Kaash Ki Main Tujhe Apne Saath Rakh Sakta by Amit Auumkaar

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Kaash Ki Main Tujhe Apne Saath Rakh Sakta
Kisi Meharbaani Ki Tarah…

 काश कि मैं तुझे अपने साथ रख सकता किसी मेहरबानी कि तरह..
मेहरबानी जो कुछ पलों के लिए ही की थी उस खुदा ने मुझपर तुझसे मिलाकर मुझे..
वो पल जो गुजर रहे है मेरे ना चाहते हुए भी,
काश कि मैं तुझे अपने साथ रख सकता किसी परेशानी की तरह,
परेशानी जो ताउम्र रहेगी मेरे मन में तुझे ना पाने की वजह से..

काश कि मैं अपनी किस्मत की बेईमानी को बदल पाता..
काश कि मैं तुझे अपने साथ रख सकता किसी बेईमानी की तरह..
बेईमानी जो मेरी किस्मत ने की तुझसे ना मिलाकर,
बेईमानी जो मेरी किस्मत ने की मेरे साथ तुझसे दूर करके मुझे,
तुझे जाते हुए देखने के लिए मजबूर करने के लिए मुझे,

मेरे चेहरे की चमक बन जाती है तू जब भी मिलता हूँ तुझे,
नया सा हो जाता हूँ मैं जब भी मिलता हूँ तुझे..
काश कि तुझे मैं अपने साथ रख सकता अपने चेहरे की चमक उस पेशाने की तरह,
काश कि मैं तुझे अपने साथ रख सकता उस खुदा की मेहरबानी कि तरह..

ये पल दो पल का साथ ऐसी यादें देने वाला है जो हमेशा साथ रहेंगे मेरे..
तुम तो चली जाओगी मगर फिर भी ये यादें हमेशा पास रहेंगे मेरे..
एक रेगिस्तान सा हो गया हूँ मैं और बरस रही है तू किसी पानी की तरह..
काश कि मैं तुझे अपने साथ रख सकता अपनी खुशकिस्मती कि निशानी की तरह..
काश कि मैं तुझे अपने साथ रख सकता किसी मेहरबानी की तरह..

~Amit Auumkaar

 

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