Main Friendzone Bankar Reh Gaya by Ankit Guryan

Uski Kahi Huyi Saari Baaten Mujhe Bahut Dard De Rahi Thi,
Par Main Uske Kahe Har Ek Lafaz Ke Dard Ko Seh Gaya..
Pyar Se Jyada Meri Dosti Pyari Thi Use,
Isliye Maine bhi Dosti Ko Kabool Kiya,
Aur Main Friendzone Bankar Reh Gaya..

पहली बार मैंने उसे लाइब्रेरी में देखा था..
मैं अपने दोस्तों के साथ बैठा था,
और वो अपनी सहेलियों के साथ Gossip कर रही थी.
उसकी खुली हुई जुल्फें और काली काली आंखे,
ना जाने क्यों मुझे बार-बार Hypnotize कर रही थी…
खैर मैं जानता नहीं था उसे,
पर फिर भी आज मेरी निगाहें बस उसी पे टिकी थी..
यूँ तो बंदा मैं सख्त था,
पर उस दिन मेरी सख्ती टूट चुकी थी..
शाम को मैं घर गया और मैंने फेसबुक ओपन की..
ज्यादा मुश्किल नहीं हुई मुझे उसे ढूंढने में,
और एक दोस्त की फ्रेंड लिस्ट में मुझे वो नजर आ गयी..
मैं काफी देर तक उसकी तस्वीर को निहारता रहा..
चूँकि आजतक किसी Unknown लड़की को Request भेजी नहीं थी मैंने,
इसलिए Add Friend पर Click करने से पहले मेरा अंगूठा भी कांपता रहा..
मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे मेरे,
“पता नहीं Request Accept करेगी भी या नहीं,
अगर डिलीट कर दी, तो दोबारा Add भी नहीं कर पाउँगा..
कहीं मेरे किसी दोस्त को तो नहीं बता देगी,
वो सब के सब कमीने है साले, मेरी बड़ी मजाक लेगे.
“वगैरह वगैरह”
खैर मैंने हिम्मत दिखाई, माता रानी का नाम लिया,
और Request भेज दी..
अब मुझे बस Request Accept होने का इंतज़ार था..
क्योंकि मेरा दिल उससे बातें करने को बड़ा बेकरार था..

3 दिन बीत चुके थे,
मैंने उसकी Profile को Check किया,
मलाल था मेरे दिल में क्योंकि उसने मेरे Request Accept नहीं की थी..
लेकिन साथ में एक छोटी सी ख़ुशी भी थी,
क्योंकि डिलीट भी तो नहीं की थी..
दिन हफ़्तों में बदलने लगे, हफ्ते महीनो में बदल गए..
महीने भी कहाँ रुकने वाले थे,
और अब एक साल से जयादा हो गया था..
मुझे Request भेजे हुए एक साल से ज्यादा हो गया था..
अब मैं भी उसकी यादों से निकलकर,
खुद की ज़िन्दगी में खो गया था..
मेरे कॉलेज के इम्तिहान के साथ,
मेरा कॉलेज भी पूरा हो गया था..
और अब वो वक़्त आ गया था,
जब मुझे ज़िन्दगी के इम्तिहान देने थे..
एक बूढी माँ थी घर में, एक छोटा भाई था..
घर में बड़ा तो मैं ही था,
इसलिए भाई के सपने मुझे ही पुरे करने थे..
यूँ तो दिल्ली शहर इतना भी बुरा नहीं था..
पर पता नहीं क्यों घर से दूर रहना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था..
कुछ दिन पराये शहर में धक्के खाये, इंटरव्यू दिए,
और Finally एक Job मिल गयी..
6 दिन ऑफिस होता था और Sunday Off मिलता था..
बहुत Busy हो गयी थी मेरी लाइफ,
खुद के बारे में सोचने तक का वक़्त नहीं मिलता था..

