Ek Din Aisa Aayega Poerty by RJ Vashishth

Ek Din Aisa Aayega, Haan Ek Din Aisa Aayega by Rj Vashishth

एक दिन ऐसा आएगा, हाँ एक दिन ऐसा आएगा
जब तुम अपनी दुनिया में खुश, और मैं तुम्हारी दुनिया में खुश

हाँ एक दिन ऐसा आएगा, एक दिन ऐसा आएगा

जब ना तुम्हें मेरी परवाह होगी, और ना मुझे मेरी परवाह होगी


एक दिन ऐसा आएगा, हाँ एक दिन ऐसा आएगा

जब तुम किसी ओर के साथ खुश होगी, और मैं तुम्हें देखकर खुश होऊंगा

एक दिन ऐसा आएगा, हाँ एक दिन ऐसा आएगा

जब वो गाना तुम्हारे लिए सिर्फ एक गाना होगा,

और वो गाना मेरे लिए सिर्फ एक ही गाना होगा

एक दिन ऐसा आएगा, हाँ एक दिन ऐसा आएगा

जब गुलजार और चाँद की बातें बस बातें ही होगी,

और मेरी वो बात सुनके रात सारी रात रोयेगी

एक दिन ऐसा आएगा, हाँ एक दिन ऐसा आएगा

पर वो जब आता है तो आएगा ना,

अभी तो सिर्फ इतना है कि, मैं तुमसे प्यार करता हूँ

और तुम तुमसे प्यार करती हो

यानी की दोनों खुश है, तो ऐसे ही चलने देते है ना,

बाकी फिर देखा जायेगा, जब एक दिन ऐसा आएगा


Kitna Waqt Ho Gaya Hai by RJ Vashishth


Kitna Waqt Ho Gaya Hai Tumhari Aawaj Ko Sune,

Kitna Waqt Ho Gaya Hai us Khanak Ko Raton Me Bune..

कितना वक़्त हो गया है तुम्हारी आवाज को सुने..
कितना वक़्त हो गया है उस खनक को रातों में बुने..
कितना वक़्त हो गया है उस वक़्त का इंतज़ार करते..
कितना वक़्त हो गया है जिंदगी के उस शक्त को गुजरते..
कितना वक़्त हो गया है कि तुम्हे देखा नहीं..
कितना वक़्त हो गया है कि थामी हाथ की रेखा नहीं..
कितना वक़्त हो गया है कि एक पल के लिए ही सही,
कांच के गिलास से तेरी मेरी कहानी जुड़ चुकी है..
और कितना वक़्त हो गया है कि उसी कांच के गिलास से,
चाय कि भांप कहीं उड़ चुकी है..
कितना वक़्त हो गया है कि नब्ज़ कहीं थम सी पड़ी है..
और कितना वक़्त हो गया है कि मेरे बेजान से हाथ को थाम के,
तू अब जाके खड़ी है..
कितना वक़्त हो गया है


Kahan Tum Chale Gaye by RJ Vashishth


Chitthi Na Sandesh, Jaane Wo Konsa Desh,
Kahan Tum Chale Gaye..

चिट्ठी सन्देश, जाने वो कौनसा देश?
कहाँ तुम चले गए..
ना Msg किया ना कॉल किया..
पिछली रात का I love You का जवाब भी नहीं दिया..
जब कॉल किया तो फ़ोन स्विच ऑफ बताया..
मुझसे इतना भी क्यों रूठ गए..
कहाँ तुम चले गए..
हाँ गलती मेरी थी, मैं सामने से फ़ोन नहीं करता था..
Msg पढ़ने के बाद जवाब नहीं देता था..
हाँ यार खाना खा लिया है, क्यों एक ही सवाल हर बार..
हाँ गुस्सा भी बहुत करता था, पर उस बात का इतना क्यों रूठ गए..
कहाँ तुम चले गए..
अच्छा ठीक है, ये सब मजाक छोड़ दो, ठीक है..
I Am Sorry, अब से मैं गुस्सा नहीं करूँगा..
कॉल हमेशा मैं ही करूँगा..
जितना प्यार करता हूँ उसको कभी ना छुपाऊंगा..
बस तुम ये मजाक छोड़ दो और वापिस जाओ..
वापिस जाओ कि अब यहां जी नहीं लगता..
वापिस जाओ कि अब वक़्त नहीं कटता..
वापिस जाओ कि अब तुम्हारे बिना मुस्कुराने को जी नहीं चाहता..
वापिस जाओ कि अब जीने को जी नहीं चाहता..
वापिस जाओ………..


