Uthi Jo Ek Nazar Uspar To Katleaam Kar Dungi by Goonj Chand

the digital shayar
Uthi Jo Ek Nazar Uspar To Katleaam Kar Dungi…

उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी,
और उसको नीचा दिखाने की कोशिश की तो तुझको बदनाम कर दूंगी..
और अब दिख भी गया उसके रास्ते में तो सोच लेना,
तेरी गली में आके बवाल कर दूंगी..
उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी…

मैं खामखा तुझसे सवाल कर दूंगी..
तेरी नींद तेरा चैन, सब हराम कर दूंगी..
और मेरे प्यार पर उंगली उठाने की हिम्मत मत करना,
वरना खामखा तुझको नीलाम कर दूंगी..
उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी…

मांगेगा माफ़ी तो माफ़ कर दूंगी..
वरना तेरे दोस्तों को भी तेरे खिलाफ कर दूंगी..
और जिन लोगो की वजह से तू इतना उछलता है ,
वक़्त आने पर उनका भी हिसाब कर दूंगी..
उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी…

दीवानी हूँ उसकी ये ऐलान कर दूंगी..
दिल ही क्या ये जान भी उसके नाम कर दूंगी..
और तुझ जैसे 36 भी जाये ना उसके रास्ते पर,
तो माँ कसम 36 के 36 का हिसाब कर दूंगी..
उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी…

मैं अपने अल्फाज़ो से ही उसका इलाज कर दूंगी..
और उसकी तन्हाई को भी हसीं शाम कर दूंगी..
और कौन कहता है कि सिर्फ बन्दे ही प्रोटेक्ट करते है अपनी बंदियों को,
अरे मैं तो लड़की होके भी लड़को वाला काम कर दूंगी..
कि उठी जो एक नजर उसपर तो कत्लेआम कर दूंगी..

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