Nafraton Ka Sandook by Goonj Chand

the digital shayar
Bahut Madad Karta Hai Ye Nafraton Ka Sandook,
Jab Bhi Khulta Hai 2-4 Kavitayen De Hi Jata Hai..

बहुत मदद करता है ये नफरतों का संदूक,
जब भी खुलता है 2-4 कवितायेँ दे ही जाता है..
मैं तो बस अपना दर्द बयां करती हूँ,
उसी बहाने बहुतो का दिल बहल जाता है..

जब प्यार ना हो जिंदगी में तो नफरत भी दवा कर देती है,
कभी कभी नफरत भी अपनी कैद से कुछ अच्छे पल रिहा कर देती है..
कुछ पल के लिए ही सही इस दिल को कुछ सुकून तो मिल जाता है,
बहुत मदद करता है ये नफरतों का संदूक,
जब भी खुलता है 2-4 कवितायेँ दे ही जाता है..

नफरत का भी वैसे अपना मजा है इस ज़िन्दगी में,
प्यार से ही कौनसा सबका भला हुआ है इस ज़िन्दगी में..
और वैसे भी प्यार के बाद ही तो ये अपनी औकात दिखा पाता है..
बहुत मदद करता है ये नफरतों का संदूक,
जब भी खुलता है 2-4 कवितायेँ दे ही जाता है..

लोग कहते है कि आखिर क्यों इतनी नफरत भरी है मैंने अपने दिल में,
क्यों नहीं है जगह प्यार के लिए इस दिल में..
पर उन्हें ये कैसे बताऊँ कि इन्ही नफरतों में तो मुझे प्यार नजर आता है..
बहुत मदद करता है ये नफरतों का संदूक,
जब भी खुलता है 2-4 कवितायेँ दे ही जाता है..

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ना ना बेटा, तुमसे ना हो पायेगा ये कॉपी