Main Tumhe Milunga Jarur Par Aaj Nahin by RJ Vashishth


Main Tumhe Milunga Jarur Par Aaj Nahin

मैं तुम्हे जरूर मिलूंगा..
हाँ मैं तुम्हे जरूर मिलूंगा, मगर आज नहीं..
क्योंकि आज तुम किसी उलझन में लगी पड़ी हो,
और मैं आज भी तुम में खुद को सुलझाने में पड़ा हुआ हूँ..
तो हाँ मैं तुम्हे मिलूंगा जरूर, पर आज नहीं..
क्योंकि आज भी तुम पतझड़ के पत्तो के पीछे भाग रही हो,
और आज भी मेरी आंखे तुम्हारा बारिश में इंतज़ार कर रही है..
नहीं, मैं तुम्हे नहीं मिलूंगा, आज तो नहीं मिलूंगा..
क्योंकि आज भी मैं किसी टपरी पे चाय के कप के धुएं में से तुम्हारा चेहरा देखता हूँ,
और तुम आज भी ठंडी कॉफ़ी के झाग में कहीं खोयी हुई सी हो..
तो हाँ मैं तुम्हे मिलूंगा तो जरूर, मगर आज नहीं..
क्योंकि आज भी जब मैं पीछे मुड़के देखता हूँ, तुम्हे ही पाता हूँ..
मगर जब तुम पीछे मुड़कर देखती हो, तुम पीछे मुड़के देखती ही कहाँ हो?
तो हाँ मैं तुम्हे मिलूंगा जरूर पर आज नहीं..


Bas Ab Bahot Hua by RJ Vashishth


Nahin Likhni Koi Kavita Ya Doha,

Bas Ab Bahut Hua..

बस अब बहुत हुआ..
नहीं लिखनी कोई कविता या दोहा,
बस अब बहुत हुआ..
नहीं कहने वो कहानी वो किस्से,
नहीं बाँटने काली रातों के अनछुए हिस्से,
नहीं दिखानी वो खारी सी नजर,
और नहीं जाना फिर से उसी यादों के शहर,
नहीं खिलाने वो झड़े हुए पत्ते,
और नहीं तैराने तूफानी समंदर में पोपले फट्टे,
नहीं करनी अकेले अकेले बात,
और नहीं करनी जहमत ताकि काटनी ना पड़े काली रात,
नहीं सुनने वो हीरो और रांझो के नगमे,
और नहीं जलना मन की कभी बुझने वाली आग में,
नहीं चाहूँ मैं वो मीत मधुर धानी,
मैं तो चाहूँ तेरी नजर की धड़कन,
जिसको पाके हो जाऊँ मैं फानी,
बस अब बहुत हुआ..


Thoda Sa Dard To Hai by RJ Vashishth


Haan Thoda Sa To Thoda Sa Dard To Hai..
Thoda Sa To Thoda Sa Pyaar To Hai..