खैर उस दिन Sunday था..
मैं घर पर आराम से लेटा हुआ था..
तभी मेरे फ़ोन पर नोटिफिकेशन Bell बजी..
मैं फ़ोन उठाया और Check किया तो मुझे यकीन नहीं हुआ,
क्योंकि नोटिफिकेशन फेसबुक से आयी थी,
और लिखा था –
“Divya has Accepted Your Friend Request”

साथ में एक Message भी था,
जिसमे Hii लिखा हुआ था..
मैंने तुरंत रिप्लाई किया,
और हमारे बीच बातें होना शुरू हो गयी..
मुझे यकीन नहीं हो रहा था,
कि एक लड़की किसी Unknown बन्दे से,
कैसे इतने अच्छे से बात कर सकती है?
लेकिन बात तो कुछ और ही थी,
क्योंकि वो तो पहले से ही मेरे बारे में,
मेरे दोस्त से सबकुछ जान चुकी थी..
जोकि सौभाग्य से या दुर्भाग्य से, जैसे भी कहो,
उसका भी दोस्त था..

अब धीरे धीरे हम एक दूसरे के बारे में बहुत कुछ जानने लगे थे..
दिन से शुरुआत होती थी और देर रात तक बातें करने लगे थे..
उसके आने के मुझे अपनी ज़िन्दगी काफी हसीन लगने लगी थी..
आवाज तो अभी तक सुनी ना थी मैंने उसकी,
लेकिन बातें वो बहुत प्यारी करने लगी थी..
अब तो मैं हमेशा के लिए बस उसी से बातें करना चाहता था..
बेक़रार था मैं और उसकी आवाज सुनना चाहता था..
इसलिए एक दिन मैंने हिम्मत दिखाई,
और उसका नंबर मांग लिया..
मुझे बहुत बुरा लगा, क्योंकि उसने साफ़ मना कर दिया..
लेकिन मैंने अपना नंबर Msg किया और लिखा –
“अगर मुझपर विश्वास है तो मुझे Whatsapp कर देना,
नहीं तो मुझे फेसबुक पर Block कर देना.”
यूँ गुस्से में Msg करके मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था..
लेकिन करता भी क्या मैं,
मुझसे अब बिल्कुल भी इंतज़ार नहीं हो रहा था..
कुछ देर बाद मुझे एक नए नंबर से Whatsapp आया,
Msg में लिखा था –
“Hey Ankit, Divya Here”

हमारी बातों का सिलसिला अब कुछ ज्यादा हो गया था..
आवाज तो अभी भी सुनी ना थी मैंने उसकी,
लेकिन नंबर मिलने से मेरे बैचैन दिल को चैन मिल गया था..

खैर यूँ ही कुछ दिन बीत गए..
और मैंने एक दिन उसको कॉल के लिए पूछा..
उसने मुझे मना कर दिया और कहा –
“I will call you As soon As Possible”
मैंने भी ज्यादा Force नहीं किया,
और उसके कॉल का इंतज़ार करने लगा..
खैर उसी दिन माता रानी की कृपा हुई,
और शाम को मेरा फ़ोन जोरो से बजा..
उसने मुझे कॉल किया था..
मैंने फ़ोन उठाया और बस उसकी बातें सुनने लगा..
वो बोले जा रही थी और मैं चुपचाप,
बस उसकी आवाज को सुने जा रहा था..
काश मेरे पास कोई शक्ति होती,
तो मैं वक़्त को वहीं रोक देता,
और ताउम्र बस उस खूबसूरत एहसास,
और उस हसीन लम्हें को जी लेता..

