Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai by Goonj Chand

the digital shayar

Har Aurat Samaj Ki Dabai Nazar Aati Hai by Goonj Chand

लोग कहते है इस औरत में हमे खुद्दारी नज़र आती है..
और अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..
और क्या उम्मीद रखी जाये उन मर्दो इस दुनिया में भला…
जिन्हे अपने आगे हर औरत हारी नजर आती है..
इसीलिए अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

वो क्या समझेंगे किसी की ख्वाइशो को भला,
जिन्हे केवल पूरे कपड़े पहनने लड़किया ही खानदानी नज़र आती है…
और किसी भी औरत को कमजोर समझने की गलती मत करना…
क्योंकि वक़्त आने पर वही औरत काली नज़र आती है..
अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

इज़्ज़त दो औरत को व्याह कर लाये हो खरीद कर नहीं,
क्योंकि खरीदारी के नाम पर तो यह दहेज़ की दूकान दारी नज़र आती है..
और समाज का डर है यहां अपनी खुशियों से ज्यादा…
हर औरत यहां समाज की दबाई नज़र आती है…
अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

अब बंद करो हर बात पे रोना और स्टैंड लो खुद के लिए,
क्योंकि इसी में खुद की खुद्दारी नज़र आती है..
अपने उसूलों पे चलती हूँ मैं,
इसमें मुझे खुद की ईमानदारी नज़र आती है..

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