Papa Ki Chai by Goonj Chand

the digital shayar
Bahut KhushNasib Hote Hai wo Log,
Jinhe Subah Chai Ke Gilash Ke Sath Unki Maa Uthaya Karti Hai..
Par Unse Bhi Jayada KhushNasib Hun Main,
Kyonki Meri Subah To Mere Papa Ki Chai Banaya Karti Hai..

बहुत खुशनसीब होते है वो लोग,
जिन्हे सुबह चाय के गिलास के साथ उनकी माँ उठाया करती है..
पर उनसे भी ज्यादा खुशनसीब हूँ मैं,
क्योंकि मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..

उठ जा बेटा सुबह हो गयीजब ये कहकर आप मुझे उठाया करते हो..
बहुत ही खुश हो जाती हूँ मैं, जब आप इस कदर अपना प्यार जताया करते हो..
और आपकी ये पागल बेटीथोड़ी देर और सोने दो ना पापा
ऐसा कहकर अपने मुँह पर चादर डाला करती है..
इसी तरह वो भी अपना प्यार जताया करती है..
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..

माँ के पूछने पर खाना क्या बनाऊं, आप तुरंत मुझसे पूछा करते हो..
और अपनी कोई पसंद नहीं, सिर्फ मेरी ही फ़िक्र करते हो..
तब आपकी ये पागल बेटी एक एक करके अपनी फरमाइशें गिनाया करती है..
और इसी तरह नखरे दिखा वो भी अपनी बात मनाया करती है..
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..

जब गुस्सा करे मम्मी मुझपर तो आप तुरंत मनाया करते हो..
और तेरी मम्मी तो पागल हैआंख मारकर ये जुमला भी दोहराया करते हो..
तब आपकी ये पागल बेटी खुश होकर मम्मी को चिढ़ाया करती है..
और इसी तरह नखरे दिखा वो भी अपना प्यार जताया करती है..
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..

दूर हूँ अब आपसे तो खुद ही बना लेती हूँ चाय..
और हूँ कहीं बाहर तो पी लेती हूँ नागोरी की चाय..
पर ये सब चाय तो सिर्फ नींद भगाया करती है
मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..

बहुत खुशनसीब होते है वो लोग,
जिन्हे सुबह चाय के गिलास के साथ उनकी माँ उठाया करती है..
पर उनसे भी ज्यादा खुशनसीब हूँ मैं,
क्योंकि मेरी सुबह तो मेरे पापा की चाय बनाया करती है..

 

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