Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun by Goonj Chand

the digital shayar

Tu Hai Agar Dhokebaz To Main Bhi Bazaru Nahi Hun by Goonj Chand

किसी के लिए दे दूँ अपनी जान इतनी भी हारी नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

तू है अगर धोकेबाज़ तो मैं भी बाज़ारू नहीं हूँ…
और तू है अगर कूल डैशिंग बाँदा तो में भी अबला नारी नहीं हूँ…
है अगर मोहब्बत निभाने का दम रखता है तू,
तो में भी ऐसी मोहब्बत में पीछे हटने वाली नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

गेडिया मारता है अगर तू रातो में सड़को पर,
तो मैं भी तेरा इंतज़ार करने वाली नहीं हूँ…
और दारु पीकर लेट आने की आदत है तुझे,
तो मैं भी तेरे लिए घर का गेट खोलने वाली नहीं हूँ…
हाँ अगर जनता है तू औरत की इज्ज़त करना,
तो मैं भी तेरी प्राइवेसी छीनने वाली नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

तू है अगर बात बात पे गाली देने वाला,
तो मैं भी चुप होकर सुनने वाली नहीं हूँ..
तू होगा राजा बेशक अपने घर में मगर,
पापा की रानी हूँ मैं भी तेरी नौकरानी नहीं हूँ…
और तू है अगर बीवी का ख्याल रखने वाला,
तो मैं भी किसी के आगे तेरा सर झुकाने वाली नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

किसी के लिए दे दूँ अपनी जान इतनी भी हारी नहीं हूँ…
और मोहब्बत निभानी वाली हूँ जनाब मोहब्बत की मारी नहीं हूँ…

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