Mera Ego Kyun Hurt Ho Jata Hai by Vihaan Goyal

the digital shayar
facebook Par Anjaan Logo Se Baat Karne Main Mujhe Bada Maza Aata Hai,
Par Apne Chacha Or Tau Ke Bacchon Se Baat Karne me,
Mera Ego  Kyun Hurt Ho Jaata Hai?

फेसबुक पर अनजान लोगों से बात करने में मुझे बड़ा मजा आता है,
पर अपने चाचा और ताऊ के बच्चों से बात करने में,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

गोवा के Beach पर मेरी गर्लफ्रेंड बिकनी पहनकर मेरे साथ घूमती है,
Hot है भाई Hot,
लेकिन किसी दिन मेरी बहन अगर Crop Top पहनकर कॉलेज चली जाये तो,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

Animal Love के नाम पर मैं कुत्ते बिल्लियों को रोज दूध बिस्कुट खिलाता हूँ..
पर Signal पर कोई भूखा बच्चा आकर, मेरी गाडी का शीशा खटखटा दे तो,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

15 अगस्त, 26 जनवरी और इंडिया पाकिस्तान के मैच में,
मुझसे ज्यादा जय हिन्द के नारे कोई नहीं लगता है..
लेकिन Theater में National Anthem पर खड़ा होने में,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

जानते होजब मैं छोटा था , तो पापा मेरी उँगलियाँ पकड़कर मुझे चलना सिखाते थे..
और गिरकर कभी रोने लगता था , तो मुझे अपने कंधे पर बैठा लेते थे..
पर अब कभी रात को अगर पापा, मुझे पैर दबाने के लिए कह देते है तो,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

हर weekend पार्टी, दारू, नए कपडे अपना खर्चा है भाई..
पर 500 रुपए देकर अपने दादा जी का चश्मा ठीक कराने में,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

मैं हिन्दू हूँ, मैं हिन्दू हूँ, सारी पूजा पाठ करता हूँ..
लाऊड स्पीकर पर भजन बजाता हूँ..
पर किसी सुबह अजान की आवाज से मेरी नींद टूट जाये तो,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

जब तक मैं घर में रहता हूँ ,
मजाल है कोई मेरे हाथ से रिमोट छीन कर दिखाए,
सारा दिन स्पोर्ट्स के चैनल चलाता हूँ..
पर माँ मेरे हाथ से रिमोट लेकर छोटे भाई को देदे तो,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

मैं ट्रेन और बस में कभी खड़े होकर सफर नहीं करता हूँ,
बैग फेंककर ही सीट पर कब्ज़ा कर लेता हूँ..
लेकिन कोई बुजुर्ग या महिला आकर, मुझसे वो सीट छोड़ने को कह दे तो,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

मेरी बिल्डिंग का सफाईवाला,
साले को तभी सफाई करनी होती है,
जब मुझे कहीं जाना रहता है..
फिर जूते के निशान पड़ते है तो मुँह फूलता है,
लेकिन किसी दिन उसे गले लगाकर सॉरी बोलने में,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

मैंने English, French, Germen के सारे बड़े बड़े राइटर्स को पढ़ा है,
सोसाइटी में standard बना है अपना..
लेकिन गोस्वामी तुलसीदास, रविंद्रनाथ टैगोर
या हरिवंशराय बच्चन को पढ़ने में,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

जानते हो हमारे अंदर ये Ego कब आता है, जब हम अपने आप को बहुत बड़ा मान लेते है और सामने वालों को उतना ही छोटा..लेकिन सामने वाला हमको इतना बड़ा नहीं मानता ना, तो हमारे अंदर ये Ego जाता है..मेरी सिर्फ आप लोगों से यही Request है कि सबको Equal रखिये वरना हमें इस सवाल का जवाब कभी नहीं मिलेगा कि,
मेरा Ego क्यों Hurt हो जाता है?

 

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