हाँ थोड़ा सा तो थोड़ा सा दर्द तो है..
तेरे जाने से थोड़ा सा दर्द तो है,
तेरे वापस ना आने से दर्द तो है,
भले जरा सा ही सही पर दर्द तो है,
वो सीने से लिपट के मिलती बदन की गर्मी हो,
या तुझे देखे बिना देखने से मिलती मन की सर्दी हो,
आज भी वो सबकुछ है, पर सिर्फ यादों में..
उनको वापस ना पाते थोड़ा सा तो थोड़ा सा दर्द तो है..
हाँ अब फेसबुक पर तेरे चेहरे को देख तो सकते है,
पर लाइक नहीं कर सकते..
थोड़ा सा तो थोड़ा सा ईगो तो है..
हाँ अब तुझे स्नैपचैट पे सर्च करके,
यार ब्लॉक तो नहीं कर दिया ना
ऐसा करके तसल्ली कर सकते है,
पर अब ऐड नहीं कर सकते..
थोड़ा सा तो थोड़ा सा ऐटिटूड तो आज भी है..
पर उन सब के परे थोड़ा सा तो थोड़ा सा प्यार तो है..
मुस्कान देखें या खुद मुस्कुराएं,
इस बात का Confusion तो है..
थोड़ा सा तो थोड़ा सा प्यार तो है..
बात बात पे सेंटी सिंह होना,
और वही अलफ़ाज़ सुनने के लिए कुछ भी कर जाना,
भले ही आज उस बात पे थोड़ी हसीं आती हो,
पर उन बचकानी हरकतों में छुपी,
तेरे अटेंशन को पाने की चाह तो है..
भले गुस्से वाला ही सही, थोड़ा अकड़ू ही सही,
थोड़ा सा तो थोड़ा सा प्यार तो है..
पर अब बहुत हुआ, हां अब बहुत हुआ..
इन सब को ख़तम करने की चाह है..
बस एक ही आदत है जिसको ख़त्म करने की चाह है,
तुझे याद करते रहने की आदत,
तेरे ना होने पर तेरे होने को मानने की चाहत..
एक वक़्त के बदलने के बाद तू भी बदल जाएगी,
वापस जाएगी उस चाह की चाहत..
और फिर से वही मुस्कान देखने के लिए मैं फिर से मुस्कुराऊंगा,
और फिर से जिंदगी जियूँगा, उस जिंदगी की चाहत..
बस ये सब आदत है जिसको ख़तम करने की चाहत तो है..
पर रोक लेता हूँ खुद को,
क्योंकि थोड़ा सा तो थोड़ा सा, थोड़ा अकड़ू सा थोड़ा गुस्से वाला सा,
थोड़ा सा तो थोड़ा सा प्यार तो है..


Yaad Tumhari Laaye by RJ Vashishth


Yaad Tumhari Laaye, Yaad Tumhari Laaye..

ये खाली रातें, ये सुनसान सड़कें..
याद तुम्हारी लाये, याद तुम्हारी लाये..

भीड़ से भरा ये पूरा जहाँ,
चींटियारा यहाँ से वहां..
याद तुम्हारी लाये, याद तुम्हारी लाये..

उबासियों से आये आंखों में मेरी आंसू,
पूरी रात अकेले सोये मेरे बाजू..
वो खालीपन…..
याद तुम्हारी लाये, याद तुम्हारी लाये..

और बस धड़कन में कुछ अधूरापन,
नब्ज में चलता कछुआपन..
ये सब….
याद तुम्हारी लाये, याद तुम्हारी लाये..

ये खाली रातें, ये सुनसान सड़कें..
याद तुम्हारी लाये, याद तुम्हारी लाये..


Aazadi Ka Jashan by RJ Vashishth


Humne Aazadi Ka Jashan Mana Liya..

हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..
माँ एक ही दिन की तो छुट्टी मिलती है, सोने दे ना माँ
ऐसा कहते हुए भारत माँ को सोते सोते सलाम कर दिया..
हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..
जो शहीद हुए है उनकी, जरा याद करो कुर्बानी
ये गाते गाते, “Bro, Cheap Thrills, क्या सही गाना है यार, मजा गया
 हमने यह भी कह दिया..
और आज़ादी का जश्न मना लिया..
हैल्लो, हम उनके जैसे नहीं है, ठीक है..
हमने तो सुबह उठके फ्लैग होस्टिंग किया,
और उसके बाद टीवी पे परेड भी देखी..
बस इतना कहके रास्ते पे थोड़ा कचरा भी फेंक दिया..
आज़ादी है भाई, हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..
अरे यार,  Is it 69th or 70th..
भाई क्या फर्क पड़ता है, Just Type Happy Independence Day..
ऐसे Confusion में हमने आज़ादी को Fusion बना दिया..
हाँ हमने आज़ादी का जश्न मना लिया..


