Maa Poetry by Ankit Guryan – Mother’s Day Special

the digital shayar
माँ तुम ही थी वो,
जिसकी ख़ुशी मेरी हंसी से थी..
जिसका दुःख मेरे दुःख से था..
और एक मैं था पागल नासमझ,
जो कभी कभी तुम्हे Hurt किया करता था..

हाँ ये सच हैहाँ ये सच है माँ,
कि मैं कभी कभी तुम्हे Hurt किया करता था..
लेकिन थोड़ी देर बाद माफ़ी भी तो मांग लिया करता था..
माँ एक तुम ही थी इस पूरी दुनिया में,
जो मुझे इतना प्यार किया करती थी..
क्योंकि मेरी गलती छोटी हो या बड़ी,
तुम हर बार माफ़ कर दिया करती थी..

माँ मुझे आज भी याद है,
माँ मुझे आज भी याद है..
जब तू रोटी बनाया करती थी.
खाना खिलाने के लिए प्यार से मुझे बुलाया करती थी..
तू मेरी कितनी फ़िक्र करती है,
ये बात भी मुझे तभी पता चलती थी..
जब खुद खाने से पहले तू मुझे खिलाया करती थी..
मुझे बहुत रोना आता था माँ,
मुझे बहुत रोना आता था माँ..
क्योंकि मुझे खिलाने के बाद,
कभी कभी तू खुद भूखी सो जाया करती थी..

माँ मुझे आज भी याद है,
जब मैं बीमार हुआ करता था..
तू ही सबसे ज्यादा परेशान रहा करती थी..
मैं लेटा रहता था चारपाई पर,
और तू मेरी सिरहाने बैठकर मेरा सिर सहलाया करती थी..
चोट लगती थी कभी जब मुझे,
मेरे जख्मो पर मरहम तू ही लगाया करती थी..
दर्द होता था मुझे हमेशा लेकिन,
आँखों में आंसू लेकर तू रोया करती थी..

माँ आज मैं सोचता हूँ,
जब मैं तुझसे इतना दूर हूँ..
तो तू कैसे रहती होगी?
वो सुख दुःख की बातें जो हम आपस में किया करते थे..
अब तू किसके साथ किया करती होगी?
दिल को समझाने के लिए हम फ़ोन पर बात भी कर लेते है,
लेकिन मैं जनता हूँ माँ,
फ़ोन कट हो जाने के बाद तू जरूर रोया करती होगी..

माँ जिंदगी में हम कितने मजबूर हो गए..
कि एक दूसरे से इतने दूर हो गए..
माँ अब नहीं रहा जाता तुमसे दूर,
मैं हमेशा की तरह तुम्हारे गले लगना चाहता हूँ..
मुझे कुछ और नहीं चाहिए माँ अब,
बस बचपन के जैसे तुम्हारी गोद में,
सिर रखकर सोना चाहता हूँ..

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