Woh Aksar Manzil Badal Leti Hai by Amit Auumkar

the digital shayar
Agar Tujhe Lagne Laga Hai ki Tu Uski Aakhiri Manzil Hai
To Ye Yaad Rakhna Ki Woh Aksar Manzil Badal Leti Hai

बहुत अच्छे से जानता हूँ मैं उसे,
वो राहों पर कभी तन्हा नहीं होती है,
कुछ दुरी के लिए किसी के भी साथ चल देती है,
पर अगर तुझे लगने लगा है कि तू उसकी आखिरी मंजिल है, तो ये याद रखना,
कि वो अक्सर मंजिल बदल लेती है..

अभी नया नया खुमार है तुझपर इश्क़ का,
तो ज्यादा ऊँचा मत उड़ना,
जमीं पर जोर से गिरेगा तू जोकि नहीं होना चाहिए..
जब तेरा दिल टुकड़ो में तोड़ देगी वो,
तो इस दुनिया की हर लड़की से नफरत करेगा तू..
जोकि नहीं होना चाहिए..
तू अभी नया है इन राहों पर तो,
तुझे चोट लगने का खतरा थोड़ा जयादा है..
उसे तो जानता हूँ मैं वो अक्सर सम्भल लेती है..
पर अगर तुझे लगने लगा है कि तू उसकी आखिरी मंजिल है, तो ये याद रखना,
कि वो अक्सर मंजिल बदल लेती है..

वो ऐसी ही है, इसमें कोई गलती नहीं है उसकी,
तू उम्मीद मत लगाना उसके जिंदगी भर हमसफ़र होने का..
ना ही उसे पूरी तरह पा लेने की ख़्वाहिश रखना,
ना ही कोई डर रखना उसे खोने का..
वो ज्यादा दिनों तक नहीं देती किसी का साथ,
अक्सर अपनी राहों पर निकल लेती है..
पर अगर तुझे लगने लगा है कि तू उसकी आखिरी मंजिल है, तो ये याद रखना,
कि वो अक्सर मंजिल बदल लेती है..

 
 

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