Ladke Bhi Rote Hai Jab Ghar Se Dur Hote Hai by Satyendra Kumar

the digital shayar
Ghar Me Bacche Lekin Bahar Mashoor Hote Hai..
Aji Ladke Bhi Rote Hai Jab Ghar Se Dur Hote Hai..

घर में बच्चे लेकिन बाहर मशहूर होते है..
अजी लड़के भी रोते है, जब घर से दूर होते है..

लड़के भी घर से बाहर मम्मी पापा के बगैर होते है..
यदि लड़की घर के लक्ष्मी तो लड़के भी कुबेर होते है..
बस यादें ही जा पाती है अपने गांव जमीनों तक,
लड़के भी कहाँ घर जा पाते है..
कई साल महीनो तक, अपनों के सपनो के खातिर ये भी मजबूर होते है..
अजी लड़के भी रोते है, जब घर से दूर होते है..

हमेशा सोचते है घर के बारे में, पर खड़े कहीं और होते है..
सिर्फ लड़कियां ही नहीं लड़के ही दिल से कमजोर होते है..
विश्व जीतने का एक सिकंदर इनमे भी होता है..
बस रोते है पर एक समंदर इनमे भी होता है..
यदि लड़की पापा की परी तो लड़के भी कोहिनूर होते है..
अजी लड़के भी रोते है, जब घर से दूर होते है..

माना कि लड़कियों को घर छोड़ जाने का एक डर होता है..
लेकिन इनका एक घर के बाद दूसरा घर होता है..
माना कि लड़को को कोई डर नहीं होता..
ये नौकरी तो करते है कई शहरों में, मगर इनका कोई घर नहीं होता..
चंद पैसो के खातिर इनके सपने भी चूर होते है..
अजी लड़के भी रोते है, जब घर से दूर होते है..

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