Maa Teri Yaad Bahut Satati by RJ Vashishth


Maa Teri Yaad Bahut Satati, Maa Teri Yaad Bahut Satati..

माँ तेरी याद बहुत सताती..
रात को देरी से सो जाऊँ तो अब डाँट नहीं सुनाती..
सुबह को जल्दी उठाने के लिए अब कोई आवाज नहीं आती..
बाहर का खाना अच्छा नहीं है, मत खा
ऐसा कई बार सुना था..
आज तुझसे दूर है तो शौंक से या फिर,
मजबूरी में बाहर का खाना खाते है..
पर जीभ से तेरे हाथो से बनी रोटी की मिठास नहीं जाती..
कंगन की खनक नहीं सुनाई पड़ती..
बेटा जल्दी घर जाना, रात को ठंड लगेगी, स्वेटर लेके जा
आज जब भी ऑफिस से घर वापिस जाते ठंड लगती है,
तब माँ तेरी वो बात जरूर याद आती है..
माँ तेरी हर बात जरूर याद आती है..
बेपरवाही से बीमार पड़ता तो रो रो के दवाई लेकर आती..
बुखार को भगाने तू रात भर गीले कपडे लगाती..
मुझे पहले खिलाती, खुद ना खाती..
ना जाने क्यों आज बुखार लाने की बचकानी चाह दिल से आती..
माँ तेरी याद बहुत सताती, माँ तेरी याद बहुत सताती..


Purana Khat by Rj Vashishth


Ek Purana Sa Khat Mila Hai Aaj.
Thoda Phat Sa Gya Hai, Thoda Peela Pad Gya Hai..

एक पुराना सा खत मिला है आज..
थोड़ा पीला पड़ गया है..
उसके लफ्ज़ भी जैसे पीलिये से हो गए है..
एक पुराना सा खत मिला है आज..
आंखे छोटी करके पढ़ना पड़ता है उसको,
एक पुराना सा खत मिला है आज, थोड़ा फट सा गया है..
जैसे दिल के खवाहिश के परे जाके उसे किसी ने फाड़ दिया हो..
जरा देखे तो सही इसमें कौन कौन से लम्हे टांके है..
लिखा हैबात है एक रात की,
जब पहली बार उस शख्श को मिलने का मौका मिला था..
बाहर जैसे पूरा शहर नए साल को मनाने के लिए पागल हुए जा रहा था,
और ये बेचारा पहली बार मिलने के जश्न में बावला हुए जा रहा था..
एक पुराना सा खत मिला है आज, थोड़ा फट सा गया है..
लिखा है, जब पहली बार तुम्हे देखा था तो लगा था,
कि नए साल की तरह जिंदगी का भी एक नया सिरा शुरू हो रहा है..
बस इसे यही थमा दूँ..
थाम लूँ वो नफ़्ज़ जिसे सिर्फ तुम्हारी धड़कन महसूस कर पाए..
एक पुराना सा खत मिला है..
जब शराब के नशे में पूरा शहर अनाप शनाप बके जा रहा था,
तब मैं तुम्हारी आँखों के नशे से कायल हुए यहां वहां बिखरा पड़ा था..
बिलकुल उस पत्ते की तरह, हाँ बिलकुल उस पत्ते की तरह,
जो तुम्हारी खिड़की के पास आके उसी पेड़ से गिरता था..
बिलकुल उस पत्ते की तरह यहां वहां बिखरा पड़ा था..
एक पुराना सा खत मिला है..
जब पहली दफा उन होंठो को छुआ था तो ऐसा लगा था,
कि आज ये लम्हा यही पर कैद कर लूँ..
तुझे मुझमे कैद कर लूँ और खुद रिहा हो जाऊँ जिंदगी से..
तुझे मुझमे कैद कर लूँ और खुद ही रिहा हो जाऊँ जिंदगी से..
एक पुराना सा खत मिला है, थोड़ा फट सा गया है..


Baap Ka Maal Samjha Hai Kya?