अब हमारे बीच बातें पहले से कुछ ज्यादा होने लगी थी..
अपनी Problems भी वो मुझसे Share करने लगी थी..
उसकी Help करने को मैं हमेशा तैयार रहता था..
अब तो हमेशा के लिए मैं बस उसी का साथ चाहता था..
उसके इश्क़ का जूनून मुझपर कुछ यूँ होने लगा था..
मैं ना चाहते हुए भी उसकी DP पर Love React करने लगा था..
यूँ तो बहुत दूर थे हम एक दूजे से,
लेकिन बातों में दूरियां कम होने लगी थी..
मैं मरता क्या ना करता,
आखिर वो भी तो मुझे अब “I Love You” बोलने लगी थी..
हमारे बीच बातों का सिलसिला कुछ इस कदर बढ़ गया था..
कि 4 साल बीत चुके थे और हमें पता भी ना चला था..
यूँ तो इन 4 सालों में हमारे बीच थोड़ी बहुत लड़ाइयां भी हुई थी..
कई दिनों तक चलने वाली रुसवाइयाँ भी हुई थी..
मेरे रूठने पर वो मुझे बहुत प्यार से मनाया करती थी..
और खुद के रूठ जाने पर वो मुझे बहुत सताया करती थी..
अब मुझसे इंतज़ार नहीं हो रहा था,
और मुझे उससे अपना इज़हार-ए-इश्क़ करना था..
बेक़रार था मैं उससे मिलने को,
क्योंकि अब सारी उम्र उसी के संग चलना था..
इसलिए मैंने एक दिन उससे मिलने के लिए पूछ लिया..
उसने मुझे मना नहीं किया और हाँ बोल दिया..
उसने मुझे मिलने के लिए एक अनजान सा पता बताया था..
उस दिन मैं बहुत खुश था,
क्योंकि उसने मुझे अपने शहर बुलाया था..

आज हम 4 साल में पहली बार मिलने वाले थे..
कुछ राज़ जो दिल में दफ़न थे,
आज सरेआम खुलने वाले थे..
मैं उसे इंतज़ार नहीं कराना चाहता था,
इसलिए मैं उसके आने से पहले ही पहुँच गया..
कुछ ही देर में उसने दस्तक दी,
और वो मेरे सामने आकर बैठ गयी..
मुझसे मिलकर वो बस मुस्कुराये जा रही थी..
मैं नजरें तक ना मिला पा रहा था उससे,
मेरी जान निकली जा रही थी..
लेकिन क्या करता मैं,
लेकिन क्या करता मैं,
थोड़ी हिम्मत तो मुझे भी दिखानी थी..
जो बात 4 साल से मेरे दिल में थी,
वो आज उसे बतानी थी..
मैंने एक गहरी सांस ली,
और फिर मैं उसकी आँखों में देखने लगा..
एक ही बार में अपने दिल की सारी बातें बोल दी मैंने,
और खामोश हो गया..
बहुत डर लग रहा था मुझे,
और मानो वक़्त तो जैसे ठहर सा गया था..
लेकिन मेरी बात पर उसने कोई Over React नहीं किया..
शायद दोस्त ही था मैं उसकी नजरों में,
इसलिए उसने मुझे Cheat नहीं किया..
वो बहुत प्यार से मुझे समझाने लगी..
हमारे दोस्ती के रिश्ते की अहमियत को मुझे बताने लगी..
उसने मुझे हमेशा एक अच्छा दोस्त माना है..
वो मुझे बस यही बात बताती रही..
उसके बारे में मुझे जो गलतफहमी थी,
वो पर्दा भी मेरी नजरों से हटाती रही..
उसकी कही हुई सारी बातें मुझे बहुत दर्द दे रही थी..
पर मैं उसके कहे हर एक लफ्ज़ के दर्द को सह गया..
प्यार से ज्यादा मेरी दोस्ती प्यारी थी उसे,
इसलिए मैंने भी दोस्ती को कबूल किया,
और मैं Friendzone बनकर रह गया..


उस दिन मैं सारी कश्मकश से आज़ाद हो गया था..
उसके I Love You के सच्चे मतलब को समझ गया था..
क्योंकि उस दिन से पहले मैं उसके Love You को कभी समझ ही नहीं पाया,
और हमेशा ही उसका अलग मतलब निकलता रहा..
वो तो मुझे अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती थी,
और मैं पागल उसे अपनी ज़िन्दगी का हमसफ़र मानता रहा..

~Ankit D perfect Guryan

 

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