Tum Samajhti Kyon Nahi by Vihaan Goyal

the digital shayar
Main Dekhta Hun Tumhe Shahrukh Ki Tarah..
Tum Kajol Ki Tarah Palatati Kyon Nahi..
Yaar Tum Samajhti Kyon Nahi..

मैं देखता हूँ तुम्हे शाहरुख़ की तरह,
तुम काजोल की तरह पलटती क्यों नहीं..
यार तुम समझती क्यों नहीं..

मैं तुम्हारे ख्यालों में खेलता हूँ विराट की तरह..
तुम अनुष्का की तरह मेरा कैच लपकती क्यों नहीं..
यार तुम समझती क्यों नहीं..

इतना भाव क्यों खाती हो, अच्छा दिखता हूँ, बैंक बैलेंस है..
गिटार बजाता हूँ, शायरी भी लिखता हूँ..
तुम्हारी हर DP पर दिल वाला लाइक दूंगा..
मेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट Accept करती क्यों नहीं..
यार तुम समझती क्यों नहीं..

मेरी बाइक पर बैठ जाना, जस्ट होल्ड में टाइट..
हाई स्पीड में चलाऊंगा, गोवा बीच की होगी राइड..
शॉपिंग भी करवाऊंगा, मुझे देखकर जुल्फें झटकती क्यों नहीं..
यार तुम समझती क्यों नहीं..

फर्स्ट डे फर्स्ट शो दिखाऊंगा, फाइव स्टार में खिलाऊंगा..
कोई घूरे तुम्हें उसके कान पे बजाके सॉरी बुलवाऊंगा..
तुम्हारा फादर फिगर बन जाऊंगा,
मेरे हाथों में अपने हाथ रखती क्यों नहीं..
यार तुम समझती क्यों नहीं..

तुम्हारे भाई को जॉब दिलवाऊंगा, मम्मी को बनारसी साडी..
तुम्हारे पापा को दिलाके दवाई दूर कर दूँ हर बिमारी..
अपने घरवालों से मुझे Introduce करती क्यों नहीं..
यार तुम समझती क्यों नहीं..

धुप जो तेरा रूप बिगाड़े, तो बादल हो जाऊंगा..
अगर सर्दी आये तेरे आड़े, तो कम्बल हो जाऊंगा..
मेरे होंठो पर अलफ़ाज़ की तरह ठहरती क्यों नहीं..
तुमसे प्यार हो गया है यार..
यार तुम समझती क्यों नहीं..

 
 

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