पड़े अधूरे अल्फाजों को पूरा कर जाता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

थोड़ा सा बुद्धू, थोड़ा शायराना है..
मेरी सुरमयी आँखों पर उसका दिल दीवाना है..
मशरूफ है सब इस शहर की भागमभाग में..
पर वो थम जाता है किसी टपरी की छांव में..
उसकी कहानी की कश्ती को किनारो तक लाती हूँ..
उसके ख़्वाबों की दुनिया में एक आशियाँ मैं भी बनाती हूँ..
वो नहीं कहता पर उसका हर ख्वाब जानती हूँ..
उसके मुखौटे के पीछे की रूह को पहचानती हूँ..
मुझे रास्तों की परवाह नहीं, मैं उसे अपना घर मानती हूँ..
पर ये सारी बातें कहने से ना जाने मेरा मन क्यों कतराता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

मेरी सारी बातों को बड़े इत्मीनान से सुनता है..
मैं खफा हूँ तो हाँ मुझे मनाता है..
मैं परेशान हूँ तो परेशान हो जाता है..
अगर मैं चुप हूँ तो मेरा सर सहलाता है..
मेरे मन में चल रही हर उलझन को सुलझाता है..
मेरे हर अधूरे ख्वाब को मुकम्मल वो कराता है..
मेरे माथे की सिलवट को अपने होंठो से सहलाता है..
मेरे दिल का हाल जान उसके दिल को करार आता है..
खुद कितनी ही जदीद में हो, मेरा हर ख्वाब बांटता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

हाँ, हाँ मुझसे प्यार बेहद करता है, पर ये बात कहने से भी डरता है..
मेरे हंसने से लेकर मेरा खफा होना, हर चीज उसे पसंद है..
पर उसके जेहन में चल रही एक गंभीर सी रंज है..
अपने जज्बातों को शब्दों में पिरोता है..
सारी असमंजस को कविताओं का रूप देता है..
पर इन कविताओं को भी कहाँ मुकम्मल कर पता है..
दोस्ती के दायरे में अपने एहसासो को दफ़न कर जाता है..
उसकी खिलखिलाती हंसी यही आकर सिमट जाती है..
उसकी आँखों की चमक महज पानी बन बह जाती है..
मेरी तो कब से हाँ है, पर संकोच दो तरफ़ा रहता है..
एक लड़का है जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहता है..

पर, पर तेरी बातों से नहीं हूँ अनजान..
मुझे भी है तेरे इश्क़ की पहचान..
बहुत कर लिया सोच विचार,
आज करने जा रही हूँ सारी बातों का प्रचार..
कि हाँ तू है मेरी धड़कन, मैं हूँ तेरी जान..
तेरे दिल में ही आके रुकेगा मेरे दिल का ये विमान..
क्योंकि तेरे बिना मेरा दिल हर रोज मचल जाता है..
तू ही वो लड़का है जो मुझे मुझसे जयादा चाहता है..

 

Meri Mohabbat Ko Majboori Samajh Rakha Hai by Rekha Sharma

Mere Andar Ke Jawalamukhi Ko Mere Andar Ka Taap Samjh Kar Rakha Hai..
Meri Mohabbat ki Sharafat Ko Meri Majboori Samajh Kar Rakha Hai..

मेरे अंदर के ज्वालामुखी को मेरे अंदर का ताप समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

मैं मोहब्बत बहुत करती हूँ तुमसे इस बात से तुम अनजान नहीं..
मेरे दिल की धड़कन का साज हो तुम, इस बात पर तुम्हें गुमान नहीं..
मेरे शिद्दत वाले इश्क़ को एहसासों की रवानी समझ रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

तुम्हारे एक इशारे पर मेरा इधर से उधर दौड़ लगाना मेरा..
तुम्हारी ना सुनु तो मन का थोड़ा मचल जाना मेरा..
तुम्हारे सारे ताने सुनकर भी तुम्हें पलकों पर बैठा रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

तब भी चोट तुम्हें लगे और दर्द हमें हो ऐसी हालत थी हमारी..
तुम ना कहो तो ना छू सके तुम्हें ये हिदायत थी हमारी..
हमारी हिदायत की तामील को तामील हुकुम समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

वो कहता था चेहरे की नुमाइश कर किया इश्क़, इश्क़ नहीं महज झूठा खवाब है..
पर भाती नहीं उसे फूटे आँख भी मैं, मेरे चेहरे पर उसे दिखते दाग है..
वो अपनी ही बातों की सरहाना कर उनसे मुकरा हुआ बैठा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

ना जाने कब उसके इश्क़ में इतना अँधा हो गयी..
उसे मासूम समझ उसका हर सितम सह गयी..
और मेरी मासूम नादान सी अठखेलियों को दिखावटी मुखौटा समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

दिल आवाज उसे सौ लगाए, वो एक नहीं सुनता..
मेरे गीले पड़े तकिये पर वो रहे सौ ख्वाब बुनता..
मैं पूछ लो जो हाल जरा इस बात को मेरी बेकरारी समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

बेनाम था ये रिश्ता, इस रिश्ते का कोई  नाम नहीं..
हूँ उसके दोस्तों में मशहूर, पर मेरी कोई पहचान नहीं..
और स्वाभिमान की इस लड़ाई को मेरा Arrogance समझ कर रखा है..
मेरी मोहब्बत की शराफत को मेरी मजबूरी समझ कर रखा है..

क्या शिकायतें, क्या नाराजगी खुद को धोखा देने की बात है..
उस इंसान से हुई मोहब्बत या अपनी आशाओं से ध्यान देने की बात है..
क्या उम्मीदों को अपनी व्यहवार उसका समझ कर रखा है..
तभी तुम्हारी मोहब्बत की शराफत को तुम्हारी मजबूरी समझ कर रखा है..

 

Usey Pasand Hai by Nidhi Narwal

Usey Pasand Hai by Nidhi Narwal

बाते बेहिसाब बताना,
कुछ कहते कहते चुप हो जाना,
उसे जताना उसे सुनाना, 
वो कहता है उसे पसंद है…

ये निगाहें खुला महखाना है,
वो कहता है , दरबान बिठा लो,
हल्का सा बस हल्का सा वो कहता है तुम काजल लगा लो,
वेसे ये मेरा शौक नही,
पर हाँ उसे पसंद है…

दुपट्टा एक तरफ ही डाला है,
उसने कहा था,
कि सूट सादा ही पहन लो बेशक़ तुम्हारी तो सूरत से उजाला है,
तुम्हारे होठं के पास जो तिल काला है,
बताया था उसने, उसे पसंद है …

वो मिलता है ,तो हस देती हूं,
चलते चलते हाथ थाम कर उससे बेपरवाह सब कहती हूं,
और सोहबत मैं उसकी जब चलती है हवाएं,
मैं हवाओं सी मद्धम बहती हुं..
मन्नत पढ़ कर नदी मैं पत्थर फेंकना, 
मेरा जाते जाते यू मुड़ कर देखना,
ओर वो गुज़रे जब इन गलियों से , 
मेरा खिड़की से सज छत से यू छूपकर देखना,
हां उसे पसंद है…

झुल्फों को खुला ही रख लेती हूं,
उसके कुल्हड़ से चाय चख लेती हूं,
मैं मंदिर मे सर जब ढक लेती हूं,
वो कहता है उसे पसंद है…

ये झुमका उसकी पसंद का है,
और ये मुस्कुराहट उसे पसंद है,
लोग पूछते है सबब मेरी अदाओ का,
मैं कहती हूं उसे पसंद है…

ना ना बेटा, तुमसे ना हो पायेगा ये कॉपी